पर्सन ऑफ द ईयर से लेकर फुटबॉल के जबरदस्त फैन तक...पोप फ्रांसिस के बारे में ये बातें नहीं जानते होंगे आप

पोप फ्रांसिस इस समय ब्रोंकाइटिस और डबल निमोनिया से जूझ रहे हैं। उन्‍हें सांस लेने में दिक्‍कतों के बाद अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था। उनके दोनों फेफड़ों में निमोनिया का इलाज किया गया। उन्हें मौजूदा वक्‍त में ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है

अपडेटेड Feb 23, 2025 पर 3:26 PM
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पोप फ्रांसिस की हालत गंभीर है और वे ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं।

Pope Francis Health Update: पोप फ्रांसिस इस समय ब्रोंकाइटिस और डबल निमोनिया से जूझ रहे हैं। उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। 88 साल के पोप फ्रांसिस को 14 फरवरी को ब्रोंकाइटिस की समस्या के बढ़ने के कारण रोम के जेमेली अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहीं शनिवार (22 फरवरी) को उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई, जिसके बाद उन्हें अधिक मात्रा में ऑक्सीजन दी जा रही है। आइए जानते हैं पोप फ्रांसिस से जुड़ी से खास बातें

पहले लैटिन अमेरिकी और जेसुइट पोप

पोप फ्रांसिस, जिनका असली नाम जॉर्ज मारियो बर्गोग्लियो है, अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में जन्मे थे और वे रोमन कैथोलिक चर्च के पहले लैटिन अमेरिकी पोप हैं। इसके अलावा, वे पोप बनने वाले पहले जेसुइट भी हैं। अधिकांश पोपों के विपरीत, जिनमें से लगभग 200 इटली से थे, वे यूरोप के बाहर से हैं। पोप फ्रांसिस 266वें पोप हैं।


इटली से रहा है नाता

हालाँकि पोप फ्रांसिस का जन्म अर्जेंटीना में हुआ, लेकिन उनकी पारिवारिक जड़ें इटली से जुड़ी हुई हैं। उनके माता-पिता इटली से अर्जेंटीना आए थे। उनके पिता रेलवे अकाउंटेंट के रूप में काम करते थे, जबकि उनकी माँ ने अपने पाँच बच्चों की परवरिश में पूरी तरह से समर्पित कर दी थी।

कमेस्ट्री और फिलॉसफी में पढ़ाई

पोप फ्रांसिस ने ब्यूनस आयर्स विश्वविद्यालय से फिलॉसफी की पढ़ाई की और कमेस्ट्री में मास्टर डिग्री हासिल की। विला डेवोटो के डायोसेसन सेमिनरी में प्रवेश करने से पहले, उन्होंने एक तकनीकी स्कूल में पढ़ाई की, जहाँ उन्होंने रासायनिक तकनीशियन बनने का प्रशिक्षण लिया। ब्यूनस आयर्स के आर्कबिशप बनने से पहले, 1964 और 1965 के बीच, पोप फ्रांसिस ने सांता फ़े के इमैकुलेट कॉन्सेप्शन कॉलेज में साहित्य और मनोविज्ञान पढ़ाया। अगले साल, उन्होंने ब्यूनस आयर्स में कोलेजियो डेल साल्वाटोर में भी वही विषय पढ़ाना जारी रखा।

2005 के पापल कॉन्क्लेव में थे दावेदार

पोप जॉन पॉल द्वितीय की मृत्यु के बाद, जॉर्ज बर्गोग्लियो (अब पोप फ्रांसिस)  2005 के पापल कॉन्क्लेव में उपविजेता थे। हालांकि, पोप बेनेडिक्ट XVI बनने वाले जोसेफ रैटजिंगर ने अंततः पोप का पद हासिल किया। पोप फ्रांसिस ऐसे पहले पोप हैं जिन्होंने "फ्रांसिस" नाम अपनाया। उन्होंने यह नाम सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी के सम्मान में चुना, जो अपनी भक्ति और गरीबों के प्रति अपनी संवेदनशीलता के लिए प्रसिद्ध थे। साथ ही, वह अपनी सिंपल और सरल लाइफस्टाइल के लिए भी जाने जाते हैं।

पर्सन ऑफ द ईयर और फुटबॉल के फैन

साल 2013 में पोप फ्रांसिस टाइम पत्रिका द्वारा पर्सन ऑफ द ईयर नामित होने वाले पहले पोप बने। उनकी गर्मजोशी, विनम्रता और आम लोगों के प्रति समर्पण - जैसे बच्चों को आशीर्वाद देना, बीमारों से मिलना या सामाजिक न्याय के लिए आवाज उठाना - इन सब वजहों से उन्हें "लोगों के पोप" के नाम से पुकारा जाने लगा। पोप फ्रांसिस एक फुटबॉल फैन हैं और अर्जेंटीना के सैन लोरेंजो फुटबॉल क्लब के एक स्पोर्टर हैं।

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