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EV की मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने से पहले तलाशना होगा चीन का विकल्प, नहीं तो दूर रह जाएगा E-Mobility का लक्ष्य

अभी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में इस्तेमाल होने वाली ज्यादातर चीजों के उत्पादन के मामले में चीन का वर्चस्व है। दुनिया में उत्पादित 65 फीसदी कोबाल्ट और 93 फीसदी मैंगनीज की प्रोसेसिंग चीन करता है। दुनिया में उत्पादित हर चार बैटरी में से तीन का उत्पादन चीन में होता है

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Mar 07, 2023 पर 2:25 PM
EV की मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने से पहले तलाशना होगा चीन का विकल्प, नहीं तो दूर रह जाएगा E-Mobility का लक्ष्य
जीटीआरआई की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की मैन्युफैक्चरिंग का नौकरियों और प्रदूषण भी असर पड़ेगा। रिपोर्ट में कंज्यूमर्स, इंडस्ट्री और सरकार से जुड़े 13 मसलों की पहचान की गई है। इसमें कहा गया है कि सरकार को इन मसलों पर ध्यान देने की जरूरत है।

इंडिया में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की मैन्युफैक्चरिंग से चीन पर उसकी निर्भरता और बढ़ जाएगी। यह निर्भरता रॉ मैटेरियल, मिनरल प्रोसेसिंग और बैटरी प्रोडक्शन के मामले में होगी। Global Trade Research Initiative (GTRI) कि रिपोर्ट में यह बात कही गई है। जीटीआरई एक थिंकटैंक है। इसमें यह भी कहा है कि EV सेक्टर को इलेक्ट्रिक गाड़ियों के उत्पादन और इस्तेमाल से पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को समझने की भी जरूरत है। बैटरी बनाने में प्रदूषण बढ़ाने वाले कई तत्व निकलते हैं। बैटरी को चार्ज करने और उसके निस्तारण (Disposal) का असर भी पर्यावरण पर पड़ेगा।

60 फीसदी लिथियम की प्रोसेसिंग चीन करता है

GTRI की रिपोर्ट में कहा गया है कि EV के उत्पादन में होने वाले करीब 7 फीसदी मैटेरियल का आयात चीन और कुछ दूसरे देशों से होता है। इसमें कहा गया है "EV की वजह से चीन पर इंडिया की निर्भरता बढ़ जाएगी। यह रॉ मैटेरियल, मिनरल प्रोसेसिंग और बैटरी उत्पादन के मामले में होगा।" चीन ने ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका में लिथियम की सबसे बड़ी माइंस (खदान) खरीदी है। दुनिया में उत्पादित 60 फीसदी लिथियम की प्रोसेसिंग चीन करता है।

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