FIIs की बिकवाली ऐसे ही रहेगी जारी या ये फिर करेंगे भारत की तरफ रुख! जानिए एक्सपर्ट्स की क्या है राय

एफआईआई ने भारतीय बाजार में पिछले अक्टूबर से बिकवाली शुरु की है। सेबी के आंकड़ों के मुताबिक 1 अक्टूबर से अब तक एफआईआई ने 20.7 अरब डॉलर की बिकवाली की है

अपडेटेड Apr 21, 2022 पर 5:33 PM
Story continues below Advertisement
हेम सिक्योरिटीज के मोहित निगम का कहना है कि हमारा विश्वास है कि बाजार के लिए घरेलू संस्थागत निवेशक एक मजबूत योद्धा के रूप में उभरकर सामने आए हैं

रूस-यूक्रेन युद्ध और महंगाई से जुड़ी चिंता के बीच विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) इस साल अब तक नेट इक्विटी सेलर रहे हैं। यहां तक की पिछले हफ्ते आई एफआईआई की थोड़ी बहुत खरीदारी भी ठंडी पड़ गई है। स्थितियों में तुरंत किसी बदलाव की उम्मीद भी काफी कम नजर आ रही है।

HSBC Global Research ने निवेशकों के लिए जारी 30 मार्च के अपने नोट में कहा है कि सप्लाई में दिक्कत आ सकने की संभावना के कारण कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं जिससे महंगाई से जुड़ी चिंता बढ़ गई है। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति डॉलर बैरल के ऊपर बनी रहती हैं तो महंगाई में 1 परसेंटेज प्वाइंट की बढ़ोतरी होगी। वहीं जीडीपी में 0.9 परसेंटेज प्वाइंट की गिरावट होगी।

गौरतलब है कि एफआईआई ने भारतीय बाजार में पिछले अक्टूबर से बिकवाली शुरु की है। सेबी के आंकड़ों के मुताबिक 1 अक्टूबर से अब तक एफआईआई ने 20.7 अरब डॉलर की बिकवाली की है। 2022 में अब तक एफआईआई ने कुल 15.9 अरब डॉलर की बिकवाली की है।


HSBC Global Research ने अपने नोट में आगे कहा है कि अगर रूस और यूक्रेन का संघर्ष और लंबा खिंचता है तो यह बिकवाली और बढ़ सकती है।

एफआईआई की बिकवाली में योगदान करने वाला एक और फैक्टर चीन में एक बार फिर कोविड -19 के बढ़ते मामले हैं। चीन ने कोविड से निपटने के लिए देश भर में कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं जिससे चीन की इकोनॉमी की ग्रोथ के धीमी पड़ने की संभावना बनती नजर आ रही है। चीन की इकोनॉमी में मंदी का असर ग्लोबल ग्रोथ पर भी देखने को मिलेगा।

गौरतलब है कि IMF ने इन हालात में ग्लोबल इकोनॉमी के साथ ही चाइना और भारत जैसे देशों के इकोनॉमी की ग्रोथ का अनुमान भी घटा दिया है। इसके मद्देनजर दुनिया भर में इक्विटी इन्वेस्टमेंट कम होता नजर आ रहा है और फंड मैनेंजर अपने पास कैश रखने को वरियता दे रहे हैं। अमेरिकी इक्विटी फंडों से लगातार दूसरे महीने भारी निकासी होती दिखी है। वहीं यूरोपियन फंडों से लगातार 9वें हफ्ते निकासी होती दिखी है।

इसी तरह पिछले 6 कारोबारी सत्रों में एफआईआई ने 2 अरब डॉलर की इंडियन इक्विटी की बिकवाली की है। लेकिन इस बीच रोशनी की हल्की किरण भी दिख रही है।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के दीपक जसानी का कहना है कि अगर अगले कुछ महीनों में इंटरनेशनल तनाव कम होता है तो डॉलर की सुरक्षित विकल्प वाली चमक थोड़ी कम होगी और निवेशकों के पैसा का प्रवाह डॉलर से निकलकर दुनिया के दूसरे देशों और दूसरे निवेश विकल्पों की तरफ होगा। जिससे उभरते बाजारों के शेयरों को फायदा होगा। इसके अलावा जानकारों को कंपनियों के अच्छे प्रदर्शन से भी कुछ राहत मिलने की संभावना है।

बाजार में लौटी  हरियाली, जानिए दलाल स्ट्रीट में छाई इस उमंग की क्या है वजह

मार्केट एनालिस्ट का मानना है कि चौथी तिमाही में फाइनेंशियल, कमोडिटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल कंपनियों की नतीजे अच्छे रहेंगे। हालांकि यह भी सच है कि अभी तक एचडीएफसी बैंक, इंफोसिस, टीसीएस के नतीजों ने निराश ही किया है।

दूसरी तरफ नजर डालें तो स्टॉक मार्केट को एफआईआई की बिकवाली के बीच डीआईआई से अच्छा सपोर्ट मिला है। हेम सिक्योरिटीज के मोहित निगम का कहना है कि हमारा विश्वास है कि बाजार के लिए घरेलू संस्थागत निवेशक एक मजबूत योद्धा के रूप में उभरकर सामने आए हैं। भारत की भावी ग्रोथ पर विश्वास बनाए रखते हुए इन्होंने अच्छी खरीदारी की है जिसके चलते एफआईआई की तरफ से की गई बिकवाली की काफी हद तक भरपाई हो पाई है।

सेमको सिक्योरिटीज की येशा शाह का कहना है कि भारतीय इकोनॉमी की बुनियादी मजबूती और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच इसकी मजबूत स्थिति को देखते हुए एफआईआई एक बार फिर भारत की तरफ रुख करेंगे।Yesha Shah का कहना है कि भारत में राजनीतिक स्थिरता है और इकोनॉमिक ग्रोथ को गति देने के लिए सरकार नीतिगत फैसले लेने में पीछे नहीं हटती। यही बात भारत को विदेशी निवेशकों के लिए आर्कषक बनाती है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।