दिग्गज इनवेस्टर मार्क मोबियस का 15 अप्रैल को 89 साल की उम्र में देहांत हो गया। भारत जैसे उभरते बाजारों को फोकस में लाने में उनकी बड़ी भूमिका रही। वह इंडिया को लंबी अवधि के निवेश के लिए बड़े मौके के रूप में देखते थे। उन्होंने कई मौकों पर इसकी चर्चा की थी। इंडिया के बारे में उनकी 2021 में बड़ी बात कही थी। उन्होंने कहा था कि भारत 50 सालों वाली तेजी के रास्ते पर है।
भारत की कई दशकों वाली ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा
मोबियस को भारत की कई दशकों वाली ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा था। उन्होंने 2021 में इंडिया की तुलना चीन से करते हुए कहा था कि भारत आज उस मुकाम पर है, जहां चीन एक दशक पहले था। उनका संकेत मार्केट और बिजनेस के माहाौल को बढ़ावा देने वाली सरकार की पॉलिसी से था। वह इंडिया को शॉर्ट टर्म इनवेस्टमेंट के डेस्टिनेशन के रूप में नहीं देखते थे।
भारती की तेज ग्रोथ की तीन सबसे बड़ी वजहें
वह इंडिया को एक स्ट्रक्चरल स्टोरी के रूप में देखते थे, जो आबादी में युवाओं की ज्यादा हिस्सेदारी, रिफॉर्म्स और बढ़ते कैपिटल मार्केट्स की बदौलत लगातार ग्रोथ करता रहेगा। अगस्त 2021 में रायटर्स ने उनके उस बयान के बारे में बताया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि चीन में रेगुलेटर्स की सख्ती के बाद विदेशी इनवेस्टर्स इंडिया और अमेरिका में निवेश कर रहे हैं।
पोर्टफोलियो का 50 फीसदी भारत में निवेश करने को तैयार
मोबियस का मानना था कि भारत में निवेश के काफी मौके हैं। 2025 तक भारत पर उनका भरोसा और बढ़ गया था। उन्होंने इंडिया को अपना 'टॉप मार्केट' बताया था। जनवरी 2025 में मनीकंट्रोल ने उनका एक इंटरव्यू किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि वह अपने पोर्टफोलियो का 50 फीसदी हिस्सा इंडिया में निवेश करना चाहेंगे।
सेंसेक्स 2028 तक 100000 के लेवल को छू लेगा
उनका मानना था कि ग्रोथ, रिफॉर्म्स और कैपिटल पर स्ट्रॉन्ग रिटर्न की वजह से इंडिया इनवेस्टमेंट के लिए सबसे अच्छे डेस्टिनेशंस में से एक है। 2021 में रायटर्स ने बताया था कि उनके फंड का भारत में काफी ज्यादा यानी करीब 20 फीसदी निवेश है। नवंबर 2023 में उन्होंने कहा था कि सेंसेक्स 5 साल के अंदर 1,00,000 अंक पर पहुंच जाएगा। इस हिसाब से अभी सेंसेक्स के इस लेवल पर पहुंचने के लिए अभी दो साल का वक्त बचा है।
मैन्युफैक्चरिंग के एक्सपोर्ट में भी भारत की बढ़ेगी धाक
मोबियस ने जनवरी 2025 में मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि इंडिया एक्सपोर्ट के मामले में भी झंडे गाड़ने जा रहा है। भारत न सिर्फ सॉफ्टवेयर के निर्यात में आगे होगा बल्कि यह मैन्युफैक्चरिंग में भी अपनी स्थिति मजबूत करेगा। उनका मानना था कि रुपये में कमजोरी से निर्यात से जुड़े सेक्टर्स को फायदा होगा। विदेशी बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी। हालांकि, इंडिया में रेगुलेटरी एनवायरमेंट को लेकर उन्होंने चिंता भी जताई थी।