Tech Alert: हाल ही में कॉमर्स मिनिस्ट्री ने लैपटॉप, पर्नसल कंप्यूटर, टैबलेट और इनसे जुड़ी चीजों के आयात पर रोक लगा दिया था। हालांकि अब सरकार ने इस नियम पर ही रोक लगा दिया है। अब इनके आयात पर 31 अक्टूबर तक कोई रोक नहीं है। इससे जुड़ी अधिसूचना 4 अगस्त शुक्रवार को जारी कर दी गई है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) की तरफ से जारी अधिसूचना के मुताबिक इंपोर्ट कंसाइनमेंट 31 अक्टूबर 2023 तक क्लियर किए जा सकते हैं और इसके लिए प्रतिबंधित आयात से जुड़ा लाइसेंस भी नहीं लेना होगा। सरकार के इस फैसले से एपल (Apple), सैमसंग (Samsung) और एचपी (HP) जैसी दिग्गज कंपनियों को बड़ी राहत मिली है।
31 अक्टूबर के बाद क्या होगी व्यवस्था
लैपटॉप, टैबलेट, ऑल-इन-वन पर्सनल कंप्यूटर्स, सर्वर्स इत्यादि के आयात के लिए लिबर ट्रांजिशनल अरेंजमेंट्स को अधिसूचित कर दिया गया है और यह व्यवस्था 31 अक्टूबर तक जारी रहेगी। हालांकि इसके बाद की व्यवस्था की बात करें तो डीजीएफटी के नोटिफिकेशन के मुताबिक 1 नवंबर से प्रतिबंधित आयात के लिए वैध लाइसेंस की जरूरत होगी। यह नोटिफिकेशन इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर के उस बयान के कुछ घंटे के भीतर आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि नए नियमों के लागू होने से पहले कुछ ट्रांजिशन पीरियड दिया जाएगा यानी कि कुछ समय कंपनियों को दिया जाएगा। राज्यमंत्री ने भी यह बयान कॉमर्स मिनिस्ट्री के ऐलान के एक दिन बाद किया था जिसमें मिनिस्ट्री ने कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट्स, सर्वर्स इत्यादि के आयात के लिए वैलिड लाइसेंस जरूरी करने और इन पर ड्यूटी चुकाने का ऐलान किया था।
कॉमर्स मिनिस्ट्री ने क्या किया था ऐलान
केंद्रीय मंत्रालय ने कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट्स, सर्वर्स इत्यादि के आयात के लिए लाइसेंस की जरूरत तय कर दी। इसके अलावा मंत्रालय ने कहा कि प्रति कंसाइनमेंट सिर्फ 20 चीजों के लिए इंपोर्ट लाइसेंस से छूट मिलेगी। यह छूट आरएंडडी, टेस्टिंग, बेंचमार्किंग और एवैलुएशन, रिपेयर कर फिर से एक्सपोर्ट, प्रोडक्ट डेवलपमेंट के लिए मिलेगी। चंद्रशेखर के मुताबिक यह पॉलिसी इस उद्देश्य से लायी गयी है ताकि भारतीय टेक इकोसिस्टम में भरोसेमंद हार्डवेयर और सिस्टम के इस्तेमाल को सुनिश्चित किया जा सके। इसके अलावा इस पॉलिसी का उद्देश्य आयात पर निर्भरता घटाना और इस कैटेगरी के प्रोडक्ट्स का घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाना है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि यह लाईसेंस राज के बारे में नहीं है।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर
मनीकंट्रोल से बातचीत में एक्सपर्ट्स ने कहा कि इस पॉलिसी से हाल-फिलहाल में कीमतें बढ़ सकती हैं लेकिन लॉन्ग टर्म में इससे 'मेक इन इंडिया' पहल को बढ़ावा मिलेगा। काउंटरप्वाइंट रिसर्च के पार्टनर नील शीह के मुताबिक कुछ कंपनियां शॉर्ट टर्म में अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें कुछ बढ़ा सकती हैं। जैसे कि एपल जो अपना 100 फीसदी प्रोडक्ट्स आयात करती है। हालांकि डेल और एचपी के लिए अधिक दिक्कत नहीं है क्योंकि इन्होंने पहले ही यहां मैनुफैक्चरिंग सेटअप कर लिया है।