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वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले का शेयर बाजार पर क्यों नहीं दिखा बड़ा असर? पूरी वजह समझिए

सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सोमवार 5 जनवरी को सीमित दायरे में कारोबार करते दिखे। निफ्टी में हल्की बढ़त रही, बैंकिंग और ऑटो शेयरों में 1–2 प्रतिशत की मजबूती दिखी, जबकि टेक शेयरों में मामूली कमजोरी रही। कुल मिलाकर बाजार का रुख यह बता रहा था कि निवेशक वेनेज़ुएला की खबरों को किसी बड़े संकट की तरह नहीं देख रहे, बल्कि इसे सिर्फ एक रिस्क प्रीमियम इवेंट मान रहे हैं

Curated By: Vikrant singhअपडेटेड Jan 05, 2026 पर 3:06 PM
वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले का शेयर बाजार पर क्यों नहीं दिखा बड़ा असर? पूरी वजह समझिए
ग्लोबल क्रूड ऑयल सप्लाई में वेनेज़ुएला का योगदान केवल 1 प्रतिशत के आसपास है

वेनेजुएला पर अमेरिका के अचानक किए सैन्य कार्रवाई के बाद ग्लोबल मार्केट्स में हलचल की आशंका जताई जा रही थी। आम तौर पर ऐसी खबरें आते ही शेयर बाजारों में घबराहट दिखती है, रिस्क लेने का सेंटीमेंट कमजोर होता है और निवेशक सुरक्षित एसेट्स की ओर भागते हैं। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि भारतीय शेयर बाजारों पर इस घटना का लगभग कोई बड़ा असर नहीं दिखा। सवाल यही है कि जब दुनिया में तनाव बढ़ा, तब भारतीय बाजार इतने शांत क्यों रहे?

सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सोमवार 5 जनवरी को सीमित दायरे में कारोबार करते दिखे। निफ्टी में हल्की बढ़त रही, बैंकिंग और ऑटो शेयरों में 1–2 प्रतिशत की मजबूती दिखी, जबकि टेक शेयरों में मामूली कमजोरी रही। कुल मिलाकर बाजार का रुख यह बता रहा था कि निवेशक वेनेज़ुएला की खबरों को किसी बड़े संकट की तरह नहीं देख रहे, बल्कि इसे सिर्फ एक रिस्क प्रीमियम इवेंट मान रहे हैं। यानी ऐसी घटना जो थोड़ी अनिश्चितता तो बढ़ाती है, लेकिन अर्थव्यवस्था की बुनियाद को नहीं हिलाती।

भारतीय बाजारों के शांत रहने की एक बड़ी वजह क्रूड ऑयल के दाम भी रहे। जब भी मिडिल ईस्ट या किसी बड़े तेल उत्पादक देश से जुड़ा कोई तनाव बढ़ता है, तो सबसे पहले कच्चे तेल की कीमतें उछलती हैं और भारत जैसे क्रूड ऑयल के बड़े खरीदार देश के लिए यही सबसे बड़ा खतरा बन जाता है। लेकिन इस बार ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 61 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ही स्थिर बना रहा। न तो उसमें तेज उछाल आया और न ही कोई सप्लाई शॉक दिखा। यहां तक कि ओपेक+ देशों ने भी मार्च तक क्रूड ऑयल के उत्पादन स्तर को स्थिर बनाए रखने का फैसला किया है, जिससे बाजार को यह संकेत मिला कि फिलहाल सप्लाई साइड पर कोई बड़ा संकट नहीं है।

तेल के शांत रहने का सीधा मतलब यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर तुरंत कोई दबाव नहीं बना। अगर क्रूड ऑयल का भाव अचानक 80–90 डॉलर की ओर भागता, तो फिर शेयर बाजार की प्रतिक्रिया बिल्कुल अलग होती। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, इसलिए शेयर मार्केट्स ने भी राहत की सांस ली।

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