ऑनलाइन ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म जीरोधा का पब्लिक होने का कोई प्लान नहीं है क्योंकि इसे फंड की जरूरत नहीं है। साथ ही कंपनी, लिस्टिंग के साथ आने वाली अतिरिक्त जांच से बचना चाहती है। यह बात जीरोधा के को-फाउंडर और सीईओ नितिन कामत ने -Awaaz से कही है। कामत ने एक इंटरव्यू में कहा, "हम पहले से ही एक बेहद ज्यादा रेगुलेटेड इंडस्ट्री में हैं, और हम खुद को और अधिक रेगुलेटेड नहीं करना चाहते हैं।"
कामत ने आगे कहा कि कंपनी हर साल ESOP बायबैक प्रोग्राम्स के माध्यम से जीरोधा के कर्मचारियों को एग्जिट की पेशकश कर रही है। कंपनी को नहीं लगता कि इक्विटी मार्केट कंपनी की मौजूदा वैल्यूएशन को कई गुना बढ़ा पाएगा। कामत ने कहा कि हो सकता है कि लिस्टिंग से वैल्यूएशन 1-2 गुना बढ़ जाए लेकिन 5 गुना तो नहीं बढ़ेगी।
अगर रेगुलेटर्स बोलेंगे तो होना पड़ेगा लिस्ट
नितिन कामत ने कहा कि उनकी कंपनी की एक फिलॉसफी है और तिमाही लक्ष्यों आदि के मामले में कैपिटल मार्केट डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स का पालन करना कठिन होगा। यह भी कहा, “यदि रेगुलेटर्स आते हैं और कहते हैं कि हमें लिस्ट होने की जरूरत है, तो हमें ऐसा करना होगा। लेकिन इसके अलावा, लिस्ट होने की कोई योजना नहीं है।” कामत के मुताबिक, पिछले 10-15 वर्षों में बाजार की वृद्धि 'फास्ट फॉरवर्ड' रही है, और कोविड के बाद से हमने लोगों को पूंजी बाजारों को पैसे लगाने के एक रास्ते के रूप में अपनाते हुए देखा है। पिछले 4-5 वर्षों में भागीदारी के मामले में सबसे बड़ी तेजी देखी गई है।
कारोबार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर, कामत ने कहा कि आज की बदलती दुनिया में हर कोई संभावित रूप से बाधित हो सकता है, और जीरोधा आगे रहने के लिए एक अलग आउटलुक बनाए रखने की कोशिश करती है। जब आप वास्तव में बड़े हो जाते हैं, तो आप उतनी तेजी से नहीं बदल सकते हैं, जितना हम 2015-16 की तुलना में कर सकते थे। आगे कहा कि हम प्रोडक्ट और ऑफरिंग्स को अपडेट करते रहते हैं, और हमारे कारोबार की खासियत वह फिलॉसफी है, जिसके साथ हम चलते हैं।
नितिन कामत ने कहा कि अक्टूबर के बाद से ऑप्शंस मार्केट में गतिविधि काफी कम हो गई है। फ्यूचर्स सेगमेंट में आधे ग्राहक पैसे खो रहे हैं, और बाकी आधे मुनाफा कमा रहे हैं। लेकिन ऑप्शंस सेगमेंट, भागीदारी और बाजार गतिविधि दोनों ही मामलों में, ठंडा पड़ गया है।