सभी नागरिक बराबर, लेकिन महिलाओं पर पाबंदियां, क्या कहता है संविधान और तालिबान शासन की जमीनी हकीकत

अफगानिस्तान (Afghanistan) में नया तालिबान शासन 1964 के संविधान को बहाल कर सकता है

अपडेटेड Sep 02, 2021 पर 8:23 AM
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तालिबान ने अफगानिस्तान में एक नई सरकार बनाने के प्रयासों को तेज कर दिया है। उसका विचार है कि 2004 में बने वर्तमान संविधान को बदला जाना चाहिए, क्योंकि इसे "विदेशी ताकतों" के तहत तैयार किया गया था। CNN-News18 ने सूत्रों के हवाले से बताया कि नया तालिबान शासन 1964 के संविधान को बहाल कर सकता है। ये उग्रवादी संगठन उस दौर को फिर से जीवित कर रहा है, जिसमें लंबे समय से मानवीय और आर्थिक संकट से लोग जूझ रहे थे।

यहां लोगों के मूल अधिकारों और कर्तव्यों के साथ 1964 के अफगानिस्तान संविधान के प्रमुख बिंदुओं पर एक नजर डालिए और जानिए कि कैसे ये पुराना संविधान युद्धग्रस्त देश की जमीनी हकीकत के साथ पूरी तरह से विपरीत है।

अनुच्छेद 25: कानून के सामने समान अधिकार

बिना किसी भेदभाव या वरीयता के अफगानिस्तान के लोगों के पास कानून के समान अधिकार और दायित्व हैं।

जमीनी हकीकत: जब कट्टरपंथी समूह ने 1996 से 2001 तक अफगानिस्तान पर शासन किया, तो उन्होंने शरिया कानून लागू किया, इस्लामी कानून की एक सख्त व्याख्या जिसका मतलब था कि महिलाएं काम नहीं कर सकती थीं, लड़कियों के स्कूल जाने पर रोक लगा दी गई था और महिलाओं को सार्वजनिक रूप से अपना चेहरा ढंकना पड़ता था और उन्हें किसी पुरुष के साथ ही घर से बाहर निकलना पड़ता था।

दूसरी बार सत्ता पर बात करने के बाद तालिबान ने महिलाओं के लिए ये नियम बनाए हैं:


- महिलाएं को अपने घर या परिवार के पुरुष और बुर्के के बिना सड़क पर नहीं दिखनी चाहिएं।

- किसी भी पुरुष को किसी महिला के कदम न सुनाई पड़ें, इसलिए महिलाओं को ऊंची हील के जूते नहीं पहनने चाहिए।

- महिला सर्वजनिक रूप से इतनी तेज न बोले कि उसकी आवाज किसी अजनबी को सुनाई दे।

- महिलाओं को सड़क से कोई न देख सके, इसके लिए घरों के ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल पर सभी खिड़कियों को पेंट किया जाना चाहिए या उन्हें एक स्क्रीन के साथ कवर किया जाना चाहिए।

- महिलाओं को अपनी तस्वीरें लेने, वीडियो बनाने या अखबारों या किताबों में या दुकानों में या घर पर प्रदर्शित करने की मनाही है।

अनुच्छेद 26: केवल अदालतें ही सजा दे सकती हैं, यातना की अनुमति नहीं है

अफगान संविधान कहता है कि मनुष्य की स्वतंत्रता और गरिमा अहिंसक और अहस्तांतरणीय है। इसमें कहा गया, "राज्य का कर्तव्य है कि वह व्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा का सम्मान करे और उसकी रक्षा करे। अभियुक्त की उपस्थिति में खुली सुनवाई के बाद दिए गए सक्षम न्यायालय के आदेश के अलावा किसी को भी दंडित नहीं किया जा सकता है।"

इस संविधान के तहत किसी इंसान को प्रताड़ित करना भी जायज नहीं है। "तथ्यों की खोज के लिए भी किसी व्यक्ति को प्रताड़ित करने के आदेश जारी करने पर कोई अत्याचार नहीं कर सकता, भले ही इसमें शामिल व्यक्ति का पीछा, गिरफ्तारी या नजरबंदी हो या सजा की निंदा की गई हो। मानवीय गरिमा के साथ असंगत दंड लगाने की अनुमति नहीं है।"

जमीनी हकीकत: हाल ही में उत्तर में तालिबान के कब्जे वाले शहरों से भागे हजारों अफगानों ने विद्रोहियों के क्रूर व्यवहार की घटनाओं को के बारे में बताया, जिसमें सड़कों पर छोड़े गए शव, तालिबान की दुल्हन बनने के लिए लड़कियों का अपहरण और युवकों के साथ मारपीट की गई घटनाएं शामिल हैं।

सत्ता में अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी, - 1996 से 11 सितंबर, 2001 तक - तालिबान ने इस्लामी कानून के सख्त नियमों लागू किया, जिसके तहत छोटे-छोटे अपराधों के लिए भी सार्वजनिक कोड़े और फांसी की सजा दी जाती थी।

