रूस ने 24 मार्च को यूक्रेन पर हमले शुरू (Russian Attacks on Ukraine) किए थे। जवाब में अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए। इसका सीधा असर रूस की मुद्री रूबल (Ruble) पर पड़ा था। एक डॉलर के मुकाबले रूबल गिरकर 121.5 पर आ गया था। यह डॉलर (Dollar) के मुकाबले रूबल का सबसे लो लेवल है। इससे सबसे ज्यादा खुश अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन दिखे थे। उन्होंने रूबल का मजाक तक उड़ाया था।
अमेरिकी प्रेसिडेंट ने उड़ाया था मजाक
बाइडेन ने कहा था कि रूबल (Ruble) घटकर Rubble रह गया है। Rubble का मतलब हिन्दी में मलबा होता है। जैसे मकान का मलबा, पहाड़ का मलबा आदि। यानी ऐसी चीज जिसका कोई इस्तेमाल नहीं हो सकता। दरअसल, फरवरी के आखिर में रूबल गिरकर 1998 के रूसी वित्तीय संकट के स्तर तक चला गया था। शायद बाइडेन को ऐसा लगा होगा कि प्रतिबंध के चलते रूबल का जल्द उबरना नामुमकिन है।
रूबल ने दिखाई शानदार रिकवरी
लेकिन, रूबल ने पिछले कुछ दिनों में शानदार रिकवरी दिखाई है। यह न सिर्फ निचले स्तर से उबरने में कामयाब रहा है, बल्कि यह 79.7 के स्तर पर आ गया है। यूक्रेन पर रूस के हमले से पहले यह इस लेवल पर था। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूबल को मजबूती देने के लिए बड़ा फैसला लिया था। उन्होंने कहा था कि यूरोप को गैस की सप्लाई की पेमेंट वह रूबल में लेगा। इसके बाद रूबल में मजबूती आती दिखी थी। धीरे-धीरे यह मजबूत होकर यूक्रेन क्राइसिस शुरू होने के पहले के लेवल पर पहुंच गया है।
रूस पर प्रतिबंध का ज्यादा असर नहीं
एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही अमेरिका और यूरोपीय देश इस बात से अपनी पीठ ठोंक रहे हैं कि उनके प्रतिबंधों के चलते रूसी इकोनॉमी संकट में है, लेकिन सच में ऐसा नहीं है। जब तक रूस नेचुरल गैस और क्रूड की सप्लाई यूरोपीय देशों को करता रहेगा तब तक उसकी तिजोरी में रूबल भरता रहेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एनर्जी के निर्यात से इस साल भी रूस को बड़ी आमदनी होने की उम्मीद है।
रूस का एक्सपोर्ट इस साल बढ़ेगा
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स का अनुमान है कि इस साल (2022) रूस को एनर्जी के एक्सपोर्ट से करीब 321 अरब डॉलर की आमदनी होगी। यह 2021 के मुकाबले एक-तिहाई ज्यादा है। डॉलर के मुकाबले रूबल में आई रिकवरी को पुतिन की बड़ी जीत मानी जा रही है। इसकी वजह यह है कि रूस में लोग रूबल के एक्सचेंज रेट को लेकर बहुत संवेदनशील होते हैं।