इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (ILO) ने कहा है कि 2022 में वैश्विक बेरोजगारी दर 5.7 प्रतिशत होगी। दुनिया भर में 20 करोड़ से अधिक लोगों के पास रोजगार नहीं होगा। यह दर कोरोना महामारी की शुरुआत से पहले 2019 में 18.7 करोड़ से अधिक है। इसके अलावा 2019 की तुलना में अतिरिक्त 10.8 करोड़ वर्कर्स अब निर्धन या अधिक निर्धन कैटेगरी में हैं।
इसका मतलब है कि गरीबी को हटाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में की गई कोशिशें बेकार हो गई हैं। इससे 2030 तक गरीबी समाप्त करने के संयुक्त राष्ट्र के लक्ष्य को हासिल करना और मुश्किल हो गया है।
ILO की वर्ल्ड एंप्लॉयमेंट एंड सोशल आउटलुक रिपोर्ट में कहा गया है, "एंप्लॉयमेंट ग्रोथ कम से कम 2023 तक नहीं बढ़ेगी।" रिपोर्ट में अनुमान दिया गया है कि वैश्विक संकट के कारण नौकरियों में कमी इस वर्ष 7.5 करोड़ तक पहुंच सकती है और इसके अगले वर्ष घटकर लगभग 2.3 करोड़ पर आने की उम्मीद है।
रिपोर्ट के अनुसार, "एंप्लॉयमेंट और वर्किंग आवर्स में कमी कोरोना से पहले के बेरोजगारी के स्तर को और बढ़ा रही है। इसके साथ रोजगार में मौजूद लोगों के लिए भी स्थितियां खराब हो रही हैं।" रिपोर्ट में बताया गया है कि इससे मौजूदा वर्ष की पहली छमाही में लैटिन अमेरिका, यूरोप और मध्य एशिया पर सबसे अधिक असर पड़ा है।
ILO का मानना है कि वैश्विक रोजगार में रिकवरी इस वर्ष की दूसरी छमाही में बढ़ेगी। हालांकि, अगर महामारी की स्थिति बिगड़ती है तो रिकवरी पर असर पड़ सकता है।