Superbug: सुपरबग दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारी बन के सामने आ रही है। इस बीमारी के प्रकोप से अमेरिका भी डरा हुआ है। कोरोना के बाद इस बीमारी का दुनिया भर में तांडव जारी है। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन डिपार्टमेंट (CDC) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बीमारी पर किसी भी तरह की दवा की असर नहीं होता है। अगर एशिया की बात करें तो इस बीमारी से सबसे ज्यादा भारत में लोगों की मौत हुई है। मेडिकल जर्नल लांसेट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य में हर साल सुपरबग के चलते एक करोड़ लोग काल के गाल में समा जाएंगे।
सुपरबग एक बैक्टीरिया, वायरस और पैरासाइट का स्ट्रेन है। ये एंटीबायोटिक के मिसयूज की वजह से जन्म लेता है। फिलहाल में इस पर किसी भी दवाई का कोई असर नहीं पड़ रहा है। CDC के मुताबिक हर साल अमेरिका में 50,000 लोगों की मौत हो रही है। यानी अमेरिका में हर 10 मिनट में सुपरबग से एक व्यक्ति की मौत हो रही है। ये दूसरे बीमारियों के मुकाबले बहुत तेजी से फैलता है। अभी तक वेस्ट अफ्रीका में सुपरबग के चलते सबसे अधिक लोगों की मौत हुई हैं। अमेरिका को हर साल करीब 5 अरब डॉलर का नुकसान होता है। जो कि भारत के कुल स्वास्थ्य बजट का आधा है।
अमेरिका की स्वास्थ्य एजेंसी के मुताबिक, कोरोना के बाद से सुपरबग से हो रही मौत के आंकड़े में 15 फीसदी का इजाफा हुआ है। ऐसा इसीलिए हो रहा है क्योंकि कोरोना काल के दौरान एंटीबायोटिक का इस्तेमाल काफी बढ़ गया था। सुपर बग को मेडिकल भाषा में एंटी माइक्रोबियल-रेसिस्टेंट के नाम से भी जाना जाता है।
डॉक्टरों के मुताबिक फ्लू जैसे वायरल संक्रमण होने पर एंटीबायोटिक लेने पर सुपरबग बनने के आसार अधिक हो जाते हैं। यह धीरे-धीरे अन्य लोगों को संक्रमित करता रहता है। यह एक विशेष बीमारी है। जिसे धीमा किया जा सकता है लेकिन रोका नहीं जा सकता है।
साल 2050 तक करोड़ों लोगों की हो सकती है मौत
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोरोना वायरस अब तक करीब 65 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं सुपरबग सिर्फ एक साल में ही करोड़ों लोगों की जान ले सकता है। भारत में सुपरबग से होने वाली मृत्यु दर 13 फीसदी है। जो कि कोरोना से 13 गुना अधिक है।