France: इमैनुएल मैक्रों लगातार दूसरी बार राष्ट्रपति बने, दक्षिण पंथी लीडर मरीन ले पेन को दी शिकस्त, जीत के साथ मैक्रों ने बनाए कई रिकॉर्ड

दूसरे और फाइनल चरण की वोटिंग में मैक्रों को 58.2% वोटि हासिल हुआ था, उनके खिलाफ घोर दक्षिण पंथी नेता मरीने ले पेन खड़ी थीं जिन्हें 41.8% वोट हासिल हुआ था

अपडेटेड Apr 25, 2022 पर 1:06 AM
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फ्रांस में 44 साल के नेता ने रचा इतिहास

फ्रांस के मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) ने शानदार जीत के साथ राष्ट्रपति पद का चुनाव दूसरी बार भी जीत लिया है। मैक्रों दूसरी बार फ्रांस के राष्ट्रपति बने हैं। दूसरे और फाइनल चरण की वोटिंग में मैक्रों को 58.2% वोटि हासिल हुआ है। उनके खिलाफ घोर दक्षिण पंथी नेता मरीने ले पेन खड़ी थीं। पेन को 41.8% वोट हासिल हुआ।

इस जीत के साथ मैक्रों ने बनाए कई रिकॉर्ड

मैक्रों फ्रांस के पहले ऐसे सिटिंग प्रेसिडेंट हैं जो पिछले 20 साल में दूसरी बार राष्ट्रपति चुने गए हैं। यह जीत मैक्रों के लिए भी बेहद खास है। उन्होंने अपने जीवन में सिर्फ दो चुनाव लड़ा है और दोनों जीता है। मैक्रों की पार्टी का नाम La République en Marche (LREM) है। इसका गठन सिर्फ 6 साल पहले हुआ था। इससे पहले 2002 में प्रेसिडेंट Jacques Chirac लगातार दूसरी बार प्रेसिडेंट पद का चुनाव जीता था।


मैक्रों की पहचान लिबरल नेता के तौर पर है। यह यूरोपीय पॉलिटिक्स के सपोर्ट में रहते हैं। दो हफ्तों के चुनाव प्रचार के दौरान जो ट्रेंड नजर आ रहे थे, यह चुनाव उसके मुताबिक ही रहा है। 10 अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग से पहले पूरी लहर दक्षिण पंथी नेता मरीने ले पेन की तरफ थी। उन्होंने खुद को 'जनता की आवाज' के तौर पर पेश किया था।

दूसरे चरण के चुनाव में बदली हवा

मरीने ले पेन ने बड़ी चतुराई से अपने चुनाव प्रचार का फोकस अर्ध ग्रामीण और औद्योगिक गिरावट से प्रभावित इलाकों पर रखा। इन इलाकों में उनका वोट बैंक मजबूत था। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने बढ़ते खर्च पर फोकस रखा जो लोगों के लिए चिंता का विषय था।

लेकिन दूसरे चरण में हवा पलट गई। जनता का भरोसा मैक्रों पर फिर बढ़ गया। आमने-सामने बहस में मैक्रों ने मरीन ले पेन की तुलना व्लादमिर पुतिन से की थी। मैक्रों ने उन्हें 'बैंकर' कहा क्योंकि मरीन ले पेन की पार्टी ने 2014 में रूस के एक बैंक से कर्ज लिया था जिसे अभी तक चुकाया नहीं है। टैक्सेशन, यूरोप, एनर्जी जैसे मुद्दों पर भी मैक्रों ने मरीन ले पेन को आड़े हाथों लिया और चुनाव जीतने में कामयाब रहे।

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