Bangladesh Violence: जान बचाकर भाग रहे बांग्लादेशी हिंदू, भारत बॉर्डर पर हुए जमा! 45 जिलों में हिंदुओं को बनाया निशाना

Bangladesh Unrest: मुस्लिम-बहुल बांग्लादेश के 17 करोड़ लोगों में से लगभग 8% हिंदू हैं। आमतौर पर बड़े पैमाने पर अल्पसंख्यक हिंदू भी हसीना की अवामी लीग पार्टी का समर्थन करते आए हैं। विपक्षी गुट के उलट अवामी पार्टी एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी की रूप में जानी जाती है, जबकि विरोधी खेमे में एक इस्लामी पार्टी भी शामिल है

अपडेटेड Aug 09, 2024 पर 3:37 PM
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Bangladesh Violence: बांग्लादेश के ठाकुरगांव कस्बे में हजारों हिंदू अल्पसंख्यक विरोध प्रदर्शन में जुटे

प्रधान मंत्री शेख हसीना के तख्तापलट के बाद अल्पसंख्यक समुदाय के कई घरों और दुकानों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई। ऐसे में इस हफ्ते सैकड़ों बांग्लादेशी हिंदुओं ने जान बचा कर भारत भागने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाए। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने कहा कि देश के 64 में से 45 जिलों में इस हफ्ते ज्यादातर हिंदू घरों, बिजनेसों या मंदिरों को निशाना बनाया गया है। इसमें कहा गया कि एक स्कूल टीचर की मौत हो गई और 45 और लोग घायल हो गए।

मुस्लिम-बहुल बांग्लादेश के 17 करोड़ लोगों में से लगभग 8% हिंदू हैं। आमतौर पर बड़े पैमाने पर अल्पसंख्यक हिंदू भी हसीना की अवामी लीग पार्टी का समर्थन करते आए हैं। विपक्षी गुट के उलट अवामी पार्टी एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी के रूप में जानी जाती है, जबकि विरोधी खेमे में एक कट्टर इस्लामी पार्टी भी शामिल है।

भारत को लेकर पैदा हुआ गुस्सा!


अपने खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के चलते सोमवार को देश से भागने के बाद हसीना ने भारत में शरण ली है। अब इससे कुछ बांग्लादेशियों के मन में अपने पड़ोसी को लेकर गुस्सा पैदा हो गया है।

Reuters के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने कहा कि भारत के करीब रहने वाले कई लोग भागने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें दोनों तरफ से विरोध का सामना करना पड़ रहा है। दोनों देशों ने कहा है कि हिंसा के बाद से उन्होंने सीमा पर गश्त बढ़ा दी है।

700-800 हिंदुओं ने की भागने की कोशिश

रिपोर्ट में उत्तर-पश्चिमी बांग्लादेश के ठाकुरगांव जिले के एक स्थानीय सरकारी अधिकारी मोहम्मद रकीबुल हसन ने कहा कि लगभग 700-800 हिंदुओं ने बुधवार शाम के आसपास भारत भागने की कोशिश की, क्योंकि उनके कुछ घरों पर हमला किया गया और लूटपाट की गई।

हसन ने रॉयटर्स को बताया, "हमारी ओर से सुरक्षा देने के बाद वे घर लौट आए। बॉर्डर गार्ड ट्रूप इलाके में गश्त कर रहे हैं। अब सब कुछ ठीक है और हिंसा की कोई और रिपोर्ट नहीं है।"

गुरुवार तड़के, लगभग 300 बांग्लादेशी भारत के जलपाईगुड़ी जिले के पास एक बॉर्डर प्वाइंट पर इकट्ठे हुए थे, लेकिन बाद में तितर-बितर हो गए।

हिंदुओं से मांग रहे प्रोटेक्शन मनी

ढाका से लगभग एक घंटे की दूरी पर नरसिंगडी इलाके में एक हिंदू सुनार, जो हमले के डर से अपना नाम नहीं बताना चाहते थे, उन्होंने कहा कि दो युवकों ने 10 लाख बांग्लादेश टका की प्रोटेक्शन मनी की मांग की और 100,000 टका देने पर सहमत होने के बाद वे मान गए।

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस हसीना के जाने के बाद अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए गुरुवार को बांग्लादेश लौटे। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों पर हमले एक साजिश का हिस्सा हो सकते हैं। उन्होंने ये नहीं बताया कि साजिश के पीछे कौन था।

हिंदुओं की सुरक्षा पर क्या बोले नए प्रधानमंत्री?

पेरिस से ढाका पहुंचने पर उन्होंने कहा, "हमारा काम उन सभी की सुरक्षा करना है।" उन्होंने कहा, "अगर आपको मुझ पर भरोसा है, तो कृपया सुनिश्चित करें कि देश में किसी पर हमला न हो। अगर आप इस पर मेरी बात नहीं सुन सकते, तो मेरे यहां रहने का कोई फायदा नहीं है।"

दोनों देशों के बीच लंबे समय से सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध हैं और भारत ने पाकिस्तान के साथ 1971 के युद्ध में अहम भूमिका निभाई, जिसके कारण बांग्लादेश एक अलग देश बना।

भारत ने भी जताई चिंता

हिंदू बहुमत वाले भारत ने कहा है कि ये चिंताजनक है कि कई जगहों पर अल्पसंख्यकों, उनके कामकाजों और मंदिरों पर हमले किए गए हैं।

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "अपने सभी नागरिकों की भलाई करना हर सरकार की जिम्मेदारी है। हम बांग्लादेश में कानून और व्यवस्था की जल्द बहाली की उम्मीद करते हैं। यह देश और बड़े क्षेत्र दोनों के हित में है।"

बांग्लादेश के हिंदू समुदाय के नेताओं ने दूसरे समुदायों से धार्मिक अल्पसंख्यकों की देखभाल करने की भी अपील की है।

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