Zerodha's View on SEBI's New Direct Payout Rule: शेयरों की खरीद-बिक्री का हिसाब-किताब खटाखट करने का सिस्टम पहले इसी महीने 14 अक्टूबर से लागू होना था लेकिन सेबी ने अब इसकी टाइमलाइन आगे खिसका दी है। अब यह नियम अगले महीने 11 नवंबर से लागू होगा। इस नए नियम को लेकर दिग्गज ब्रोकरेज फर्म जीरोधा (Zerodha) के को-फाउंडर नितिम कामत का कहना है कि इस बदलाव से शेयरों के ट्रांसफर में ब्रोकर्स की भूमिका काफी हद तक कम हो जाएगी और सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी। नितिन कामत ने इसे लेकर ट्वीट में लिखा है कि अभी शेयरों के ट्रांसफर में काफी रिस्क शामिल है लेकिन जब सेबी का नया नियम लागू हो जाएगा तो यह काफी हद तक कम हो जाएगा।
क्या है सेबी का नया डायरेक्ट पेआउट नियम?
डायरेक्ट-पेआउट सिस्टम के तहत क्लियरिंग कॉरपोरेशंस निवेशकों के खाते में सीधे शेयर ट्रांसफर कर देगा। मौजूदा सिस्टम के तहत अभी शेयर ब्रोकर्स के पास रहते हैं और फिर क्लाइंट के डीमैट खाते में शेयरों को ट्रांसफर किया जाता है। सेबी ने इस सिस्टम का ऐलान 5 जून 2024 को किया था। इस नियम को इसलिए लाया गया था ताकि क्लाइंट्स के शेयरों को ब्रोकर्स से अलग रखा जा सके और शेयरों के गलत इस्तेमाल को रोका जा सके। इससे ब्रोकर्स के पास शेयरों की पूलिंग बंद हो जाएगी। पहले यह नियम 14 अक्टूबर को लागू होना था लेकिन अब यह 11 नवंबर को लागू होगा।
हालांकि यह चरणबद्ध तरीके से लागू होने वाली प्रक्रिया है यानी कि पहले तो यह सभी इक्विटी कैश सेगमेंट्स और फिजिकल सेटलमेंट्स के लिए लागू होगा। फिर 14 जनवरी 2025 से सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (SLB) और ऑफर फॉर सेल के लिए भी लागू हो जाएगा और पूरी तरह से डायरेक्ट पेआउट सिस्टम लागू हो जाएगा।
अभी जब निवेशक शेयर खरीदते हैं तो पहले उसे ब्रोकर के पूल अकाउंट में क्रेडिट किया जाता है। इसके बाद ही यह क्लाइंट के डीमैट खाते में जाता है। इस प्रक्रिया के तहत शेयरों के डिस्ट्रीब्यूशन को मैनेज करने का काम ब्रोकर्स करते हैं। ब्रोकर्स का इन शेयरों पर तब तक कंट्रोल रहता है, जब तक इसे क्लाइंट के खाते में भेज नहीं दिया जाता है। जीरोधा के को-फाउंडर के मुताबिक इससे रिस्क बना रहता है क्योंकि ब्रोकर्स के पास कुछ समय तक क्लाइंट्स के शेयर रहते हैं। हालांकि अब सब कुछ बदलने वाला है और नितिन के मुताबिक नए सिस्टम में सुरक्षा ही बढ़ेगी।