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फ्रांस में राष्ट्रपति मैक्रों ने भंग की संसद, 30 जून को होंगे संसदीय चुनाव

Emmanuel Macron: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अचानक से नेशनल असेंबली को भंग कर दिया है। उन्होंने ये फैसला यूरोपियन यूनियन के चुनाव में मिली हार के बाद लिया है। निचले सदन नेशनल असेंबली के लिए पहले दौर के चुनाव 30 जून को होंगे। वही दूसरे दौर के चुनाव 7 जुलाई को होंगे

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 10, 2024 पर 10:19 AM
फ्रांस में राष्ट्रपति मैक्रों ने भंग की संसद, 30 जून को होंगे संसदीय चुनाव
राष्ट्रपति मैक्रों ने अपने संबोधन में कहा कि मैं देश की जनता को विकल्प देना चाहता हूं।

फ्रांस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया है। उन्होंने नेशनल असेंबली को भंग कर दिया है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने यूरोपीय संसद के चुनाव में पार्टी की करारी हार को देखते हुए ये फैसला किया। एग्जिट पोल के मुताबिक मैंक्रों की रिनेसां पार्टी (Renaissance party) रविवार को हुए यूरोपीय संसदीय चुनाव में मरीन ली पेन की दक्षिणपंथी पार्टी नेशनल रैली से हार रही है। उन्होंने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि निचले सदन नेशनल असेंबली के लिए पहले दौर के चुनाव 30 जून को होंगे। वहीं दूसरे दौर के चुनाव 7 जुलाई को कराए जाएंगे।

एग्जिट पोल के अनुमानों के मुताबिक नेशनल रैली को 31.50 फीसदी वोट मिल रहे हैं। जबकि रिनेसां पार्टी को सिर्फ 15.20 फीसदी वोट मिलने की संभावना जताई गई है। 14.3 फीसदी वोट के साथ सोशलिस्ट पार्टी तीसरे नंबर पर रह सकती है। फ्रांस में चुनाव की घोषणा कर दी गई है। एग्जिट पोल के आने के बाद नेशनल रैली के नेता जॉर्डन बार्डेला ने मैक्रों से संसद भंग करने की अपील की थी।

जनता को मिला राजनीतिक भविष्य चुनने का विकल्प

एग्जिट पोल आने के कुछ घंटे बाद ही मैक्रों ने संसद को भंग करने का ऐलान कर दिया था। उन्होंने अपने संबोधन में जनता से कहा कि ये नतीजे सरकार के लिए विनाशकारी हैं। मैं इसे अनदेखा नहीं कर सकता। मैंने संसद भंग कर दी है। अब आपके पास अपना राजनीतिक भविष्य चुनने का विकल्प है। मुझे यकीन है कि आप सही फैसला लेंगे। बता दें कि फ्रांस की नेशनल असेंबली में 577 सदस्य हैं। वहां पर राष्ट्रपति पद के लिए अलग से चुनाव होता है। ऐसे में अगर रिनेसां पार्टी हार जाती है तो भी मैक्रों पद पर बने रहेंगे। वहीं अगर मरीन ली पेन की नेशनल रैली (RN) नेशनल असेंबली में बहुमत हासिल कर लेती है, तो मैक्रों बेहद कमजोर राष्ट्रपति बन जाएंगे। उन्हें संसद में अहम फैसले लेने के लिए विपक्षी पार्टियों पर निर्भर रहना पडे़गा।

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