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Ola Incident : लिथियम-आयन बैट्रीज क्यों पकड़ लेती हैं आग?

लिथियम-आयन बैटरी हमारी जिंदगी से काफी जुड़ चुकी है। हमारे मोबाइल फोन से लेकर दूसरे कई इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स में इसका इस्तेमाल होता है। इसलिए यह तब तक हमारे जीवन का हिस्सा बनी रहेगी, जब तक इससे ज्यादा खूबियों वाली बैटरी की कोई दूसरी टेक्नोलॉजी नहीं आ जाती

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 31, 2022 पर 11:03 AM
Ola Incident : लिथियम-आयन बैट्रीज क्यों पकड़ लेती हैं आग?
लिथियम-आयन बैट्री का मार्केट 193.13 अरब डॉलर तक पहुंच जाने का अनुमान है। अब तक लिथियम-आयम बैट्रीज को कमोबेश सेफ माना जाता रहा है।

हाल में एक प्रमुख ब्रांड के दो इलेक्ट्रिक स्कूटर्स (Electric Scooters) के आग के गोला में बदलने (Catching Fire) की खबर आई है। इससे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की सेफ्टी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कई तरह के सवाल पूछे जा रहे है। लोग जानना चाहते हैं कि क्या लिथियम-आयन बैटरी (Lithium-Ion Batteries) में हमेशा आग लगने का खतरा होता है? क्या कोई खास स्थितियां हैं, जिनमें इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के आग पकड़ने का खतरा होता है?

एनर्जी स्टोरेज का सबसे अच्छा सॉल्यूशन

लिथियम-आयन बैट्रीज को कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए एनर्जी स्टोरेज का सबसे अच्छा सॉल्यूशन माना जाता है। इसकी वजह इसकी पावर डेंसिटी है। लीड-एसिट बैटरी करीब 25 वॉट प्रति घंटा एनर्जी स्टोर करती है। निकेल हाइड्राइड बैटरी प्रति घंटा 100 वॉट एनर्जी स्टोर कर सकती है। इन दोनों के मुकाबले लिथियम-आयन बैट्रीज की स्टोरेज क्षमता ज्यादा है। यह प्रति घंटा 150 वॉट एनर्जी स्टोर कर सकती है।

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