आखिर जस्टिन ट्रूडो ने माना कि निज्जर की हत्या में भारत के शामिल होने का आरोप उन्होंने बगैर किसी सबूत लगाया था

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने 16 अक्टूबर को एक सरकारी जांच आयोग के सामने यह कबूल कर लिया कि उन्होंने बगैर ठोस सबूत इंडिया पर गंभीर आरोप लगाए थे। भारत खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में उसका हाथ होने के आरोप का लगातार खंडन करता आ रहा है। अब ट्रूडो के यह मान लेने कि उनके पास कोई सबूत नहीं है, भारत की बात सच साबित हुई है

अपडेटेड Oct 17, 2024 पर 11:26 AM
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कनाडा के प्रधानमंत्री ने जांच आयोग को जो बातें बताई हैं, उससे यह भी साबित हो गया है कि खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू का यह दावा सच है कि वह और उसका संगठन पिछले तीन साल से कनाडा के प्रधानमंत्री के संपर्क में थे।

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने आखिकार यह स्वीकार कर लिया है कि उसने भारत पर बगैर किसी ठोस सबूत के आरोप लगाए थे। ट्रूडो ने कहा था कि खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का हाथ था। कनाडा के प्रधानमंत्री ने 16 अक्टूबर को एक सरकारी जांच आयोग के सामने यह बात कबूल की। उनका यह कबूलनामा ऐसा वक्त आया है, जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। दरअसल, ट्रूडो के आरोपो का भारत लगातार खंडन करता आ रहा है। भारत कनाडा से उसके आरोप के समर्थन में सबूत पेश करने की मांग करता आ रहा है।

ट्रूडो ने सिर्फ खुफिया जानकारी के आधार पर भारत पर लगाए गंभीर आरोप

जांच आयोग को दिए अपने बयान में ट्रूडो (Justin Trudeau) ने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले साल निज्जर (Hardeep Singh Nijjar) की हत्या में इंडिया के शामिल होने का आरोप लगाया था तब उसके पास इसका कोई ठोस सबूत नहीं था। उन्होंने कहा कि उन्होंने ठोस सबूत की जगह सिर्फ खुफिया जानकारी के आधार पर यह आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी कबूल किया कि इंडिया ने उनसे इस मामले में ठोस सबूत पेश करने को कहा था। इंडिया ने कहा था कि कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों के पास जो भी जानकारी है, उसे इंडिया को उपलब्ध करानी चाहिए।


ट्रूडो ने इस मामले में भारत की सफाई पर भरोसा नहीं किया

ट्रूडो ने आयोग को यह भी बताया कि इस मामले में कनाडा के पास जो खुफिया जानकारियां हैं, वे सिर्फ शुरुआती स्तर की हैं। कनाडा के पास इस मामले में ठोस सबूत नहीं है। इससे यह साफ हो गया है कि ट्रूडो ने बगैर किसी सबूत भारत पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने इस मामले में भारत के जवाब पर भरोसा नहीं किया। लगातार वह भारत को कसूरवार ठहराते रहे। इसके चलते दोनों देशों के बीच रिश्तों को काफी चोट पहुंची। भारत और कनाडा के रिश्ते पहले कभी इतने खराब नहीं थे।

गुरपतवंत सिंह पन्नू का दावा अब सच लगता है

कनाडा के प्रधानमंत्री ने जांच आयोग को जो बातें बताई हैं, उससे खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू का यह दावा सच लगता है कि वह और उसका संगठन कनाडा के प्रधानमंत्री ट्रूडो के संपर्क में थे। पन्नू ने खुलासा किया था कि वह ट्रूडो के ऑफिस के साथ पिछले तीन साल से संपर्क में था। वह ट्रूडो के ऑफिस को लगातार जानकारियां मुहैया करा रहा था। इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल कनाडा की तरफ से भारत पर आरोप लगाने के लिए किया गया। इससे दोनों देसों के रिश्तों को गहरी चोट पहुंची।

भारत-कनाडा के रिश्तों में आई है तल्खी

हाल में कनाडा के साथ भारत के रिश्ते तब बहुत खराब हो गए, जब कनाडा ने भारतीय उच्चायुक्त और दूसरे राजनयिकों को निज्जर की हत्या की जांच में 'पर्सनंस ऑफ इंटरेस्ट' करार दिया। इंडिया ने इसका विरोध किया। कनाडा की इस हरकत को बेतुका बताया। इंडिया ने कहा कि यह ट्रूडो के अपने राजनीतिक मकसद पूरा करने की कोशिशों का हिस्सा है।

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छह कनाडाई राजनयिकों को भारत छोड़ने का आदेश

लेकिन, कनाडा के इस हरकत का असर दोनों देशों के रिश्तों पर पड़ा। इंडिया ने कनाडा में अपने उच्चायुक्त को वापस बुला लिया। इसके जवाब में कनाडा ने छह भारतीय राजनयिकों को देश से बाहर निकालने का आदेश दिया। भारत ने भी छह कनाडाई राजनयिकों को 20 अक्टूबर तक देश छोड़ने को कहा है।

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