Nandigram Assembly Seat: HC में सुवेंदु की जीत के खिलाफ CM ममता की याचिका पर सुनवाई 24 जून तक टली

TMC लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटी, लेकिन ममता बनर्जी BJP के सुवेंदु अधिकारी से 1,956 वोटों के मामूली अंतर से हार गईं

अपडेटेड Jun 18, 2021 पर 1:38 PM
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पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerje) ने नंदीग्राम सीट पर अपने राइट हैंड से विरोधी बने सुवेंदु अधिकारी की जीत को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ममता बनर्जी द्वारा नंदीग्राम रिजल्ट को चुनौती देने वाले मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई 24 जून तक के लिए टाल दी गई है।

भले ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटी, लेकिन बनर्जी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अधिकारी से 1,956 वोटों के मामूली अंतर से हार गईं। 32 साल में बनर्जी की ये पहली चुनावी हार थी।

TMC नेताओं के मुताबिक बनर्जी की याचिका में आरोप लगाया गया कि वोटों की गिनती ठीक से नहीं हुई। दिसंबर 2020 में BJP में शामिल होने वाले अधिकारी ने सीट जीती और बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता बने।

टीएमसी प्रमुख ने चुनाव परिणाम घोषित होने के एक दिन बाद 3 मई को कहा था कि वह अदालत का रुख करेंगी।

बनर्जी ने कहा था, "हम निश्चित रूप से अदालत का रुख करेंगे। हमारी पार्टी के कार्यकर्ता भी धरना दे रहे हैं। हम भारत के चुनाव आयोग (EC) से एक लिखित बयान चाहते हैं कि EVM मशीन, VVPAT और बैलेट पेपर अलग-अलग रखे जाएंगे, ताकि उनके साथ छेड़छाड़ न हो और अगर छेड़छाड़ की गई, तो उन्हें फोरेंसिक टेस्ट से गुजरना होगा।”

उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से चुनाव आयोग के खिलाफ संयुक्त रूप से सुप्रीम कोर्ट जाने की अपील की थी और शीर्ष अदालत से चुनाव आयोग पर कुछ प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया था।


BJP के IT सेल के राष्ट्रीय प्रमुख अमित मालवीय ने गुरुवार को ट्वीट किया, "आप दो बार चुनाव कैसे हारते हैं? पहले, चुनाव में और फिर, एक हारे हुए व्यक्ति की तरह, अदालत में लोगों के फैसले को चुनौती देना। ममता बनर्जी को दो बार नंदीग्राम हार का अपमान सहते हुए देखना दिलचस्प होगा।"

विधानसभा चुनावों से पहले और उसके दौरान, TMC चुनाव आयोग के साथ आमने-सामने थी, सत्ताधारी दल ने बार-बार केंद्र में BJP के नेतृत्व वाली सरकार के इशारे पर चुनाव पैनल पर काम करने का आरोप लगाया। हालांकि, BJP और आयोग दोनों ने इस तरह के आरोपों का खंडन किया था।

नंदीग्राम चुनाव के बारे में विवाद उस दिन छिड़ गया था, जिस दिन मतदान हुआ था यानी 1 अप्रैल। मतदान के दिन, बनर्जी पैर की चोट के कारण उस समय व्हीलचेयर पर थी। उन्होंने बूथ-कैप्चरिंग का आरोप लगाया और दो घंटे के लिए मतदान केंद्र छोड़ने से इनकार कर दिया।

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