8th Pay Commission: सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी खुशखबरी! NC-JCM बैठक में इन 5 बड़े मुद्दों पर बनी सहमति

8th Pay Commission Update: मौजूदा नियमों के मुताबिक, किसी कर्मचारी या पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद उसके जीवनसाथी या बच्चों को मिलने वाली फैमिली पेंशन, कर्मचारी की आखिरी सैलरी के 50% से घटकर सिर्फ 30% रह जाती है। यूनियनों ने मांग की है कि आश्रितों की इस फुल पेंशन को 30% तक कम न किया जाए

अपडेटेड May 21, 2026 पर 12:19 PM
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सरकार ने पेंशन बढ़ोतरी से लेकर OPS के दायरे को बढ़ाने जैसी कई अहम मांगों पर पॉजिटिव रिस्पांस दिया है

8th Pay Commission Update: 8वें वेतन आयोग के गठन के बीच देश के करीब 65 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। पिछले हफ्ते राजधानी दिल्ली में हुई नेशनल काउंसिल ऑफ द जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की 49वीं वार्षिक बैठक में पेंशन से जुड़े कई गंभीर और पुराने मुद्दों पर सरकार के साथ पॉजिटिव बातचीत हुई है। इस हाई-लेवल बैठक में कर्मचारी संगठनों की अगुवाई में उठाए गए पेंशनर्स के मुद्दों पर खुद कैबिनेट सेक्रेटरी टी. वी. सोमनाथन ने बड़ा भरोसा दिया है।

जेसीएम स्टाफ साइड द्वारा अपने सदस्यों को जारी किए गए आधिकारिक पत्र के मुताबिक, सरकार ने पेंशन बढ़ोतरी से लेकर पुरानी पेंशन योजना (OPS) के दायरे को बढ़ाने जैसी कई अहम मांगों को 8वें वेतन आयोग के पास भेजने और कुछ नियमों को तुरंत बदलने के निर्देश दिए हैं। आइए आसान भाषा में बताते हैं बैठक में तय हुए वो 5 बड़े मुद्दे जो सीधे आपकी जेब से जुड़े हैं।

1. हर 5 साल में बढ़ेगी पेंशन


कर्मचारी यूनियनों का तर्क है कि फिलहाल 10 साल में एक बार वेतन आयोग आने पर ही पेंशन का रिवीजन होता है। इससे बुजुर्ग पेंशनभोगियों के लिए बढ़ती महंगाई का मुकाबला करना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसलिए संसदीय स्थायी समिति की सिफारिश के आधार पर हर 5 साल में पेंशन बढ़नी चाहिए।

इस मांग पर कैबिनेट सेक्रेटरी टी. वी. सोमनाथन ने जेसीएम को भरोसा दिया है कि हर 5 साल में पेंशन संशोधन की इस महत्वपूर्ण मांग को औपचारिक रूप से 8वें वेतन आयोग के पास विचार के लिए भेजा जाएगा।

2. आश्रितों की फैमिली पेंशन 30% तक न घटाई जाए

मौजूदा नियमों के मुताबिक, किसी कर्मचारी या पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद उसके जीवनसाथी या बच्चों को मिलने वाली फैमिली पेंशन, कर्मचारी की आखिरी सैलरी के 50% से घटकर सिर्फ 30% रह जाती है। यूनियनों ने मांग की है कि आश्रितों की इस फुल पेंशन को 30% तक कम न किया जाए।

सरकार ने इस मुद्दे की संवेदनशीलता को समझा है और कैबिनेट सेक्रेटरी ने इसे भी 8वें वेतन आयोग के पास अंतिम फैसले के लिए भेजने की मंजूरी दे दी है।

3. दिव्यांग बच्चों के लिए 'आय प्रमाण पत्र' की शर्त होगी खत्म

वर्तमान में दिवंगत कर्मचारी के शारीरिक रूप से दिव्यांग या विकलांग बच्चों को फैमिली पेंशन का लाभ लेने के लिए मेडिकल बोर्ड या नागरिक अधिकारियों से 'नो इनकम सर्टिफिकेट' देना पड़ता है। यूनियनों का कहना है कि संबंधित अथॉरिटी ऐसा सर्टिफिकेट जारी ही नहीं करतीं, जिससे बच्चे भटकते रहते हैं।

कैबिनेट सेक्रेटरी ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए पेंशन विभाग को निर्देश दिया है कि इस मामले की तुरंत जांच की जाए और व्यावहारिक एवं तार्किक फैसला लेते हुए इस शर्त को जल्द से जल्द हटाया जाए।

4. 22 दिसंबर 2003 या उसके बाद भर्ती हुए इन कर्मचारियों को मिलेगी पुरानी पेंशन

22 दिसंबर 2003 को एनपीएस (NPS) की अधिसूचना जारी होने के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का लाभ नहीं मिलता। लेकिन जेसीएम ने दो विशेष श्रेणियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) लागू करने की मांग की, जिस पर बड़ा फैसला हुआ है:

(i) 22 दिसंबर 2003 से पहले जारी वैकेंसी: जो भर्तियां 22 दिसंबर 2003 से पहले स्वीकृत या विज्ञापित हो चुकी थीं, लेकिन जॉइनिंग बाद में हुई, उन्हें ओपीएस में शामिल किया जाए। इस पर कैबिनेट सेक्रेटरी ने स्टाफ साइड से एक विस्तृत नोट मांगा है।

(ii) अनुकंपा नियुक्ति: अगर किसी उम्मीदवार ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए 22 दिसंबर 2003 से पहले आवेदन किया था, और उसकी योग्यता पूरी थी, लेकिन नौकरी 1 जनवरी 2004 के बाद मिली है, तो उसे पुरानी पेंशन (OPS) का हकदार माना जाएगा। पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग के सचिव ने इस मांग को एक हफ्ते के भीतर लागू करने पर सहमति दे दी है।

5. विधवा बहू को भी मिलेगा 'फैमिली पेंशन' का हक

कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि सरकारी नियमों में 'परिवार' की परिभाषा में बदलाव किया जाए, ताकि दिवंगत कर्मचारी पर आश्रित उसकी विधवा बहू को भी फैमिली पेंशन के दायरे में लाकर वित्तीय सुरक्षा दी जा सके।

कैबिनेट सेक्रेटरी ने इस मुद्दे पर पॉजिटिव रुख दिखाते हुए कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DOP&T) को कानून मंत्रालय के साथ परामर्श करके इस नियम में संशोधन की संभावना तलाशने का जिम्मा सौंपा है।

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