Bangladesh Violence: छात्रों की अगर ये 4 मांग मान लेतीं शेख हसीना, तो आज ऐसे मुंह छिपा कर नहीं छोड़ना पड़ता देश

Bangladesh Violence Updates: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना लंदन जाएंगी, लेकिन उससे पहले उनका विमान भारत के गाजियाबाद हिंडन एयर बेस पर उतरा। वह अपनी बहन शेख रेहाना के साथ दोपहर 2 से 3 बजे के बीच ढाका से एक हेलीकॉप्टर से रवाना हुईं। वीकेंड आते-आते हसीना को हटाने की मांग करने वाले इन प्रदर्शनों ने एक बड़े अभियान का रूप ले लिया

अपडेटेड Aug 05, 2024 पर 7:02 PM
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Bangladesh Violence: छात्रों की अगर ये 4 मांग मान लेतीं शेख हसीना, तो आज ऐसे मुंह छिपा कर नहीं छोड़ना पड़ता देश

बांग्लादेश की प्रधान मंत्री शेख हसीना ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया है और जल्द ही एक अंतरिम सरकार सत्ता संभालने जा रही है, सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने सोमवार को ये घोषणा की। हसीना सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बीच एक नाटकीय घटनाक्रम में पिछले दो दिनों में 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। शरुआत से अब तक करीब 300 लोगों की जान जा चुकी है।

खबर है कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना लंदन जाएंगी, लेकिन उससे पहले उनका विमान भारत के गाजियाबाद हिंडन एयर बेस पर उतरा। वह अपनी बहन शेख रेहाना के साथ दोपहर 2 से 3 बजे के बीच ढाका से एक हेलीकॉप्टर से रवाना हुईं।

बांग्लादेश भारत बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ाई गई


इसी के चलते भारत बांग्लादेश बॉर्डर पर भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। बांग्लादेश में हुई घटनाओं के मद्देनजर दिल्ली के चाणक्यपुरी में बांग्लादेश उच्चायोग की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।

शेख हसीना (Sheikh Hasina) ने हाल ही में कहा था कि जो प्रदर्शनकारी "तोड़फोड़" और दंगों में शामिल रहे, वो अब छात्र नहीं बल्कि अपराधी हैं।

सरकारी नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ बांग्लादेश के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया था, लेकिन अब बात प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग तक पहुंच गई थी। पिछले महीने जब ये प्रदर्शन हिंसक हुए, तो उसमें कम से कम 150 लोग मारे गए और हजारों घायल हो गए।

क्यों उठी शेख हसीना के इस्तीफे मांग

पिछले महीने नौकरी में आरक्षण के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन को 'स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन' ग्रुप लीड कर रहा था और इन नए प्रदर्शनों में भी सबसे आगे यही ग्रुप था।

21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की ओर से ज्यादातर आरक्षण रद्द करने के बाद कोटा सिस्टम में सुधार के लिए विरोध प्रदर्शन रुक गए थे।

हालांकि, पिछले हफ्ते ये विरोध प्रदर्शन फिर भड़क उठे और इस बार छात्रों की मांग थी- हिंसा के लिए शेख हसीना से खुलेतौर पर माफी मांगें, इंटरनेट सर्विस दोबारा शुरू की जाए, कॉलेज और यूनवर्सिटी को फिर से खोलें और जिन छात्रों को गिरफ्तार किया गया, उन्हें रिहाई किया जाए।

वीकेंड आते-आते हसीना को हटाने की मांग करने वाले इन प्रदर्शनों ने एक बड़े अभियान का रूप ले लिया।

ये लोग पिछले महीने वाले प्रदर्शनों में मारे गए लोगों के लिए न्याय की मांग कर रहे थे। रविवार से देश भर में असहयोग आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें सिर्फ की ही नारा गूंजा- शेख हसीना को इस्तीफा देना होगा।

प्रदर्शनकारी हसीना का इस्तीफा क्यों चाहते थे?

प्रदर्शनकारी जुलाई में विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के लिए हसीना सरकार को जिम्मेदार ठहराते हैं। हसीना के आलोचकों और ह्यूमन राइट्स ग्रुप ने उनकी सरकार पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बहुत ज्यादा फोर्स का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है, जबकि सरकार इस आरोप से इनकार करती आई है।

हसीना के बयान से भी मचा बवाल

76 साल की हसीना और उनकी सरकार ने शुरू में कहा कि आरक्षण के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों में छात्र शामिल नहीं थे। सरकार ने इन झड़पों और आगजनी के लिए इस्लामिक पार्टी, जमात-ए-इस्लामी और मुख्य विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को जिम्मेदार ठहराया।

लेकिन रविवार को दोबारा हिंसा भड़कने के बाद हसीना ने कहा कि 'जो लोग हिंसा कर रहे हैं, वो छात्र नहीं बल्कि आतंकवादी हैं जो देश को अस्थिर करना चाहते हैं।"

इधर नाराज छात्रों के गुट ने भी शेख हसीना के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, जिसमें उन्हें बातचीत का न्योता दिया गया था।

क्यों शुरू हुआ आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन?

हाई कोर्ट की ओर से सरकारी नौकरियों में कोटा सिस्टम को बहाल करने और इसे खत्म करने के हसीना सरकार के 2018 के फैसले को पलटने के बाद जून में कॉलेज और यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन शुरू हुए।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की अपील के बाद हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और फिर पिछले महीने निचली अदालत के आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें निर्देश दिया गया कि 93% नौकरियां अब सिर्फ योग्यता के आधार भी दी जाएंगी।

अर्थव्यवस्था और बेरोजगारी भी एक कारण

विशेषज्ञों की मानें, तो बांग्लादेश में मौजूदा अशांति का एक कारण प्राइवेट सेक्टर में लगातार बढ़ रही नौकरियों की मांग भी है। इसके उलट पब्लिक सेक्टर की नौकरियां, लगातार अच्छी सैलरी हाइक और सुविधाओं के चलते ज्यादा आकर्षक हो गई हैं।

आरक्षण के कारण बहुत सारे युवा बेरोजगारी से जूझ रहे हैं, इसे लेकर छात्रों में गुस्सा फैल गया। इस कोटा के चलते करीब 17 करोड़ की आबादी में करीब 3.2 करोड़ युवा बेरोजगार और अशिक्षित हैं।

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