विप्रो के 15,000 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक में प्रमोटर्स भी हिस्सा लेंगे। कंपनी की सीएफओ अपर्णा अय्यर ने 16 अप्रैल को यह कहा। कंपनी ने 16 अप्रैल को कहा है कि बोर्ड ने 15,000 करोड़ रुपये के बायबैक के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बायबैक का प्रोसेस 2027 की पहली तिमाही तक पूरा हो जाने की उम्मीद है।
बायबैक में प्रति शेयर 250 रुपये कीमत तय
Wipro ने शेयर बायबैक के लिए प्रति शेयर 250 रुपये की कीमत तय की है। यह 16 अप्रैल को कंपनी के शेयर के क्लोजिंग प्राइस से 19 फीसदी ज्यादा है। पिछले साल इंफोसिस के 18,000 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक प्रोग्राम में प्रमोटर्स और प्रमोटर्स ग्रुप ने हिस्सा नहीं लिया था। 31 दिसंबर, 2025 को विप्रो में प्रमोटर्स और प्रमोटर्स ग्रुप की 72.63 फीसदी हिस्सेदारी थी।
रिटेल इनवेस्टर्स के इनटाइटलमेंट रेशियो में कमी आ सकती है
विप्रो के शेयर बायबैक में प्रमोटर्स और प्रमोटर्स ग्रुप के हिस्सा लेने से रिटेल इनवेस्टर्स के इनटाइटलमेंट रेशियो में कमी आ सकती है। इंफोसिस के शेयर बायबैक में प्रमोटर्स और प्रमोटर्स ग्रुप के हिस्सा नहीं लेने पर अरिहंत कैपिटल मार्केट्स में इंस्टीट्यूशनल बिजनेस की हेड अनीता गांधी ने कहा था कि प्रमोटर्स के शेयर बायबैक में पार्टिसिपेट नहीं करने से बिजनेस की बेहतर संभावनाओं पर भरोसे का पता चलता है।
कंपनी ने बाजार बंद होने के बाद नतीजों का ऐलान किया
विप्रो ने 16 अप्रैल को शेयर बाजार बंद होने के बाद नतीजों का ऐलान किया। कंपनी का शेयर 0.19 फीसदी की मामूली तेजी के साथ 210.15 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक महीने में कंपनी का शेयर 7.71 फीसदी चढ़ा है। इस दौरान निफ्टी आईटी इंडेक्स 9.27 फीसदी चढ़ा है। हालांकि, इस साल विप्रो का शेयर 21.40 फीसदी गिरा है।
कंपनी के नेट प्रॉफिट में मामूली गिरावट
विप्रो ने 16 अप्रैल को मार्च तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। कंपनी का नेट प्रॉफिट 1.89 फीसदी घटकर 3,501.8 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी का प्रॉफिट 3,569.6 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू 7.6 फीसदी बढ़कर 24,236.3 करोड़ रुपये रहा। FY2025-26 में कंपनी का प्रॉफिट साल दर साल आधार पर 0.47 बढ़कर 13,197.4 करोड़ रुपये रहा। विप्रो देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में से एक है।
शेयर बायबैक प्रोग्राम का मतलब
शेयर बायबैक प्रोग्राम के तहत कंपनी शेयरहोल्डर्स से अपने शेयर खरीदती है। इससे सर्कुलेशन में कुल शेयरों की संख्या घट जाती है। इससे सर्कुलेशन में बचे शेयरों की वैल्यू बढ़ जाती है। कंपनी शेयर बायबैक प्रोग्राम के तहत शेयर की ज्यादा कीमत तय करती है। इससे शेयरहोल्डर्स को बायबैक में पार्टिसिपेट करना फायदेमंद लगता है।