8th Pay Commission: केंद्र सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन, भत्तों आदि को लेकर चर्चा करने का काम शुरू कर चुका है। वित्त मंत्रालय ने कर्मचारियों, पेंशनरों, कर्मचारी संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। इसके लिए एक आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल शुरू हो चुका है, जहां 30 अप्रैल 2026 तक सुझाव देने हैं। यानी, अब पेंशनर्स और कर्मचारियों के पास सैलरी, भत्तों, पेंशन आदि पर सुझाव देने के लिए करीब 10 दिन का समय बचा है।
1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स को है इंतजार
8वें वेतन आयोग की सिफारिशों से देश के करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और लगभग 69 लाख पेंशनर्स पर असर पड़ेगा। सरकार ने 3 नवंबर 2025 को आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस जारी किए थे। आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। रिपोर्ट आने और सरकार की मंजूरी के बाद ही वेतन और पेंशन में बदलाव लागू होगा।
केंद्र सरकार समय-समय पर वेतन आयोग बनाती है। इसका काम सरकारी कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर की समीक्षा करना होता है। आयोग महंगाई, आर्थिक स्थिति और सरकार की वित्तीय क्षमता को ध्यान में रखते हुए सैलरी और भत्तों में बदलाव की सिफारिश करता है। भारत में पहला वेतन आयोग 1946 में बनाया गया था। तब से अब तक 7 वेतन आयोग लागू हो चुके हैं।
7वें वेतन आयोग में क्या हुआ था?
7वां वेतन आयोग 2016 में लागू किया गया था। इसके तहत केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये प्रति मंथली तय की गई थी। वहीं, अधिकतम बेसिक सैलरी 2.5 लाख रुपये प्रति मंथली रखी गई थी।
समय के साथ कितनी बढ़ी कर्मचारियों की सैलरी
पहला वेतन आयोग (1946-47): न्यूनतम सैलरी 55 रुपये, अधिकतम 2,000 रुपये।
दूसरा वेतन आयोग (1957-59): न्यूनतम 80 रुपये, अधिकतम 3,000 रुपये।
तीसरा वेतन आयोग (1972-73): न्यूनतम 196 रुपये, अधिकतम 3,500 रुपये।
चौथा वेतन आयोग (1986): न्यूनतम 750 रुपये, अधिकतम 8,000 रुपये।
पांचवां वेतन आयोग (1996): न्यूनतम 2,550 रुपये, अधिकतम 26,000 रुपये।
छठा वेतन आयोग (2006): न्यूनतम 7,000 रुपये, अधिकतम 80,000 रुपये।
सातवां वेतन आयोग (2016): न्यूनतम 18,000 रुपये, अधिकतम 2.5 लाख रुपये।
वेतन आयोग हर 10 साल में बनाया जाता है, ताकि सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और भत्ते महंगाई और आर्थिक हालात के हिसाब से अपडेट किए जा सकें। फिलहाल आयोग अलग-अलग राज्यों में बैठकें कर रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की राय ली जा सके। ऐसे में अगर आप भी इस प्रोसेस का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो 30 अप्रैल से पहले अपने सुझाव जरूर भेज दें।