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होम लोन लेने से पहले 6 जरूरी बातें जानें

होम लोन का आवेदन देने और प्रोसेसिंग फीस देने से पहले देखें कि कुछ जरूरी तथ्यों का पालन किया है।

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 05, 2013 पर 3:29 PM
होम लोन लेने से पहले 6 जरूरी बातें जानें

घर खरीदना प्रत्येक इंसान के लिए एक बहुत ही अहम आर्थिक फैसला होता है। घर खरीदने के लिए होम लोन का आवेदन देने और प्रोसेसिंग फीस देने से पहले ध्यान दें कि आपने निम्नलिखित तथ्यों का पालन किया है।

1. अपनी लोन लेने की क्षमता को जानें

किसी को भी लोन उसकी आमदनी और कर्ज चुकाने की क्षमता के आधार पर मिलता है। होम लोन देने वाले देनदार लोन की राशि के रुप में ज्यादातर प्रॉपर्टी की 80 फीसदी वैल्यू के बराबर लोन देते हैं। आमदनी को जांचते समय वो आपकी नेट इनकम को नहीं देखते जो पे स्लिप पर लिखी हो बल्कि वो आमदनी देखते हैं जो लोन चुकाने के लिए उपयोग की जाएगी। उदाहरण के लिए आपका एलटीए और मेडिकल अलाउंस आपकी मासिक आमदनी से कटता है। आप इन राशियों का उपयोग तब करते हैं जब आप इन सुविधाओं का उपयोग करते हैं। इसलिए आपको पहले से ही जान लेना चाहिए कि आपकी कितनी आमदनी के आधार पर आपको कितना ज्यादा से ज्यादा लोन मिल सकता है।

2. अपना सिबिल स्कोर जांचे

होम लोन किसी इंसान की क्रेडिट काबिलियत के आधार पर मिलता है। क्रेडिट इनफॉर्मेशन ब्यूरो इंडिया लिमिटेड (सिबिल) आपको 300 से 900 अंकों के बीच एक स्कोर प्रदान करता है। ये इस आधार पर तय होता है कि आपका पहले का क्रेडिट कार्ड उपयोग कितना है, आप अपना बैंक अकाउंट कैसे रखते हैं, कोई चेक तो बाउंस नहीं हुआ है, मौजूदा लौन, बिना इंश्योरेंस के मौजूदा लोन, लोन के रीपेमेंट और आपने कितनी बार लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन दिया है। जिन लोगों को सिबिल स्कोर 700 से ज्यादा होता है उन्हें होम लोन आसानी से मिल जाता है। जब भी आप किसी क्रेडिट कार्ड या लोन के लिए आवेदन देते हैं तो लेनदार सिबिल से आपका स्कोर जानने की कोशिश करते हैं। अपने लोन लेने की क्षमता जानने के लिए 3-4 बैंकों में प्रोसेसिंग फीस का भुगतान करना ऐसी गलती है जो बहुत से लोग करते हैं। जितनी बार आप लोन के लिए आवदेन करते हैं उतनी ही बार सिबिल इसे क्रेडिट के दायरे में डाल देता है और आपके लोन मिलने की संभावनाएं उतनी ही कम होती जाती हैं। सिबिल रेटिंग, आवश्यक रकम निकालकर आपकी नेट सैलरी, मौजूदा लौन की चुकाई जा रही ईएमआई आदि कुछ तथ्य हैं जिनसे आपके लोन चुकाने की क्षमता का आकलन किया जाता है।  
 
3. ब्याज दर के प्रकार

लोन चुकाने के लिए आप जिस तरह की ब्याज दर का चुनाव करते हैं उससे आपके ईएमआई पर सीधा असर पड़ता है। आपके लिए फिक्स्ड रेट होम लोन और फ्लोटिंग रेट होम लोन के बीच अंतर जानना काफी जरूरी होता है। अगर आप फिक्स्ड रेट होम लोन लेते हैं तो पूरे लोन के काल के लिए आपकी ईएमआई बदलती नहीं है। फिक्स्ड रेट होम लोन लेना तब लाभकारी होता है जब आगे चलकर ब्याज दरों के बढ़ने का संभावना हो। फ्लोटिंग रेट में बेस रेट के साथ फ्लोटिंग रेट के आधार पर आपके होम लोन की ब्याज दर तय की जाती है। इससे बेस रेट के उतार चढ़ाव का असर ईएमआई पर पड़ता है। फ्लोटिंग रेट होम लोन लेना तब लाभकारी होता है जब निकट भविष्य में ब्याज दरें नीचे आने की उम्मीद हो।

4. मोल भाव करना

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