Share Market Falls: शेयर बाजार इन 7 कारणों से धड़ाम, सेंसेक्स एक हफ्ते में 2,000 अंक लुढ़का

Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजारों में शुक्रवार 23 जनवरी को फिर भारी गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 800 अंकों तक टूट गया। वहीं निफ्टी लुढ़ककर 25,050 के नीचे आ गया। गुरुवार को छोड़ दें, तो इस पूरे हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी में भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स इस पूरे हफ्ते करीब 2000 अंक लुढ़क गया

अपडेटेड Jan 23, 2026 पर 3:56 PM
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Share Market Crash: निफ्टी अपने 200-दिनों के मूविंग एवरेज से भी नीचे फिसल गया

Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजारों में शुक्रवार 23 जनवरी को फिर भारी गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 800 अंकों तक टूट गया। वहीं निफ्टी लुढ़ककर 25,050 के नीचे आ गया। गुरुवार को छोड़ दें, तो इस पूरे हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी में भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स इस पूरे हफ्ते करीब 2000 अंक लुढ़क गया। वहीं निफ्टी अपने 200-दिनों के मूविंग एवरेज से भी नीचे फिसल गया।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली, कमजोर तिमाही नतीजे, रुपये में रिकॉर्ड गिरावट और ग्लोबल अनिश्चितताओं ने मिलकर निवेशकों के मनोबल को कमजोर किया है। ब्रॉडर मार्केट में भी जमकर बिकवाली दिखी। कारोबार के दौरान बीएसई मिडकैप इंडेक्स 1.67 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स 2.32 फीसदी लुढ़क गया।

कारोबार के अंत में, बीएसई सेंसेक्स 769.66 अंक या 0.94 फीसदी टूटकर 81,537.70 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 241.25 अंक या 0.95 फीसदी का गोता लगाकर 25,048.65 के स्तर पर बंद हुआ।


शेयर बाजार की इस गिरावट के पीछे 7 बड़े कारण रहे-

1. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

शेयर बाजार पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से आ रहा है। गुरुवार को विदेशी निवेशकों ने करीब 2,549.80 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। जनवरी में यह लगातार 13वां दिनर रहा जब विदेशी निवेशक शुद्ध रूप से बिकवाल रहे। जनवरी महीने में अब तक विदेशी निवेशक शेयर बाजार से करीब 36,000 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। इस लगातार निकासी से बाजार का सेंटीमेंट कमजोर बना हुआ है।

2. कमजोर तिमाही नतीजे

कुछ बड़े ब्लूचिप और लार्जकैप कंपनियों के निराशाजनक नतीजों ने भी शेयर बाजार पर दबाव डाला। आईसीआईसीआई बैंक और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियों के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे, जिससे निवेशकों में सतर्कता बढ़ी और बैंकिंग व आईटी शेयरों में बिकवाली देखने को मिली।

3. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी भारतीय शेयर बाजार की चाल पर असर डाला। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड का भाव 0.8 प्रतिशत बढ़कर 64.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। कच्चे तेल के महंगे होने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ने, चालू खाते के घाटे और महंगाई के दबाव की आशंका रहती है, जो शेयर मार्केट के लिए नेगेटिव माना जाता है।

4. भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड को लेकर नरम बयानों के बावजूद अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव बना हुआ है। ट्रंप ने फिलहाल यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी से कदम पीछे खींच लिया हो, लेकिन अनिश्चितता अभी खत्म नहीं हुई। ट्रंप ने ग्रीनलैंड के मसले पर भविष्य के किसी समझौते की बात कही हो। लेकिन यह समझौता कैसा होगा, इसे लेकर जानकारी अब भी अस्पष्ट है।

अमेरिका और यूरोप के बीच संबंधों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है, जिसने ग्लोबल निवेशकों को सतर्क कर दिया है। ऐसे में निवेशक और पॉलिसी मेकर्स अब इन घटनाओं के लॉन्ग-टर्म भू-राजनीतिक प्रभावों का आकलन कर रहे हैं।

5. अदाणी ग्रुप के शेयरों में भारी बिकवाली

अदाणी ग्रुप के शेयरों में भी शुक्रवार को जोरदार गिरावट देखने को मिली। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने 65 मिलियन डॉलर के एक कथित धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी मामले में गौतम अदाणी और सागर अदाणी को समन भेजने के लिए अदालत से अनुमति मांगी है। इस खबर के बाद अदाणी ग्रुप के कई शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिसका असर बाकी बाजार पर भी पड़ा।

6. बैंकिंग शेयरों में कमजोरी

शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली के बीच बैंकिंग शेयर भी दबाव में रहे। बैंक निफ्टी ने पिछले सत्र की बढ़त गंवा दी और आज कारोबार के दौरान करीब 1 प्रतिशत तक फिसल गया। पंजाब नेशनल बैंक और यस बैंक जैसे शेयरों में खासतौर पर कमजोरी देखने को मिली, जिससे बैंकिंग इंडेक्स पर नेगेटिव असर पड़ा।

7. रुपये में रिकॉर्ड गिरावट

भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 41 पैसे गिरकर 91.99 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। विदेशी पूंजी की निकासी, ग्लोबल अनिश्चितता और डॉलर की मजबूती ने रुपये को कमजोर किया है। फॉरेक्स बाजार के जानकारों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक का हस्तक्षेप उतार-चढ़ाव को कुछ हद तक थाम रहा है, लेकिन रुपये की मूल कमजोरी दूर नहीं हो पा रही। जब तक भू-राजनीतिक जोखिम कम नहीं होता और अमेरिका के साथ संभावित व्यापार समझौते पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है।

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