ऑनलाइन ब्रोकिंग फर्म जीरोधा (Zerodha) इंडस्ट्री में 13 साल पूरे होने का जश्न मना रही है। इस मौके पर Zerodha ने लिखे एक ब्लॉग पोस्ट में खुलाया किया कि उसके नए बिजनेस का करीब 10% रेफरल प्रोग्राम और पार्टनर प्रोग्राम के जरिए आता है। ब्रोकिंग फर्म ने यह भी खुलाया कि मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) के एक कदम से अब नए बिजनेस के इस 10% हिस्से को लेकर कारोबारी जोखिम पैदा हो सकता है। SEBI ने ब्रोकरेज फर्मों को ऐसे फिनफ्लुएंसर के साथ साझेदारी करने या काम करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है, जो खुद को एडवाइजर्स या एनालिस्ट्स के रूप में दिखाते हैं।
SEBI ने 25 अगस्त को एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया था, जिसमें रजिस्टर्ड संस्थाओं को फिनफ्लुएंसर जैसी अनरजिस्टर्ड संस्थाओं के साथ पार्टनरशिप को सीमित करने की मांग की गई थी। पेपर में इस बात पर जोर दिया गया था कि हाल में कैसे फिनफ्लुएंसर की संख्या अचानक से बढ़ी है और कैसे वे "कमीशन के बदले अपने फॉलोअर्स को किसी प्लेटफॉर्म से प्रोडक्ट, सेवाओं और शेयरों को खरीने के लिए प्रभावी ढंग से लुभा रहे" हैं।
कंसल्टेशन पेपर में "ऐसे कमीशन पर अंकुश लगाने के लिए" रजिस्टर्ड और अनरजिस्टर्ड संस्थाओं के बीच इन साझेदारी पर रोक लगाने की मांग की गई है। Zerodha ने अपने ब्लॉग में कहा कि सेबी ने जिस इरादे के साथ यह प्रस्ताव रखा है, वह उसका समर्थन करता है।
ब्रोकिंग फर्म ने कहा, "हमारा मानना है कि अगर कोई SEBI के पास रजिस्ट्रेशन कराए बिना एडवाइजर या एनालिस्ट की तरह काम करता है, तो उसे ग्राहक से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ब्रोकरेज शेयरिंग के जरिए फीस नहीं लेना चाहिए। इसलिए हम कंसल्टेशन पेपर के इरादे का समर्थन करते हैं।"
जीरोधा ने ब्लॉग में यह भी बताया कि इस कदम से उसके बिजनेस पर क्या असर पड़ेगा। ब्रोकरेज ने कहा, "जोखिम यह है कि इससे जुड़ा कोई भी नियम या रेगुलेशन आता है तो हमें अपना रेफरल कार्यक्रम बंद करना पड़ सकता है। फिलहाल हमारे नए बिजनेस का करीब 10 फीसदी इसी रेफरल कार्यक्रम और पार्टनर प्रोग्राम के जरिए आता है।"
मनीकंट्रोल ने कुछ दिन पहले एक रिपोर्ट में बताया था कि कैसे जीरोधा, एंजल वन और मोतीलाल ओसवाल जैसे प्रमुख ब्रोकरेज फर्म नए निवेशकों को लाने के लिए अवैध एडवाइजर्स के साथ साझेदारी कर रहे थे।