भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार निकाय OHCHR पर जम्मू-कश्मीर की स्थिति को लेकर प्रतिकूल टिप्पणियों और आतंकवाद के आरोप में कश्मीरी एक्टिविस्ट खुर्रम परवेज (Khurram Parvez) की गिरफ्तारी पर चिंता व्यक्त करने के एक दिन बाद गुरुवार को निशाना साधते हुए कहा कि यह सीमा पार आतंकवाद के कारण क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों की समझ की पूरी कमी को दर्शाता है।
दरअसल, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय की ओर से बुधवार को जारी बयान में कहा गया है कि कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज की भारतीय आतंकवाद निरोधी कानून यूएपीए के तहत गिरफ्तारी को लेकर हम काफी चिंतित हैं। गुरुवार को भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए बयान जारी किया।
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत में अधिकारी कानून के उल्लंघन के खिलाफ काम करते हैं न कि अधिकारों के वैध प्रयोग के खिलाफ। बागची की टिप्पणी जम्मू कश्मीर में कुछ खास घटनाओं पर मानवाधिकार के लिए उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) के प्रवक्ता द्वारा दिए गए एक बयान के जवाब में आई है।
बागची ने कहा कि बयान में कानून लागू करने वाले अधिकारियों और भारत के सुरक्षा बलों के खिलाफ निराधार और बेबुनियाद आरोप लगाए गए। उन्होंने कहा कि यह ओएचसीएचआर की ओर से सीमा पार आतंकवाद से भारत के समक्ष सुरक्षा चुनौतियों और जम्मू कश्मीर सहित हमारे नागरिकों के सबसे मौलिक मानव अधिकार, जीवन के अधिकार पर इसके प्रभाव के बारे में पूरी तरह से समझ की कमी को भी दर्शाता है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों को सशस्त्र समूहों के रूप में वर्णित करना ओएचसीएचआर की ओर से एक स्पष्ट पूर्वाग्रह दर्शाता है। उन्होंने कहा कि किसी लोकतांत्रिक देश के रूप में अपने नागरिकों के मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने की प्रतिबद्धता के साथ, भारत सीमा पार आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाता है।
बागची ने कहा कि भारत की संप्रभुता की रक्षा और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संसद द्वारा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (यूएपीए) जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून बनाए गए थे। उन्होंने कहा कि बयान में वर्णित व्यक्ति की गिरफ्तारी और उसके बाद की हिरासत पूरी तरह से कानून के प्रावधानों के अनुसार की गई।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत में प्राधिकार कानून के उल्लंघन के खिलाफ काम करते हैं न कि अधिकारों के वैध प्रयोग के खिलाफ। इस तरह की सभी कार्रवाई कानून के अनुसार होती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के कानून जैसे, यूएपीए एक्ट, 1967 को हमारी संसद ने भारत की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए बनाया है।