अनुच्छेद 28: कोई भी बिना अनुमति के घरों की तलाशी नहीं ले सकता

कोई भी किसी के घर की तलाशी मालिक की मंजूरी, अदालत के आदेशों और कानून के तहत तय की गईं शर्तों और प्रक्रिया के बिना नहीं ले सकता है। साथ ही कोई किसी के घर में बिना इन नियमों के घुस भी नहीं सकता है।

जमीनी हकीकत: हाल ही में अफगानिस्तान से भागे एक पत्रकार ने इस्लामवादी समूह के बारे में कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिसमें एक ये भी है कि तालिबान के लड़ाके शादी के लिए 15 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं और लड़कियों की घर-घर जाकर तलाश कर रहे हैं।

द डलास मॉर्निंग न्यूज में लिखते हुए, पत्रकार होली मैके ने एक अफगान महिला के हवाले से कहा, "उसने मुझे बताया कि तालिबान घर-घर जा रहे हैं, शादी के लिए 15 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं और लड़कियों की तलाश कर रहे हैं। एक महीने पहले, विद्रोही सदस्य बदख्शां में उसके दोस्त के घर की चौखट पर पहुंचे। फरिहा ने मुझे वह कहानी सुनाई जो उसने अपने दोस्त से सुनी थी।"

अनुच्छेद 29: किसी की संपत्ति को जब्त नहीं किया जा सकता

देश के संविधान में कहा गया है, "कानून के प्रावधान और सक्षम अदालत के फैसले के अलावा किसी की संपत्ति को जब्त नहीं किया जा सकता है।"

जमीनी हकीकत: अधिकार समूहों और शोधकर्ताओं के अनुसार, सत्ता में उग्रवादी समूह की वापसी से अफगान महिलाओं के संपत्ति के अधिकारों को खतरा है, जिसे उन्होंने बड़े ही लंबे संघर्ष से हासिल किया था।

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि तालिबान ने एक सख्त इस्लामी कानून लागू किया, जिसने 1996-2001 के शासन के दौरान बड़े पैमाने पर महिलाओं के संपत्ति के अधिकारों से वंचित कर दिया, लेकिन तब से स्थानीय अधिकारी विधवाओं, तलाकशुदा महिलाओं और अन्य महिला-नेतृत्व वाले परिवारों को संपत्ति दे रहे हैं।

अनुच्छेद 32: अफगान नागरिक इकट्ठा हो सकते हैं, राजनीतिक दल बना सकते हैं

संविधान ने सभी नागरिकों को कानून के प्रावधानों के अनुसार वैध और शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए सरकार की अनुमति के बिना निहत्थे इकट्ठा होने का अधिकार दिया था।

इसमें कहा गया, "अफगान नागरिकों को कानून के प्रावधानों के अनुसार, भौतिक या आध्यात्मिक उद्देश्यों के लिए एसोसिएशन बनाने का अधिकार है। अफगान नागरिकों को कानून की शर्तों के अनुसार राजनीतिक दल बनाने का अधिकार है।"

जमीनी हकीकत: सूत्रों ने CNN-News18 को बताया कि विद्रोही ईरान के मॉडल के आधार पर एक सरकार तैयार कर रहे हैं - एक इस्लामी गणराज्य, जहां सर्वोच्च नेता राज्य का प्रमुख होता है और राष्ट्रपति से भी ऊपर का राजनीतिक और धार्मिक अधिकार होता है।

सूत्रों ने कहा कि तालिबान का सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा, जिसने कभी सामने नहीं आया और जिसके ठिकाने काफी हद तक अज्ञात रहे हैं। 11 से 72 की सर्वोच्च परिषद की अध्यक्षता करने वाला सर्वोच्च नेता होने की संभावना है।

अनुच्छेद 34: शिक्षा हर अफगान का अधिकार है, सरकार इसे प्रदान करने के लिए बाध्य है।

संविधान कहता है कि शिक्षा "हर अफगान का अधिकार" है और इसे राज्य और अफगानिस्तान के नागरिकों द्वारा मुफ्त प्रदान किया जाएगा। इसमें कहा गया, "सरकार अफगानिस्तान में संतुलित और सार्वभौमिक शिक्षा के लिए एक कार्यक्रम तैयार करने और लागू करने के लिए बाध्य है। उन क्षेत्रों में सभी बच्चों के लिए प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य है, जहां सरकार की तरफ से इस उद्देश्य के लिए सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।"

जमीनी हकीकत: तालिबान के कार्यवाहक उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा है कि अफगान महिलाओं को यूनिवर्सिटी में पढ़ने की अनुमति होगी, लेकिन उनके शासन में Co-Education पर प्रतिबंध रहेगा। तालिबान के नेता ने कहा, "अफगानिस्तान में पुरुष और महिलाएं एक साथ पढ़ाई नहीं कर सकते हैं।"

उसने कहा कि तालिबान "एक उचित और इस्लामी पाठ्यक्रम बनाना चाहता है जो हमारे इस्लामी, राष्ट्रीय और ऐतिहासिक मूल्यों के अनुरूप हो और दूसरी तरफ दूसरो देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो।"

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