Stock Market Crash: करेक्शन फेज में बाजार! अब निवेश का मौका, या भागने में भलाई? जानिए एक्सपर्ट से
Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट के बाद निफ्टी 24,000 के नीचे आ गया है और सेंसेक्स भी तेज टूटा है। क्या यह गिरावट निवेश का मौका है या सावधानी जरूरी है? एक्सपर्ट्स ने बाजार की दिशा के साथ गोल्ड और कच्चे तेल पर भी अपनी राय दी है। जानिए डिटेल।
कच्चे तेल की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है।
Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार (9 मार्च) को भारी गिरावट देखने को मिली। दोनों प्रमुख इंडेक्स यानी सेंसेक्स और निफ्टी अब करेक्शन के करीब पहुंच गए हैं। निफ्टी 50 में 650 अंकों से ज्यादा की गिरावट आई। यह 24,000 के स्तर से नीचे आ गया। इससे इंडेक्स करेक्शन जोन के करीब पहुंच गया है। वहीं बीएसई सेंसेक्स करीब 2,100 अंक गिरकर 76,800 के नीचे आ गया।
इसके चलते निवेशकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह गिरावट खरीदारी का मौका है या अभी सावधानी बरतनी चाहिए। इसका जवाब एक्सपर्ट से जानेंगे, लेकिन पहले गिरावट की वजह समझ लेते हैं।
शेयर मार्केट क्रैश के 5 बड़े कारण
बाजार में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब कच्चे तेल की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और वैश्विक शेयर बाजारों के फ्यूचर्स में भी गिरावट देखने को मिली है। इन सभी कारणों से निवेशकों के बीच जोखिम लेने की इच्छा कम हुई है और बाजार में बिकवाली बढ़ी है।
1. क्रूड ऑयल के दाम में तेज उछाल : कच्चे तेल की कीमत बढ़कर $115 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है, जिससे ग्लोबल बाजारों में चिंता बढ़ गई है। एनालिस्ट्स के मुताबिक अगर पश्चिम एशिया का संघर्ष लंबा चला तो भारत जैसे तेल आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर बड़ा दबाव पड़ सकता है।
2. महंगाई बढ़ने का खतरा : तेल की कीमतों में तेजी से वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। इस वजह से केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती टाल सकते हैं, जिससे बाजारों में अनिश्चितता बढ़ सकती है।
3. ग्लोबल बाजारों से कमजोर संकेत : एशियाई और अमेरिकी शेयर बाजारों में तेज गिरावट से भारतीय बाजार को कोई सहारा नहीं मिला। जापान का निक्केई 6% से ज्यादा गिरा, जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी और अमेरिकी बाजार भी दबाव में रहे।
4. मजबूत अमेरिकी डॉलर : मजबूत डॉलर और कमजोर रुपये ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। रुपया लगभग 92.20 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के पास पहुंच गया, जिससे कई सेक्टर प्रभावित हुए।
5. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली : विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। मार्च के पहले चार दिनों में FPIs करीब 21,829 करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं।
क्या गिरावट में खरीदारी का मौका है?
बाजार में उतार चढ़ाव के दौरान अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौका बन सकती है। Quant Mutual Fund के फाउंडर और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर संदीप टंडन का कहना है कि निवेशकों को उतार चढ़ाव से ज्यादा यह देखना चाहिए कि वे ऐसे समय में कैसे प्रतिक्रिया देते हैं।
उनके मुताबिक किसी भी संकट को निवेश के मौके में बदला जा सकता है। असली सवाल यह है कि निवेशक ऐसे समय में घबराकर बाजार से बाहर निकलते हैं या इसे अवसर मानकर निवेश करते हैं।
कच्चे तेल की कीमत कहां तक जा सकती है?
संदीप टंडन के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जरूर आई है, लेकिन यह जल्द ही अपने उच्च स्तर के करीब पहुंच सकती है। उनका मानना है कि कच्चा तेल 120 से 130 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। हालांकि यह तेजी कुछ महीनों तक रह सकती है, लेकिन लंबे समय तक बने रहने की संभावना कम है।
उन्होंने कहा कि उनकी फर्म आने वाले दिनों में धीरे धीरे बाजार में निवेश करने की रणनीति पर काम कर रही है। यानी एक साथ बड़ी रकम लगाने की बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश किया जाएगा।
किन सेक्टरों पर नजर रख सकते हैं निवेशक
सेक्टर के लिहाज से संदीप टंडन का कहना है कि निवेशक उन क्षेत्रों पर ध्यान दे सकते हैं जो बाजार में उतार चढ़ाव के दौरान अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने फार्मा, ऊर्जा और पावर, टेलीकॉम और कुछ सरकारी कंपनियों को ऐसे सेक्टर बताया जो इस समय अपेक्षाकृत मजबूत रह सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए और ऐसे महंगे स्टॉक्स से दूरी बनानी चाहिए जिनकी वैल्यूएशन बहुत ज्यादा है और जिनमें अभी तक बड़ी गिरावट नहीं आई है।
तकनीकी संकेत क्या बता रहे हैं?
टेक्निकल एनालिस्टों का मानना है कि बाजार ने कुछ अहम सपोर्ट लेवल तोड़ दिए हैं, जिससे आगे और गिरावट की आशंका बढ़ गई है। Indiacharts और Strike Money के फाउंडर रोहित श्रीवास्तव के मुताबिक 24,000 के स्तर के नीचे जाने के बाद बाजार की अल्पकालिक संरचना बदल गई है। उनका कहना है कि इस स्तर के टूटने के बाद बाजार में और गिरावट के हालात बन सकते हैं और कई चरणों में गिरावट देखने को मिल सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि जो निवेशक पूरी तरह बाजार में निवेशित हैं, वे अपने पोर्टफोलियो को हेज करने पर विचार कर सकते हैं। वहीं ट्रेडर्स को उन सेक्टरों में शॉर्ट टर्म मौके मिल सकते हैं जिनमें पहले ज्यादा गिरावट नहीं आई थी।
अनिश्चितता के दौर में गोल्ड की भूमिका
भू राजनीतिक तनाव और महंगाई की आशंका के समय निवेशकों की दिलचस्पी सोने में बढ़ जाती है क्योंकि इसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। PlusCash के फाउंडर और सीईओ प्रणव कुमार के मुताबिक सोना और इक्विटी दोनों का निवेश पोर्टफोलियो में अलग अलग रोल होता है।
उन्होंने कहा कि सोना आमतौर पर आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और भू राजनीतिक तनाव के समय अच्छा प्रदर्शन करता है क्योंकि यह बाजार के उतार चढ़ाव के खिलाफ सुरक्षा देता है। वहीं इक्विटी आर्थिक वृद्धि और कंपनियों के मुनाफे से जुड़ी होती है और लंबे समय में संपत्ति बनाने के सबसे प्रभावी साधनों में से एक है।
उनका कहना है कि निवेशकों को केवल एक विकल्प चुनने की बजाय अपने पोर्टफोलियो में दोनों एसेट क्लास शामिल करने चाहिए, ताकि जोखिम संतुलित किया जा सके।
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