31 मार्च से पहले निपटा लें ये 8 जरूरी टैक्स काम, नहीं तो हो सकता है नुकसान
वित्त वर्ष खत्म होने से पहले कुछ जरूरी टैक्स काम निपटाना जरूरी है। इससे आप पेनाल्टी से बच सकते हैं और टैक्स बेनिफिट का भी पूरा फायदा उठा सकते हैं। जानिए डिटेल।
ज्यादातर कंपनियां फरवरी या मार्च में निवेश के प्रूफ जमा करने की प्रक्रिया बंद कर देती हैं।
31 मार्च 2026 को मौजूदा वित्त वर्ष खत्म होने वाला है। ऐसे में अपने फाइनेंस, टैक्स और निवेश का रिव्यू करने का यह सबसे सही समय है। कुछ जरूरी कदम उठा लेने से आप पेनाल्टी से बच सकते हैं और उपलब्ध टैक्स बेनिफिट का पूरा फायदा उठा सकते हैं। आइए जानते हैं 8 काम के बारे में, जिन्हें 31 मार्च तक पूरा करना जरूरी है।
एडवांस टैक्स की आखिरी किस्त
अगर आपकी इनकम केवल सैलरी तक सीमित नहीं है और अन्य स्रोतों से भी कमाई होती है, तो आपको एडवांस टैक्स देना पड़ सकता है। पेनाल्टी से बचने के लिए 15 मार्च 2026 तक अपनी कुल टैक्स देनदारी का 100 प्रतिशत भुगतान करना जरूरी है।
अगर एडवांस टैक्स समय पर नहीं भरा गया या कम भरा गया, तो इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234B और धारा 234C के तहत ब्याज लगाया जा सकता है।
निवेश के दस्तावेज जमा करना
ज्यादातर कंपनियां फरवरी या मार्च में निवेश के प्रूफ जमा करने की प्रक्रिया बंद कर देती हैं। अगर आपने साल की शुरुआत में टैक्स छूट के लिए निवेश की जानकारी दी थी, तो अब उससे जुड़े दस्तावेज जमा करना जरूरी होता है।
आम तौर पर इन दस्तावेजों में जीवन बीमा प्रीमियम की रसीद, ELSS निवेश स्टेटमेंट, PPF योगदान का रिकॉर्ड, होम लोन ब्याज सर्टिफिकेट, हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम की रसीद और HRA के लिए किराए की रसीद शामिल होती हैं।
ये छूट आमतौर पर इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C, 80D और 80CCD(1B) के तहत मिलती हैं। अगर आप समय पर दस्तावेज जमा नहीं करते, तो आपके मार्च के वेतन से ज्यादा TDS काटा जा सकता है। यह भी ध्यान रखें कि ये छूट तभी मिलती हैं जब आपने पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनी हो।
टैक्स बचाने वाले निवेश पूरे करें
जिन लोगों ने पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनी है, उनके लिए चालू वित्तीय वर्ष में टैक्स बचाने वाले निवेश करने का यह आखिरी मौका है।
धारा 80C के तहत करदाता 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट ले सकते हैं। इसके लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS) और सुकन्या समृद्धि योजना जैसे निवेश विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
NPS में निवेश से अतिरिक्त टैक्स छूट
अगर आप अतिरिक्त टैक्स बचाना चाहते हैं, तो नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS में निवेश कर सकते हैं।
इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80CCD(1B) के तहत इसमें 50,000 रुपये तक की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है। यह छूट धारा 80C के 1.5 लाख रुपये की सीमा से अलग होती है, इसलिए पुरानी टैक्स व्यवस्था अपनाने वालों के लिए यह आखिरी समय में टैक्स बचाने का एक प्रभावी तरीका माना जाता है।
न्यूनतम योगदान करना न भूलें
कुछ सरकारी बचत योजनाओं में खाता सक्रिय रखने के लिए हर साल न्यूनतम निवेश करना जरूरी होता है। उदाहरण के लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF में सालाना कम से कम 500 रुपये जमा करना जरूरी है, जबकि अधिकतम सीमा 1.5 लाख रुपये है।
सुकन्या समृद्धि योजना में सालाना कम से कम 250 रुपये जमा करने होते हैं। अगर न्यूनतम राशि जमा नहीं की जाती, तो खाता निष्क्रिय हो सकता है और उसे दोबारा सक्रिय करने के लिए अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है।
निवेश से हुए कैपिटल गेन की समीक्षा
यह समय साल भर के निवेश लेनदेन की समीक्षा करने का भी है। इसमें इक्विटी शेयर, म्यूचुअल फंड और प्रॉपर्टी की बिक्री जैसे निवेश शामिल हो सकते हैं।
आपको शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन का हिसाब लगाकर यह अनुमान लगाना चाहिए कि कितना टैक्स बन सकता है।
होम लोन का ब्याज और मूलधन देखें
अगर आपने होम लोन लिया है, तो अपने लेंडर से वार्षिक लोन स्टेटमेंट या ब्याज सर्टिफिकेट डाउनलोड कर लें।
इनकम टैक्स एक्ट की धारा 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिल सकती है। इसलिए इन दस्तावेजों को समय पर अपने नियोक्ता को देना जरूरी है।
टैक्स गेन हार्वेस्टिंग पर भी विचार करें
जिन निवेशकों के पास 12 महीने से ज्यादा समय से इक्विटी शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड हैं, वे वित्तीय वर्ष खत्म होने से पहले कुछ मुनाफा बुक करने पर विचार कर सकते हैं।
इनकम टैक्स एक्ट की धारा 112A के तहत सूचीबद्ध इक्विटी शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड से मिलने वाला लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन एक वित्तीय वर्ष में 1.25 लाख रुपये तक टैक्स मुक्त होता है। इसके ऊपर होने वाले मुनाफे पर 12.5 प्रतिशत टैक्स लगता है।
सही रणनीति के साथ शेयर बेचकर और दोबारा निवेश करके निवेशक इस टैक्स छूट का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं। 31 मार्च से पहले इन जरूरी कामों को पूरा कर लेने से आखिरी समय की भागदौड़ से बचा जा सकता है और उपलब्ध टैक्स छूट का पूरा फायदा उठाया जा सकता है।