8th Pay Commission: कर्मचारियों की हर मांग मानने के मूड में नहीं सरकार? फिटमेंट फैक्टर पर बढ़ी चिंता

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और आयोग के बीच लगातार बातचीत चल रही है। लाखों कर्मचारी और पेंशनर्स नई सैलरी और फिटमेंट फैक्टर को लेकर बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं। लेकिन ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि सरकार कर्मचारियों की सभी मांगें मानने के पक्ष में नहीं है

अपडेटेड May 28, 2026 पर 12:20 PM
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कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग फिटमेंट फैक्टर को 3.83 तक बढ़ाने की है।

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और आयोग के बीच लगातार बातचीत चल रही है। लाखों कर्मचारी और पेंशनर्स नई सैलरी और फिटमेंट फैक्टर को लेकर बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं। लेकिन अब सामने आ रही रिपोर्ट्स से संकेत मिल रहे हैं कि सरकार कर्मचारियों की सभी मांगें मानने के पक्ष में नहीं दिख रही।

हाल के दिनों में कर्मचारी यूनियनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने कई सुझाव रखे हैं। इनमें सबसे बड़ी मांग फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने और महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक सैलरी में जोड़ने की है। हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूनियन नेताओं को भी अब लगने लगा है कि सरकार सभी मांगों को पूरी तरह स्वीकार नहीं करेगी।

आखिर क्या है कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग?


कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग फिटमेंट फैक्टर को 3.83 तक बढ़ाने की है। यूनियनों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत के कारण कर्मचारियों की खरीदने की क्षमता कम हुई है। ऐसे में सैलरी में बड़ा सुधार जरूरी है। अगर फिटमेंट फैक्टर ज्यादा बढ़ता है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में भी बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है।

क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?

फिटमेंट फैक्टर एक ऐसा फॉर्मूला है जिसके जरिए पुरानी बेसिक सैलरी को नई सैलरी में बदला जाता है।

मौजूदा बेसिक पे × फिटमेंट फैक्टर = नई बेसिक सैलरी

उदाहरण के तौर पर 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था। इससे कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हो गई थी।

यानी

7,000 × 2.57 = 18,000 रुपये

इसी वजह से 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है।

क्या सरकार मान लेगी पूरी मांग?

रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार 3.83 वाले फिटमेंट फैक्टर को पूरी तरह मंजूरी देने से बच सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह सरकारी खर्च का बढ़ना माना जा रहा है। अगर केंद्र सरकार कर्मचारियों की सैलरी में बहुत बड़ा इजाफा करती है, तो राज्यों पर भी वेतन बढ़ाने का दबाव आएगा। इससे पेंशन और रिटायरमेंट खर्च में भी लंबे समय तक भारी बोझ बढ़ सकता है। इसी कारण माना जा रहा है कि सरकार बहुत बड़ा फैसला लेने के बजाय बैलेंस और मध्यम रास्ता चुन सकती है।

8वां वेतन आयोग क्यों है इतना अहम?

8वें वेतन आयोग का असर करीब 1.1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके परिवारों पर पड़ने वाला है। केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को इस आयोग का गठन किया था। भारत में अब तक कुल 7 वेतन आयोग लागू हो चुके हैं और आमतौर पर हर 10 साल में नया वेतन आयोग बनाया जाता है।

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