8th Pay Commission: कर्मचारियों को नए वेतन आयोग से पहले ही मिलेगी राहत? सरकार से ये बड़ी मांग कर रहे संगठन

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग की सिफारिश आने में अभी समय है, लेकिन कर्मचारी संगठन अभी से राहत की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि DA को बेसिक सैलरी में जोड़ने से कर्मचारियों को फायदा मिलेगा और सरकार का भविष्य का बकाया बोझ भी कम हो सकता है। जानिए पूरी डिटेल और सरकार का रुख।

अपडेटेड May 26, 2026 पर 5:38 PM
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फिलहाल सरकार ने DA को मूल वेतन में जोड़ने के किसी प्रस्ताव पर सहमति नहीं जताई है।

8th Pay Commission: केंद्र सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Pay Commission) को अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया है। यह आयोग 45 लाख से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 60 लाख पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों की समीक्षा करेगा।

इस बीच कर्मचारी संगठन नई वेतन सिफारिशें लागू होने से पहले अंतरिम राहत (Interim Relief) की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि आयोग की रिपोर्ट आने में अभी काफी समय लगेगा, इसलिए कर्मचारियों को पहले ही कुछ आर्थिक राहत दी जानी चाहिए।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि आयोग की रिपोर्ट जून-जुलाई 2027 तक आ सकती है। ऐसे में तब तक वेतन और पेंशन के बकाये का बोझ काफी बढ़ जाएगा। उनका सुझाव है कि महंगाई भत्ता (DA) अभी से बेसिक सैलरी में जोड़ दिया जाए, ताकि बाद में बकाये का दबाव कम हो सके और कर्मचारियों को तुरंत राहत मिले।


DA को मूल वेतन में जोड़ने की मांग क्यों?

केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 1 जनवरी 2026 से देय है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने का इंतजार करने के बजाय सरकार अभी कुछ राहत दे सकती है।

ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मनजीत सिंह पटेल के मुताबिक, अगर भविष्य में फिटमेंट फैक्टर 2.0 तय होता है, तो सरकार पहले DA को मूल वेतन में मिलाकर 1.5 गुना वेतन संशोधन दे सकती है। बाद में आयोग की अंतिम सिफारिशों के बाद बाकी अंतर का भुगतान किया जा सकता है।

उनका मानना है कि इससे कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई, ईंधन, परिवहन और रोजमर्रा के खर्चों से राहत मिलेगी। साथ ही सरकार पर एकमुश्त बकाये का बोझ भी कम होगा। पटेल का कहना है कि DA को मूल वेतन में मिलाने के बाद मकान किराया भत्ता (HRA) और परिवहन भत्ते जैसे अन्य भत्तों में भी जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं।

सरकार का क्या कहना है?

फिलहाल सरकार ने DA को मूल वेतन में जोड़ने के किसी प्रस्ताव पर सहमति नहीं जताई है। वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने दिसंबर 2025 में लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए कहा था कि सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है कि महंगाई भत्ते को मूल वेतन में मिला दिया जाए।

श्रम एवं रोजगार मामलों के विशेषज्ञ रोहिताश्व सिन्हा का भी मानना है कि केंद्र सरकार अंतरिम राहत जैसे किसी फैसले पर काफी सावधानी से विचार करेगी।

अभी क्या कर रहा है 8वां वेतन आयोग?

सरकार करीब सात महीने पहले ही 8वें वेतन आयोग के टर्म ऑफ रेफरेंस को मंजूरी दे चुकी है। इस समय आयोग अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा कर रहा है। आयोग कर्मचारी संगठनों से मुलाकात कर उनकी मांगों और सुझावों से जुड़े ज्ञापन ले रहा है, ताकि अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा सके।

बकाये का बोझ क्यों बढ़ सकता है?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू मानी जाएंगी। ऐसे में जब भी नया वेतनमान लागू होगा, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को पिछली तारीख से वेतन और पेंशन का अंतर देना पड़ेगा।

रोहिताश्व सिन्हा के मुताबिक नए वेतनमान लागू होने और पुराने DA को मूल वेतन में जोड़ने से सरकार पर बड़ा वित्तीय बोझ पड़ सकता है।

किन-किन मदों में देना पड़ सकता है बकाया?

सरकार को सबसे पहले नए फिटमेंट फैक्टर के आधार पर बढ़े हुए मूल वेतन का बकाया देना पड़ सकता है। इसके अलावा पिछले महीनों का महंगाई भत्ता भी नए सैलरी स्ट्रक्चर में शामिल होगा। वेतन बढ़ने के साथ मकान किराया भत्ता (HRA) का भुगतान भी बढ़ सकता है, क्योंकि यह मूल वेतन और शहर की श्रेणी से जुड़ा होता है।

परिवहन भत्ते में संशोधन होने पर उसका बकाया भी देना पड़ सकता है। वहीं रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन में बदलाव होने पर उन्हें भी लागू तारीख से बकाया रकम मिल सकती है।

7वें वेतन आयोग में कितना बढ़ा था खर्च?

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 में 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर केंद्र सरकार पर करीब 1.02 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा था। इसके अलावा 2015-16 के दो महीनों के वेतन और पेंशन बकाये के रूप में करीब 12,133 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया गया था।

इसी वजह से कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि अगर कुछ राहत पहले ही दे दी जाए, तो भविष्य में सरकार पर बकाये का दबाव कम हो सकता है। हालांकि फिलहाल सरकार की ओर से इस दिशा में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

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