अमेरिकी सीनेट ने 12 फरवरी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नॉमिनेटेड तुलसी गबार्ड ( Tulsi Gabbard) को नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर (राष्ट्रीय खुफिया निदेशक) के रूप में मंजूरी दे दी है। यह निर्णय 52-48 के मतों के अंतर से लिया गया। तुलसी के खिलाफ केवल एक रिपब्लिकन सीनेटर मिच मैककॉनेल ने विरोध में मतदान किया। तुलसी गबार्ड की नियुक्ति को लेकर शुरू में कई रिपब्लिकन नेताओं ने संदेह जताया था। उनके द्वारा पहले रूस को लेकर दिए गए बयान, सीरिया के अपदस्थ राष्ट्रपति बशर अल-असद से उनकी मुलाकात आदि लेकर विवाद पैदा हो गया था।
वह भारतीय मूल की हैं। तुलसी भारत की बड़ी समर्थक मानी जाती हैं और खुलकर भारत के समर्थन में बयान देती रही हैं। तुलसी गबार्ड का जन्म अमेरिका के समोआ में हुआ था। तुलसी गबार्ड की मां को हिंदू धर्म में काफी रुचि थी। इसलिए उनकी मां ने उनका नाम तुलसी रखा दिया। तुलसी गबार्ड ने हिंदू धर्म अपनाया है। गबार्ड ने अमेरिका की सेना में रहते हुए इराक में सेवाएं दीं थी।
गबार्ड अब अमेरिका की 18 अलग-अलग खुफिया एजेंसियों के कोऑर्डिनेटर के तौर पर काम करेंगी। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब राष्ट्रपति ट्रंप प्रशासनिक संरचनाओं में बड़े बदलाव कर रहे हैं। गबार्ड ने अपनी नियुक्ति के बाद कहा, 'मैं इस देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ काम करूंगी। हमारा मकसद पारदर्शिता और सुरक्षा के संतुलन को बनाए रखना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी नियुक्ति अमेरिकी खुफिया समुदाय के लिए एक बड़ा बदलाव ला सकती है, खासकर विदेशी नीतियों और साइबर सुरक्षा मामलों में।
अमेरिकी सेना को भी सेवाएं दे चुकी हैं तुलसी
गबार्ड एक पूर्व आर्मी रिजर्व लेफ्टिनेंट कर्नल रही हैं। डेमोक्रेटिक खेमे से अमेरिकी कांग्रेस सदस्या रह चुकीं गबार्ड ने 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में बतौर उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमाई थी।