8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग पर बिग अपडेट, डिफेंस और रेलवे यूनियन के साथ बैठक शुरू, सैलरी-पेंशन पर क्या फैसला इसपर नजर

8th Pay Commission Latest News: वेतन आयोग ने अब सीधे तौर पर 'स्टेकहोल्डर्स' के प्रतिनिधियों से बातचीत शुरू कर दी है। आयोग डिफेंस फोर्स और रेलवे के प्रतिनिधियों से मिलकर उनकी जमीनी समस्याओं को समझ रहा है। बैठक में नए पे स्ट्रक्चर, भत्ते, सर्विस कंडीशन और सबसे महत्वपूर्ण 'पेंशन' से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है

अपडेटेड May 13, 2026 पर 5:38 PM
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केंद्रीय कर्मचारियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी सैलरी कब बढ़ेगी? वैसे इसके लिए सरकार ने एक समय सीमा तय कर दी है

8th Pay Commission Update: देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर है। 8वें केंद्रीय वेतन आयोग ने अपनी सिफारिशें तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। आज, 13 मई को दिल्ली में 8वें वेतन आयोग की टीम रक्षा मंत्रालय (MoD) और रेल मंत्रालय (MoR) से जुड़े विभिन्न संस्थानों, संगठनों और कर्मचारी यूनियनों के साथ अहम बैठक कर रही है। यह बैठक कल, 14 मई को भी जारी रहेगी।

क्यों अहम है दिल्ली में हो रही यह बैठक?

वेतन आयोग ने अब सीधे तौर पर 'स्टेकहोल्डर्स' यानी कर्मचारियों के प्रतिनिधियों से बातचीत शुरू कर दी है। आयोग डिफेंस फोर्स और रेलवे के प्रतिनिधियों से मिलकर उनकी जमीनी समस्याओं को समझ रहा है। बैठक में नए वेतन ढांचे (Pay Structure), भत्ते (Allowances), सर्विस कंडीशन और सबसे महत्वपूर्ण 'पेंशन' से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है। यह बातचीत ही तय करेगी कि आयोग सरकार को सैलरी बढ़ाने के लिए क्या सुझाव देगा।


कब तक आएगी 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट?

केंद्रीय कर्मचारियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी सैलरी कब बढ़ेगी। इसके लिए सरकार ने एक समय सीमा तय की है। आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। अगर मुख्य रिपोर्ट में देरी होती है, तो कर्मचारियों को राहत देने के लिए आयोग 'इंटरिम रिपोर्ट' भी पेश कर सकता है।

सैलरी बढ़ाने से पहले इन बातों पर होगा विचार

8वें वेतन आयोग द्वारा सैलरी बढ़ाने की सिफारिशें पेश करने से पहले कई महत्वपूर्ण आर्थिक पहलुओं पर गौर किया जाएगा। आयोग केवल कर्मचारियों की मांगों पर ही ध्यान नहीं देगा, बल्कि उसे देश के वित्तीय अनुशासन और विकास कार्यों के लिए उपलब्ध फंड का भी आकलन करना होगा। इसके अलावा वर्तमान और भविष्य में पेंशन के बढ़ते बोझ, सरकारी व प्राइवेट सेक्टर के वेतन के बीच संतुलन और इन सिफारिशों का राज्य सरकारों के खजाने पर पड़ने वाले सीधे असर को भी गहराई से परखा जाएगा, ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

कितना हो सकता है न्यूनतम बेसिक पे?

8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम वेतन को वर्तमान ₹18,000 से सीधे ₹65,000 करने की ऐतिहासिक मांग रखी है। महाराष्ट्र के पेंशनर्स और कर्मचारी निकायों का तर्क है कि 'एकरायड फॉर्मूले' (Aykroyd Formula) और बढ़ती महंगाई के आधार पर एक औसत परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए अब बेसिक पे में यह भारी बढ़ोतरी अनिवार्य हो गई है। संगठनों का कहना है कि वर्तमान वेतन ढांचा मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में कर्मचारियों के लिए नाकाफी साबित हो रहा है।

फिटमेंट फैक्टर को लेकर क्या है चर्चा

इस बार के वेतन आयोग के सामने फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.8 करने का प्रस्ताव भी दिया गया है। कर्मचारी प्रतिनिधियों का मानना है कि 3.8 का फिटमेंट फैक्टर लागू करने से न केवल कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों में सार्थक सुधार होगा, बल्कि यह सरकारी खजाने और कर्मचारियों की क्रय शक्ति के बीच एक उचित संतुलन भी बनाए रखेगा। 8वें वेतन आयोग की दिल्ली में चल रही बैठकों के बीच इन मांगों ने देशभर के लाखों सरकारी कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।

महंगाई भत्ते (DA) में न्यूनतम 4% की वृद्धि की मांग

महाराष्ट्र पेंशन बॉडी का तर्क है कि वर्तमान महंगाई भत्ता प्रणाली वास्तविक मुद्रास्फीति के साथ तालमेल बिठाने में अक्सर पीछे रह जाती है। संगठनों ने मांग की है कि प्रत्येक छमाही संशोधन में महंगाई भत्ते में न्यूनतम 4% की वृद्धि सुनिश्चित की जानी चाहिए। इससे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई के झटकों से स्थाई सुरक्षा मिल सकेगी और उनकी क्रय शक्ति प्रभावित नहीं होगी।

50% होते ही बेसिक पे में मर्ज हो DA

संगठनों ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार का सुझाव देते हुए कहा है कि जैसे ही महंगाई भत्ता (DA) 50% के आंकड़े पर पहुंचता है, उसे स्वचालित रूप से मूल वेतन में मिला दिया जाना चाहिए। इस मर्जर से कर्मचारियों की बेसिक सैलरी बढ़ जाएगी, जिसका सीधा सकारात्मक असर उनके अन्य भत्तों और भविष्य की पेंशन गणना पर पड़ेगा।

सालाना इंक्रीमेंट 3% से बढ़ाकर 5% करने का प्रस्ताव

वेतन वृद्धि को लेकर एक और बड़ी मांग वार्षिक वेतन वृद्धि की दर को लेकर है। वर्तमान में यह दर 3% है, जिसे बढ़ाकर 5% करने का आग्रह किया गया है। साथ ही, यह भी मांग रखी गई है कि संशोधित रिवाइज बेसिक पे की गणना करते समय उसे अगले ₹1000 के राउन्ड ऑफ में बदला जाए, जिससे सैलरी स्ट्रक्चर अधिक सरल और कर्मचारियों के लिए फायदेमंद हो सके।

HRA की दरों में संशोधन और नई कैटेगरी

मकान किराया भत्ते (HRA) को लेकर पेंशन बॉडी ने मांग की है कि इसे महंगाई भत्ते (DA) के साथ लिंक करने की परंपरा खत्म होनी चाहिए। इसके बजाय, X, Y और Z श्रेणी के शहरों के लिए वर्तमान 10%, 20% और 30% की दरों को बढ़ाकर क्रमशः 12%, 24% और 36% करने की मांग की गई है। इससे बड़े शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को महंगे किराए से बड़ी राहत मिल सकेगी।

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