Lebanon Serial Blasts: मिडिल ईस्ट के देश लेबनान में मंगलवार को उस वक्त दहशत फैल गई, जब एक के बाद एक धमाकों को अंजाम दिया गया। रोज की तरह सामान्य से चल रहे दिन में अचानक से हजारों डिवाइसेज में ब्लास्ट हो गए। जिन लोगों की डिवाइस फटीं, उनमें से कोई बाजार में फल-सब्जी खरीद रहा था, कोई घर पर था, कोई किसी दुकान पर पेमेंट कर रहा था। देखते ही देखते 11 लोगों की मौत हो गई, 2700 से ज्यादा लोग घायल हो गए और उनके पास मौजूद लोगों को समझ ही नहीं आया कि अचानक से क्या हुआ। मरने वालों में हिज्बुल्लाह सांसद का बेटा और घायलों में लेबनान में ईरान के राजदूत मोज्तबा अमानी भी शामिल हैं।
जिन डिवाइसेज में ब्लास्ट हुआ वह थे पेजर। वही पेजर, जो 90 के दशक में कम्युनिकेशन का सबसे बड़ा जरिया हुआ करते थे। ये ब्लास्ट अपने आप नहीं हुए बल्कि इन्हें प्लान किया गया था और निशाना थे लेबनान के संगठन हिज्बुल्लाह के लड़ाके। इन धमाकों की प्लानिंग शायद महीनों पहले की जा चुकी थी। कहा जा रहा है कि यह पूरा जाल इजरायल की जासूसी एजेंसी मोसाद का बिछाया हुआ है। महीनों पहले हिज्बुल्लाह ने 5,000 पेजर्स ऑर्डर किए थे, जो इस साल की शुरुआत में लेबनान पहुंचे।
लेबनान पहुंचने से पहले ही उनके साथ छेड़छाड़ की गई, उनमें से हर एक के अंदर करीब 3 ग्राम बारूद छिपा दिया गया और हिज्बुल्लाह को इस बात की भनक तक नहीं लगी। सवाल यह उठता है कि हिज्बुल्लाह के लिए काम करने वाले लोग मोबाइल/स्मार्टफोन के जमाने में पेजर क्यों इस्तेमाल कर रहे थे।
ये है पेजर इस्तेमाल करने की वजह
मोबाइल के आने के बाद से पेजर इस्तेमाल कम होकर न के बराबर पर आ चुका है। लेकिन सिक्योर्ड मैसेजिंग के लिए कुछ संगठन आज भी इसका इस्तेमाल करते हैं। हिज्बुल्लाह के लड़ाकों ने भी इस विश्वास के साथ पेजर का इस्तेमाल करना शुरू किया कि इससे इजरायल उनकी लोकेशन ट्रैक नहीं कर सकेगा। रॉयटर्स के मुताबिक, इस साल फरवरी में हिज्बुल्लाह ने एक वॉर प्लान तैयार किया जिसका उद्देश्य समूह के खुफिया ढांचे में खामियों को दूर करना था। लेबनान को टारगेट कर किए गए इजरायली हमलों में लगभग 170 हिज्बुल्लाह लड़ाके पहले ही मारे जा चुके थे, जिनमें एक वरिष्ठ कमांडर और बेरूत में हमास का एक शीर्ष अधिकारी भी शामिल था।
13 फरवरी को एक टेलीविजन भाषण में, समूह के महासचिव हसन नसरल्लाह ने सपोर्टर्स को सख्त चेतावनी दी कि उनके फोन इजरायली जासूसों से भी ज्यादा खतरनाक हैं। इसलिए उन्हें तोड़ देना चाहिए, दफना देना चाहिए या लोहे के बक्से में बंद कर देना चाहिए। हिज्बुल्लाह ने समूह की विभिन्न शाखाओं में लड़ाकों से लेकर रिलीफ सर्विसेज में काम करने वाले डॉक्टर्स तक, हिजबुल्लाह सदस्यों को फोन्स की जगह पेजर बांटने का विकल्प चुना।
पेजर 1950-60 के दशक में विकसित किए गए और 80 के दशक में तेजी से लोकप्रिय हुए। ये छोटे रेडियो रिसीवर जैसे होते हैं। इन्हें पॉकेट में लेकर चला जा सकता है। पेजर इस्तेमाल कर रहे हर इंसान का एक प्राइवेट कोड होता है, बिल्कुल वैसे ही जैसे कि मोबाइल नंबर। हर मैसेज पेजर की स्क्रीन की एक तरफ बीप की आवाज के साथ फ्लैश होता है। इस आवाज की वजह से पेजर को बीपर भी कहा जाता था। पेजर के रेडियो सिग्नल बहुत अच्छे होते हैं और इसीलिए इमरजेंसी में ये डिवाइस काफी उपयोगी साबित होती हैं।