अप्रैल से दिसंबर में पैसेंजर व्हीकल्स एक्सपोर्ट 46% बढ़ा, मारुति सुजुकी रही सबसे आगे

सोसायटी ऑफ ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-दिसंबर 2021-22 में यात्री कारों का निर्यात 45 फीसदी बढ़कर 2,75,728 यूनिट पहुंच गया

अपडेटेड Jan 16, 2022 पर 3:46 PM
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मारुति सुजुकी ने मारी बाजी

भारत में पैसेंजर व्हीकल्स के एक्सपोर्ट में अप्रैल-दिसंबर के दौरान शानदार बढ़ोतरी देखने को मिली है। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (Society of Indian Automobile Manufacturers – SIAM) के आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष 2021-22 के पहले 9 महीनों में भारत के पैसेंजर व्हीकल का एक्सपोर्ट 46 फीसदी बढ़ा है।

इस दौरान 1.68 लाख यूनिट्स के निर्यात के साथ मारुति सुजुकी इंडिया (Maruti Suzuki India) सबसे आगे रही है। इस दौरान कुल 4,24,037 पैसेंजर व्हीकल्स का एक्सपोर्ट किया गया है, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में 2,91,170 व्हीकल्स को एक्सपोर्ट किया गया था।

पैसेंजर कारों के एक्सपोर्ट में 45% का इजाफा


SIAM के डेटा के मुताबिक, इस अवधि के दौरान पैसेंजर कारों का एक्सपोर्ट 45 फीसदी बढ़कर 2,75,728 यूनिट पर पहुंच गया। जबकि यूटिलिटी वाहनों का एक्सपोर्ट 47 फीसदी बढ़कर 1,46,688 यूनिट रहा। इस दौरान वैन एक्सपोर्ट करीब दोगुना होकर 1,621 यूनिट रहा। जबकि फिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 877 यूनिट रहा था।

मारुति सुजुकी इंडिया ने मारी बाजी

मारुति सुजुकी इंडिया (Maruti Suzuki India -MSI) ने इस अवधि के दौरान एक्सपोर्ट के मामले में सबसे आगे रही। इसके बाद हुंडई मोटर इंडिया (Hyundai Motor India) और किआ इंडिया (Kia India) का स्थान रहा। MSI ने 1,67,964 पैसेंजर व्हीकल्स का एक्सपोर्ट किया। यह इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के दौरान 59,821 यूनिट्स के आंकड़े का लगभग तीन गुना है। इसके साथ ही कंपनी ने वित्त वर्ष के पहले नौ महीने में सुपर कैरी (LCV) की 1,958 यूनिट का एक्सपोर्ट किया। मारुति के प्रमुख यात्री वाहन एक्सपोर्ट बाजारों में लैटिन अमेरिका, आसियान, अफ्रीका, पश्चिम एशिया और पड़ोसी देश शामिल हैं। इसके टॉप 5 एक्सपोर्ट मॉडल बलेनो, डिजायर, स्विफ्ट, एस-प्रेसो और ब्रेजा रहे।

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मारुति सुजुकी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राहुल भारती ने कहा कि करीब दो साल पहले कंपनी ने एक्सपोर्ट में भारी बढ़ोतरी की दिशा में एक मजबूत प्रयास करने का फैसला किया था। हमारी इस महत्वाकांक्षा के पीछे कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्ट्री की स्थानीयकरण (localisation) को बढ़ाने और मेक इन इंडिया के तहत एक्सपोर्ट में निर्यात में बढ़ोतरी की रणनीति भी है।

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