पैसे कमाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उसे सही समय पर इन्वेस्ट करना है। कई बार SIP में 5 साल की देरी आपको 3 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा सकती है। इन्वेस्टमेंट की दुनिया में अक्सर लोग सोचते हैं कि कितना पैसा लगाना जरूरी है, लेकिन असली फर्क इससे पड़ता है कि आपने कब इन्वेस्ट करना शुरू किया है। दो लोगों की एक जैसी कमाई और इन्वेस्टमेंट होने के बावजूद, सिर्फ 5 साल पहले शुरू करने वाला व्यक्ति रिटायरमेंट तक कहीं ज्यादा बड़ा फंड बना सकता है।
इन्वेस्ट कब किया गया शुरू – इससे पड़ता है फर्क
इन्वेस्टमेंट के मामले में टाइम से कैसे फर्क पड़ता है, इसे एक उदाहरण से समझते हैं। दो दोस्तों अंकुर और अभिषेक का उदाहरण लेते हैं। दोनों की कमाई लगभग एक समान थी। दोनों ने हर महीने 10,000 रुपये की SIP यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान शुरू किया। हम इस पर सालाना 12% का रिटर्न मानकर चलते हैं। दोनों के इन्वेस्ट करने में फर्क सिर्फ इतना था कि अभिषेक ने 25 साल की उम्र में इन्वेस्टमेंट शुरू किया, जबकि अंकुर ने 30 साल में इन्वेस्ट करना शुरू किया।
कैसे बड़ा बन जाता है 5 साल का ये फर्क
शुरुआती सालों में दोनों के इन्वेस्टमेंट में ज्यादा अंतर नजर नहीं आता। दोनों का पैसा धीरे-धीरे बढ़ता रहता है। ऐसा लगता है कि दोनों का रिजल्ट लगभग एक जैसा होगा। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, यह छोटा सा 5 साल का अंतर बहुत बड़ा बन जाता है। खासकर रिटायरमेंट के समय ये फर्क साफ पता चलता है।
जहां अंकुर का फंड करीब 3.5 करोड़ रुपये तक पहुंचता है, वहीं अभिषेक का फंड करीब 6.4 करोड़ रुपये हो जाता है। यानी सिर्फ 5 साल पहले शुरू करने से अभिषेक को लगभग 3 करोड़ रुपये ज्यादा मिलते हैं। यह फर्क इसलिए नहीं है कि उसने ज्यादा पैसा लगाया, बल्कि इसलिए है कि उसके पैसे को ज्यादा समय मिला बढ़ने का।
इसका कारण है कंपाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि ब्याज, जो समय के साथ तेजी से बढ़ता है। शुरुआती 10-15 सालों में इसका असर कम दिखता है, लेकिन बाद के सालों में यह तेजी से बढ़ता है। यानी आखिरी के 5-10 साल सबसे ज्यादा कमाई करते हैं। अगर आप देर से शुरू करते हैं, तो आप इस सबसे अहम समय को खो देते हैं।
उदाहरण के तौर पर, अगर कोई 25 साल की उम्र में इन्वेस्टमेंट शुरू करता है, तो रिटायरमेंट तक उसका फंड करीब 6.4 करोड़ रुपये हो सकता है। अगर वही व्यक्ति 30 साल में शुरू करे, तो यह घटकर 3.5 करोड़ रुपये रह जाता है। और अगर 35 साल में शुरू किया जाए, तो यह सिर्फ 1.9 करोड़ रुपये तक ही पहुंचता है।
हालांकि, यह आंकड़े देखने में बड़े लगते हैं, लेकिन महंगाई (inflation) को ध्यान में रखने पर तस्वीर बदल जाती है। अगर 30-35 साल में औसतन 6% महंगाई मानी जाए, तो 3.5 करोड़ की वैल्यू आज के हिसाब से सिर्फ करीब 61 लाख रुपये रह जाती है, और 6.4 करोड़ की वैल्यू करीब 1.07 करोड़ रुपये के बराबर होती है। यानी भविष्य में पैसों की असली ताकत कम हो जाती है।
ऐसे में सिर्फ SIP शुरू करना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे समय-समय पर बढ़ाना भी जरूरी है। इसे स्टेप-अप SIP कहा जाता है, जिसमें हर साल इन्वेस्टमेंट राशि को करीब 10% बढ़ाया जाता है। इससे आपकी सेविंग महंगाई के साथ तालमेल बनाए रखती है और आपका फंड ज्यादा मजबूत बनता है।