आर्थिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका को इस साल कर्ज देने में सबसे आगे रहा भारतः वेराइट रिसर्च थिंक-टैंक

साल 2022 के दौरान भारत ने अपने पड़ोसी देश को 37.7 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एशियाई विकास बैंक (ADB) इस अवधि में श्रीलंका को 36 करोड़ डॉलर का कर्ज देकर दूसरा बड़ा कर्जदाता बना है

अपडेटेड Sep 15, 2022 पर 4:29 PM
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भारत और एडीबी दोनों ने मिलकर इस साल जनवरी से अप्रैल के बीच श्रीलंका को आवंटित कुल कर्ज में 76 फीसदी का योगदान दिया है।

वेराइट रिसर्च थिंक-टैंक के अनुसार, भारत गहरे राजनीतिक एवं आर्थिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका (Sri Lanka) के लिए 2022 में सबसे बड़े कर्जदाता के रूप में उभरा है। साल के दौरान भारत ने अपने पड़ोसी देश को 37.7 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एशियाई विकास बैंक (ADB) इस अवधि में श्रीलंका को 36 करोड़ डॉलर का कर्ज देकर दूसरा बड़ा कर्जदाता बना है।

भारत और ADB ने 76% का दिया योगदान

भारत और एडीबी दोनों ने मिलकर इस साल जनवरी से अप्रैल के बीच श्रीलंका को आवंटित कुल कर्ज में 76 फीसदी का योगदान दिया है। साल के पहले चार महीनों में श्रीलंका को विभिन्न सरकारों एवं संस्थानों से कुल 96.8 करोड़ डॉलर का कर्ज आवंटित किया गया। इसमें 37.7 करोड़ डॉलर के साथ भारत सबसे आगे रहा है।


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श्रीलंका स्थित स्वतंत्र रिसर्च संस्थान वेराइट ने कहा है कि श्रीलंका को कर्ज देने में एडीबी सबसे बड़ा बहुपक्षीय संस्थान रहा है। वेराइट रिसर्च एशियाई क्षेत्र में निजी कंपनियों और सरकारों को रणनीतिक विश्लेषण के साथ परामर्श देने का काम भी करता है।

भारत ने करेंसी की अदला-बदली भी की

कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने कहा कि इस साल श्रीलंका को भारत की तरफ से कुल चार अरब डॉलर की सहायता दी गई है जिसमें करेंसी की अदला-बदली भी शामिल है। इस साल की शुरुआत से ही श्रीलंका गहरे वित्तीय संकट से जूझ रहा है। विदेशी मुद्रा के अभाव में वह जरूरी खानपान एवं ईंधन सामग्री की भी खरीद नहीं कर पा रहा था। ऐसे समय में भारत ने उसे ईंधन खरीद के लिए लोन सुविधा भी मुहैया कराई।

जरूरी चीजों के दाम बढ़ने से श्रीलंका में आंतरिक अशांति भी पैदा हो गई। व्यापक स्तर पर हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को देश छोड़कर भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। हालांकि, रानिल विक्रमसिंघे की अगुवाई वाली मौजूदा सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) के साथ 2.9 अरब डॉलर का एक कर्ज समझौता करने में सफल रही है। विश्लेषकों को इससे हालात में कुछ हद तक सुधार आने की उम्मीद है।

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