सीरिया में अभी गृह युद्ध की आग शांत भी नहीं हुई कि इजरायली सेना ने सीरिया पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए। इजरायली सेना ने राजधानी दमिश्क में सरकारी सुरक्षा भवनों को निशाना बनाकर हमला किया। यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब सीरिया के राष्ट्रपति देश छोड़कर भाग गए हैँ। जैसे ही राष्ट्रपति ने देश छोड़ा, फौरन इजरायली सेना ने अपने टैंक सीमा पर तैनात कर दिए। इजरायल ने राजधानी दमिश्क में एक हथियार डिपो पर हवाई हमले किए हैं। इस हमले का मकसद कथित तौर पर उन्नत हथियारों पर सीरियाई विद्रोही कब्जा न कर पाएं।
रिपोर्ट में सामने आया है कि इजरायली नहीं चाहते कि सीरियाई सेना के हथियार लूटे जाएं या विद्रोहियों के हाथों में आ जाएं। इजरायली राज्य मीडिया ने बताया कि IDF के सैनिकों ने रविवार को गोलान हाइट्स में माउंट हर्मन के शिखर पर एक सीरियाई सेना चौकी पर कब्जा कर लिया है।
इजरायल ने शुरू कर दिया बमबारी
दरअसल, असद के जाते ही इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फौरन आर्मी को उस इलाके को अपने कब्जे में लेने का आदेश दे दिया, जो बफर जोन था। बफर जोन उस इलाके को कहते हैं जो दो देशों के बीच की खाली जगह होती है। यहां किसी देश की आर्मी तैनात नहीं होती है। इसके बाद इजरायल की सेना ने सीरिया में हमले भी तेज कर दिए हैं। दमिश्क में काफर सूसा, अल-मजेह हवाई अड्डे और माउंट कासिओन को एयरस्ट्राइक में निशाना बनाया गया। हथियारों के डिपो पर भी एयरस्ट्राइक की गई। सीरिया सीमा के साथ लगे गोलान क्षेत्र में इजरायल ने टैंक तैनात कर दिए हैं। आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट-जनरल ने सीरियाई सीमा के दौरे पर कहा कि IDF यह सुनिश्चित करने के लिए निगरानी कर रहा है कि सीरिया की ओर से कोई भी हमारी दिशा में न बढ़े।
इजरायली सेना ने का बफर जोन पर कब्जा – नेतन्याहू
वहीं इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायली बलों ने गोलान हाइट्स में एक बफर जोन पर कब्जा कर लिया है। यह वो इलाका है, जिसे 1974 के समझौते में बनाया गया था। इजरायली सेना सीरिया के कई गांवों में भी बढ़ने की तैयारी कर रही है। हालात को देखते हुए गोलान हाइट्स के इलाके में मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया है।
जानिए क्या था 1974 का समझौता
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1974 में सीरिया और इजरायल के बीच एक समझौता हुआ था। उस समय दोनों देशों के बीच एक बफर जोन बनाया गया था। तब से इस बफर जोन में न तो इजरायल की सेना उस इलाके में जाती थी और न ही सीरिया की सेना आती थी। लेकिन असद के जाते ही नेतन्याहू की सेना उस इलाके में पहुंच गई है। नेतन्याहू ने कहा कि असद सरकार के जाने से 1974 का समझौता टूट गया है। सीरियाई सैनिकों ने सरेंडर कर दिया है। हम किसी भी शत्रु को अपनी सीमा पर पैर जमाने की अनुमति नहीं देंगे। इसके बाद इजरायल की सेना बफर जोन की ओर कूच कर गई। यहां तक कि उन इलाकों पर भी कब्जा कर लिया जो कभी सीरिया का हिस्सा हुआ करता था।