Bangladesh Unrest: बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा के चलते हालात बेहद नाजुक हो गए हैं। देश में कड़ा कर्फ्यू लगा है और 133 लोगों की मौत के बाद 'शूट ऑन साइट' यानि देखते ही गोली मारने का ऑर्डर निकल चुका है। हिंसा में अब तक हजारों लोग घायल हो चुके हैं। पुलिस के शांति कायम करने में विफल रहने के बाद अब सेना ने कमान संभाल ली है। शनिवार, 20 जुलाई को सैनिकों ने बांग्लादेश की राजधानी ढाका के कुछ हिस्सों में गश्त की।
अधिकारियों ने कहा कि कर्फ्यू का उद्देश्य सड़कों पर, और ढाका और अन्य शहरों के विश्वविद्यालय परिसरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के बाद आगे की हिंसा को रोकना था। कर्फ्यू 20 जुलाई की मध्यरात्रि से शुरू हुआ और लोगों को आवश्यक काम निपटाने के लिए दोपहर 12 बजे से दोपहर 2 बजे तक ढील दी गई। इसके रविवार को समाप्त होने की उम्मीद है। बांग्लादेशी अधिकारियों ने मारे गए और घायल हुए लोगों की कोई आधिकारिक संख्या साझा नहीं की है।
बांग्लादेश में 18 जुलाई से इंटरनेट बंद है, जिससे बाहरी दुनिया में संपर्क काफी हद तक सीमित हो गया है। कई टेलीविजन समाचार चैनल भी बंद हो गए, और अधिकांश स्थानीय न्यूजपेपर्स की वेबसाइट्स बंद हैं। इस बीच, बांग्लादेश के केंद्रीय बैंक और प्रधानमंत्री कार्यालय सहित कुछ प्रमुख सरकारी वेबसाइट्स को हैक कर लिया गया। विरोध प्रदर्शन के पीछे का कारण बांग्लादेश में वर्तमान सिविल सर्विस जॉब्स एलाकेशन सिस्टम है, जो आधे से अधिक पदों को विशिष्ट समूहों के लिए आरक्षित करता है। इन विशिष्ट समूहों में देश के पाकिस्तान के खिलाफ 1971 के मुक्ति संग्राम में शामिल सैनिकों (वेटरन्स) के बच्चे भी शामिल हैं।
पूर्व सैनिकों के रिश्तेदारों के लिए कितना कोटा
कोटा प्रणाली 1971 के युद्ध में लड़ने वाले पूर्व सैनिकों के रिश्तेदारों के लिए 30 प्रतिशत तक सरकारी नौकरियां रिजर्व करती है। यह बांग्लादेश के युवाओं के बीच आक्रोश पैदा कर रहा है क्योंकि वे देश में गंभीर रोजगार संकट का सामना कर रहे हैं। 2018 में, सरकार ने बड़े पैमाने पर छात्र विरोध के बाद कोटा रोक दिया था। लेकिन जून में, बांग्लादेश के हाई कोर्ट ने उस फैसले को रद्द कर दिया और 1971 के वेटरन्स के रिश्तेदारों की ओर से याचिका दायर करने के बाद पुराने सिस्टम को बहाल कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपील की सुनवाई पेंडिंग रहने तक फैसले को सस्पेंड कर दिया। सिविल सर्विस हायरिंग नियमों पर बांग्लादेश का सुप्रीम कोर्ट 21 जुलाई को फैसला देने वाला है।
शेख हसीना आरोपों के घेरे में
आलोचकों ने बार-बार इस बात की ओर इशारा किया है कि ये कोटा बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के वफादार लोगों को फायदा पहुंचाता है। हसीना 2009 से देश पर शासन कर रही हैं। वह जनवरी में लगातार चौथी बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं। उनकी सरकार पर सरकारी इंस्टीट्यूशंस का गलत इस्तेमाल करके अधिक शक्तिशाली बनने और असहमति को दबाने के आरोप लगे हैं, जिसमें विपक्षी कार्यकर्ताओं की हत्याएं भी शामिल हैं। छात्रों के साथ-साथ अन्य नागरिक भी वर्तमान सरकार के इस्तीफे की मांग में शामिल हो गए हैं।
शेख हसीना ने संकेत दिया है कि विवादास्पद कोटा सिस्टम को खत्म कर दिया जाएगा। लेकिन ऐसा लगता है कि कड़ी कार्रवाई और बढ़ती मौतों के बीच अनुकूल फैसले से भी लोगों का गुस्सा कम नहीं होगा। मांग अब छात्रों के अधिकारों से आगे निकलकर मौजूदा सरकार के इस्तीफे तक पहुंच चुकी है। हसीना ने इस महीने प्रदर्शनकारियों की तुलना उन बांग्लादेशियों से करके तनाव को और बढ़ा दिया, जिन्होंने देश के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पाकिस्तान के साथ सहयोग किया था।
मुद्दों को सुलझाने के लिए हो चुकी है मीटिंग
मुद्दों को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों ने 19 जुलाई को देर रात मुलाकात की। इस दौरान कम से कम 3 छात्र नेता मौजूद थे और उन्होंने वर्तमान कोटा प्रणाली में सुधार, झड़पों के बाद पुलिस द्वारा बंद किए गए छात्र छात्रावास को फिर से खोलने और हिंसा से परिसरों की रक्षा करने में विफल रहने के बाद कुछ विश्वविद्यालय अधिकारियों के पद छोड़ने की मांग की। कानून मंत्री अनीसुल हक ने कहा कि सरकार उनकी मांगों पर चर्चा करने के लिए तैयार है।