DeepFake पर सरकार कैसे कसेगी नकेल? यहां जानिए पूरी डिटेल

डीपफेक' में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करते हुए किसी तस्वीर या विडियो में मौजूद व्यक्ति की जगह किसी दूसरे को दिखा दिया जाता है। इसमें इतनी समानता होती है कि असली और नकली में अंतर करना काफी मुश्किल होता है। हालांकि सरकार इस मामले में सख्त कदम उठाने की तैयारी में है

अपडेटेड Nov 27, 2023 पर 2:47 PM
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DeepFake: सोशल मीडिया पर पॉपुलर सेलिब्रिटीज डीपफेक वीडियो वायरल होने के बाद डीपफेक का मामला गरमा गया है।

DeepFake: इन दिनों डीपफेक वीडियोज तेजी से वायरल हो रहे हैं। खासकर बड़े सेलेब्स के। इसका शिकार कई स्टार्स पहले ही चुके हैं। एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना के Deepfake वीडियो का मामला विवाद में बना हुआ है। अब इस लिस्ट में नया नाम जुड़ गया है आलिया भट्ट का भी नाम जुड़ गया है। डीपफेक का मामला बढ़ते देखते हुए सरकार बी कार्रवाई करने के लिए मजबूर हो गई। सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को एक सलाह भेजी है। उनके साथ बैठकें की हैं। इस मामले में Artificial Intelligence (AI) के कंटेंट से निपटने के मकसद से संभावित समाधान पेश किए गए हैं।

डीपफेक को कंट्रोल करने के लिए सरकार पूरी कोशिश में जुट गई है। इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव की अध्यक्षता में एक मीटिंग हो चुकी है। वहीं दूसरी मीटिंग राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर की अध्यक्षता में हुई है। आइये जानते हैं। सरकार इस मुद्दे पर क्या रूख अपना सकती है।

क्या होता है डीपफेक?


किसी रियल वीडियो में दूसरे के चेहरे को फिट कर देने को डीपफेक नाम दिया गया है। जिसे आप लोग यकीन मान लें। डीपफेक से वीडियो और फोटो को बनाया जाता है। इसमें मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लिया जाता है। इसमें वीडियो और ऑडियो को टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर की मदद बनाया जाता है। इसी डीपफेक से वीडियो बनाया जाता है। साधारण शब्दों में समझें, तो इस टेक्नोलॉजी कोडर और डिकोडर टेक्नोलॉजी की मदद ली जाती है। डिकोडर सबसे पहले किसी इंसान के चेहरे को हावभाव और बनावट की गहन जांच करता है। इसके बाद किसी फर्जी फेस पर इसे लगाया जाता है, जिससे हुबहू फर्जी वीडियो और फोटो को बनाया जा सकता है।

हालांकि इसे बनाने में काफी टेक्नोलॉजी की जरूरत होती है, ऐसे में आमल लोग डीपफेक वीडियो नहीं बना सकते हैं। लेकिन इन दिनों डीपफेक बनाने से जुड़े ऐप मार्केट में मौजूद हैं, जिनकी मदद से आसानी से डीफफेक वीडियो को बनाया जा सकता है।

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सरकार की क्या है तैयारी?

डीपफेक से निपटने के लिए सबसे पहले इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को एक एडवाइजरी भेजी। जिसमें उन्हें चेतावनी दी गई कि उनके प्लेटफार्मों से डीपफेक सामग्री को हटाया जाए। अगर नहीं हटाया गया तो जुर्माना लगाया जा सकता है। सरकार की इस एडवाइजरी पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की ओर से जवाब भी दिए गए। इसके बाद सरकार को महसूस हुआ कि अभी इसमें और काम करने की जरूरत है। फिर सरकार की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ मीटिंग की गई। मीटिंग में सरकार की ओर से कहा गया है कि डीपफेक आईटी नियमों खासतौर से नियम 3 (1) (B) (V) के दायरे में आते हैं।

पीएम ने कहा- बड़े संकट का कारण बन सकता है डीपफेक

पीएम मोदी ने पिछले दिनों आगाह किया था कि 'डीपफेक' बड़े संकट का कारण बन सकता है। समाज में असंतोष उत्पन्न कर सकता है। उन्होंने मीडिया से इसके दुरुपयोग को लेकर जागरूकता बढ़ाने और लोगों को शिक्षित करने का आग्रह भी किया था। वहीं, वैष्णव ने भी इसे लेकर आगाह किया था।

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