अमेरिका में इनफ्लेशन में बड़ा उछाल आया है। मार्च में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स 8.5 फीसदी पर पहुंच गया है। सरकार ने मंगलवार को इनफ्लेशन के आंकड़े जारी किए। करीब बीते 40 साल में अमेरिका में महंगाई में यह सबसे बड़ा उछाल है। इंग्लैंड, इंडिया सहित दूसरे देशों में भी महंगाई बढ़ी है। लेकिन, अमेरिका में इनफ्लेशन बढ़ने से जो बाइडेन की चिंता बढ़ रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यूक्रेन क्राइसिस को इसकी बड़ी वजह बताई है। लेकिन, बढ़ती महंगाई की वजह से अमेरिकी लोग बाइडेन से नाखुश हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) की डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गीता गोपीनाथ ने बढ़ते इनफ्लेशन पर एक ट्वीट किया है।
गोपीनाथ ने ट्वीट में कहा है, "हर जगह इनफ्लेशन एक प्रॉब्लम है। हालांकि, इसका लेवल अलग-अलग है। विकसित देशों की बात करें तो यूरोप में यह काफी बढ़ा है और अमेरिका में बहुत हाई लेवल पर है। उभरते बाजारों में भी यह ऊंचे स्तरों पर है। एशिया में चीन सिर्फ एक अपवाद है।" गीपानाथ को इकोनॉमिक्स की गहरी समझ है। वह आईएमएफ की चीफ इकोनॉमिस्ट रह चुकी हैं। उनका यह ट्वीट इस बात का संकेत है कि ज्यादा इनफ्लेशन कितना खतरनाक है।
अमेरिका, यूरोपीय देश और जापान ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमले शुरू होने के बाद रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं। इससे ऑयल सहित कई कमोडिटी की कीमतों में उछाल आया है। इसके चलते महंगाई तेजी से बढ़ी है। अमेरिका में फाइनेंस मिनिस्ट्री के एक सीनियर अफसर ने मंगलवार को कहा, "इनफ्लेशन का डेटा ऐसे वक्त आया है जब अमेरिका और उसके सहयोगी देश व्लादिमीर पुतिन पर पैसा देश की इकोनॉमी पर खर्च करने के लिए दबान बना रहे हैं, न कि यूक्रेन में युद्ध लड़ने पर।"
अमेरिका अकेला ऐसा देश नहीं है, जहां इनफ्लेशन 1981 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इंग्लैंड में मार्च में इनफ्लेशन 7 फीसदी पर पहुच गया है। यह 30 साल में इंग्लैंड में इनफ्लेशन का सबसे हाई लेवल है। वहां इनफ्लेशन में इतने उछाल का अनुमान नहीं था। महंगाई बढ़ने से लोगों को अब ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे कोरोना की मार के बाद इकोनॉमी में आ रही रिकवरी को झटका लग सकता है।