Google का नाम कैसे बदल गया? जानिए एक टाइपो ने कैसे दी सर्च इंजन को नई पहचान

Google: आज गूगल के सर्च इंजन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण उसके अन्य प्रोडक्ट्स जैसे YouTube, Gmail, Google Maps और Android हैं। ये सभी अपने-अपने तरीके से काम करते हैं और गूगल को सर्च इंजन से बाहर भी दुनिया भर में भारी ट्रैफिक दिलाते हैं, जिससे गूगल का प्रभाव और बढ़ गया है

अपडेटेड Apr 30, 2025 पर 9:56 AM
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Google: गूगल का नाम पहले BackRub रखने की योजना थी

एक समय था जब इंटरनेट पर कुछ भी ढूंढना मुश्किल था और सर्च इंजन का इस्तेमाल काफी मुशकिल होता था। लेकिन फिर गूगल आया, जिसने इंटरनेट सर्फिंग को आसान बना दिया। आज हम जब भी कुछ सर्च करते हैं, गूगल सबसे पहले याद आता है। गूगल ने इंटरनेट पर जानकारी ढूंढने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। अब हम किसी भी सवाल का जवाब, किसी भी जानकारी को बिना किसी परेशानी के गूगल पर ढूंढ सकते हैं। गूगल न सिर्फ एक सर्च इंजन है, बल्कि इसके और भी कई टूल्स जैसे Gmail, Google Maps और YouTube हमारे डिजिटल जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं।

गूगल ने हमें आसानी से जानकारी प्राप्त करने का तरीका दिया है। इसका सरल इंटरफेस और सटीक परिणाम इसे दुनिया का सबसे बड़ा और भरोसेमंद सर्च इंजन बनाता है। गूगल ने इंटरनेट की दुनिया को एक नई दिशा दी है।

एक सोच जिसने गूगल को जन्म दिया


गूगल की शुरुआत हुई अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले दो छात्रों – लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन – की एक अनोखी सोच से। वो इंटरनेट को आसान और सभी के लिए समान बनाने के लिए काम कर रहे थे। 7 सितंबर 1998 को उन्होंने मिलकर Google Inc. की स्थापना की और ‘google.stanford.edu’ नाम से सर्च इंजन तैयार किया।

जन्मदिन की तारीख कैसे तय हुई?

शुरुआत में गूगल का जन्मदिन 7 सितंबर को मनाया जाता था, फिर ये 8 सितंबर और 26 सितंबर में बदला गया। आखिरकार, 27 सितंबर को गूगल ने अपने सर्च पेज पर सबसे ज्यादा सर्च रिकॉर्ड बनाया, जिसके बाद इसी दिन को आधिकारिक जन्मदिन घोषित किया गया।

गूगल की ताकतवर पेरेंट कंपनी

आज गूगल सिर्फ एक सर्च इंजन नहीं रहा। Gmail, YouTube, Google Maps और Android जैसे प्लेटफॉर्म इसके अंतर्गत आते हैं। यही कारण है कि गूगल की मूल कंपनी Alphabet Inc. आज दुनिया की सबसे बड़ी और प्रभावशाली टेक कंपनियों में से एक है।

गूगल का नाम कैसे पड़ा?

गूगल का नाम पहले BackRub रखने की योजना थी, लेकिन यूनिवर्सिटी में इसे मंज़ूरी नहीं मिल पाई। इसके बाद नाम चुना गया Googol, जो गणित में ‘1 के बाद 100 शून्य’ को दर्शाता है – यानी असीमित जानकारी का प्रतीक।

एक टाइपो जो बना गूगल

जब लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन अपने सर्च इंजन के लिए डोमेन खरीद रहे थे, तो उन्होंने गलती से Googol.com की जगह Google.com टाइप कर दिया। चाहें तो वे इसे सुधार सकते थे, लेकिन उन्होंने इस नाम को ही अपना लिया – और यहीं से गूगल की नई पहचान बनी।

क्लीन इंटरफेस

गूगल का इंटरफेस न सिर्फ साफ-सुथरा था, बल्कि इसके सर्च रिजल्ट्स भी बेहद सटीक और तेज थे। यही दो कारण थे जिसने इसे दूसरे सर्च इंजनों से अलग बना दिया और इसकी लोकप्रियता में जबरदस्त इजाफा हुआ।

फंडिंग और नए प्रोडक्ट्स

जैसे-जैसे गूगल को फंडिंग मिलने लगी, वैसे-वैसे कंपनी ने नए-नए प्रोडक्ट्स और सेवाओं को लॉन्च करना शुरू किया। हर नए इनोवेशन ने गूगल को एक कदम और आगे बढ़ाया।

 

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