Afghanistan Earthqukae: भारत के पड़ोसी देश अफगानिस्तान में भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए हैं। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.3 मापी गई। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (National Center for Seismology –NCS) की रिपोर्ट के मुताबिक भूकंप अफगानिस्तान में भारतीय समयानुसार सुबह 3.23 बजे आया था। भूकंप अफगानिस्तान में मंगलवार सुबह 120 किलोमीटर की गहराई में आया। इसका केंद्र फैजाबाद से 116 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में था। इस भूकंप के झटकों से अभी तक किसी के हताहत होने की खबर सामने नहीं आई है।
NSC ने ट्वीट कर कहा कि इससे पहले 3 मई को अफगानिस्तान में रिक्टर पैमाने पर 5.2 तीव्रता का भूकंप आया था। NCS के मुताबिक, भूकंप 169 किमी (116.81 मील) की गहराई में आया था। यह भूकंप दोपहर में 3.21 बजे आया था।
भूकंप के आने की मुख्य वजह धरती के अंदर प्लेटों का टकरना है। धरती के भीतर सात प्लेट्स होती हैं जो लगातार घूमती रहती हैं। जब ये प्लेटें किसी जगह पर आपस में टकराती हैं, तो वहां फॉल्ट लाइन जोन बन जाता है। फिर सतह के कोने मुड़ जाते हैं। सतह के कोने मुड़ने की वजह से वहां दबाव बनता है और प्लेट्स टूटने लगती हैं। इन प्लेट्स के टूटने से अंदर की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है। जिसकी वजह से धरती हिलती है और हम इसे भूकंप मानते हैं। वैसे आमतौर पर 5 से कम तीव्रता वाले भूकंप कम नुकसान पहुंचाने वाले होते हैं। वहीं 5 या उससे ज्यादा की तीव्रता वाले भूकंप में जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है।
रिक्टर स्केल पर 2.0 से कम तीव्रता वाले भूकंप को माइक्रो कैटेगरी में रखा जाता है और यह भूकंप महसूस नहीं किए जाते। रिक्टर स्केल पर माइक्रो कैटेगरी के 8,000 भूकंप दुनियाभर में रोजाना दर्ज किए जाते हैं। इसी तरह 2.0 से 2.9 तीव्रता वाले भूकंप को माइनर कैटेगरी में रखा जाता है। ऐसे 1,000 भूकंप प्रतिदिन आते हैं इसे भी सामान्य तौर पर हम महसूस नहीं करते। वेरी लाइट कैटेगरी के भूकंप 3.0 से 3.9 तीव्रता वाले होते हैं, जो एक साल में 49,000 बार दर्ज किए जाते हैं। इन्हें महसूस तो किया जाता है लेकिन शायद ही इनसे कोई नुकसान पहुंचता है। लाइट कैटेगरी के भूकंप 4.0 से 4.9 तीव्रता वाले होते हैं जो पूरी दुनिया में एक साल में करीब 6,200 बार रिक्टर स्केल पर दर्ज किए जाते हैं। इन झटकों को महसूस किया जाता है और इनसे घर के सामान हिलते नजर आते हैं। हालांकि इनसे न के बराबर ही नुकसान होता है।