क्या बेरूत में हसन नसरल्लाह के मारे जाने के बाद मध्यपूर्व में बड़े जंग की चिंगारी सुलग रही है? मार्केट्स के संकेतों को देख तो ऐसा ही लगता है। स्टॉक मार्केट्स में गिरावट आई है। क्रूड ऑयल के प्राइस 2 फीसदी चढ़ चुके हैं। 1 अक्टूबर की रात ईरान ने इजराइल पर करीब 200 मिसाइलें दागी। बताया जाता है कि ज्यादातर मिसाइलों को हवा में ही मार गिराय गया। कुछ जमीन पर गिरे। लेकिन, इससे बड़ा नुकसान नहीं हुआ। इस हमले में किसी की जान नहीं गई है, जो अच्छी बात है।
अमेरिका ने सेना को इजराइल की मदद करने को कहा
इजराइल (Israel) ने ईरान (Iran) को धमकी दी है। उसने कहा है कि उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान ने बड़ी गलती की है और उसे इसका अंजाम भुगतना होगा। इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) ने ईरानी हमले को गंभीर बताया है। उसने कहा है कि इसका जवाब देने की तैयारी चल रही है। इसका वक्त और जगह इजराइल तय करेगा। इस बीच, अमेरिका ने इजराइल को मदद के हाथ बढ़ाए हैं। मध्यपूर्व में स्थित अमेरिकी सेना को इजराइल की मदद करने और ईरान की तरफ से दागी जाने वाली मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने को कहा गया है।
इजराइल को आंतरिक सुरक्षा के भी उपाय करने होंगे
एक दूसरी आतंकी घटना में 1 अक्टूबर को तेल अवील में छह लोगों के मारे जाने और 9 के घायल होने की खबर है। इससे यह संकेत मिलता है कि इजराइल को न सिर्फ बाहरी खतरों से बचाव के लिए खुद को तैयार रखना है बल्कि आंतरिक खतरों से भी अपनी सुरक्षा करनी है। इस बीच, ईरान ने कहा है कि उसके मिसाइल हमले पूरे हो चुके हैं। लेकिन, इजराइल ने बेरूत और गाजा पर अपने हमले तेज कर दिए हैं।
लड़ाई बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं
इससे पहले ईरान ने अप्रैल में इजराइल पर मिसाइलें दागी थी। लेकिन, अमेरिका के हस्तक्षेप से इजराइल ने बड़ी जवाबी कार्रवाई नहीं की थी। सवाल है कि क्या इस बार इस तरह का संयम देखने को मिलेगा? इजराइल ने जिस तरह से आक्रामक रुख दिखाया है, उससे ऐसा लगता है कि मध्यपूर्व में बड़ी लड़ाई छिड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। नेतन्याहू मौके का राजनीतिक फायदा उठाने की हर कोशिश करेंगे। वह सत्ता में बने रहने के लिए सैन्य विकल्प का इस्तेमाल कर सकते हैं।
ईरान पर नसरल्लाह की मौत का बदला लेने का दबाव
जहां तक ईरान की बात है तो नसरल्लाह की मौत के बाद अब कट्टरवादी सोच वालों का पलड़ा भारी दिख रहा है। हिजबुल्लाह चीफ की मौत का बदला लेने के लिए ईरान ने मिसाइल हमलें कर अपने इरादों का संकेत दे दिया है। अब आगे घटनाक्रम इस पर निर्भर करेगा कि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से पहले अमेरिका किस तरह से इजराइल की मदद करने के लिए आगे आता है। अमेरिकी सरकार की तरफ से इजराइल को किसी तरह की नसीहत देने की कोशिश नहीं हुई है।
ईरान की सरकार के सामने कई चुनौतियां
इस साल जुलाई में तेहरान में जिस तरह से हमास नेता इस्माइल हानिये की मौत हुई और मई में जिस तरह से रहस्यमय हेलीकॉप्टर क्रैश में ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी मारे गए उससे ईरान की चिंता बढ़ गई है। ईरान में सरकार को नागरिकों के असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में इजराइल के हमलों का जवाब देने के साथ सरकार को अपनी सुरक्षा का भी ध्यान रखना है। पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया (पाकिस्तान से लेकर सऊदी अरब) ने हिंसा के कई दौर देखे हैं। इनमें ईरान-इजराइल सबसे ताजा है।
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ईरान के लोग पहले से प्रतिबंध की वजह से मुश्किल का सामना कर रहे
इजराइल के साथ ताजा टकराव का असर ईरान की करेंसी रियाल पर पड़ा है। डॉलर के मुकाबले इसमें 2 फीसदी गिरावट आई है। अगर यह लड़ाई बढ़ती है तो इसका असर ईरान के आम लोगों पर पड़ेगा। वे पहले से ही अमेरिका की अगुवाई में पश्चिमी देशों की तरफ से लगाए गए प्रतिबंध की वजह से मुश्किल का सामना कर रहे हैं।
(लेखक दिल्ली स्थित सोसायटी फॉर पॉलिसी स्टडीज के डायरेक्टर हैं। यहां व्यक्त विचार उनके निजी विचार हैं। इनका इस प्रकाशन से कोई संबंध नहीं है।)