8th Pay Commission: अब 3 की जगह 5 सदस्यों के आधार पर तय होगी सैलरी? ₹69,000 तक बढ़ सकता है न्यूनतम वेतन

8th Pay Commission: नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने आठवें वेतन आयोग को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव दिया है। संगठन का कहना है कि आठवां केंद्रीय वेतन आयोग 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू करे, ताकि देशभर के 45 लाख से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 60 लाख पेंशनधारकों की बेसिक सैलरी तय की जा सके। NC-JCM, केंद्र सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत की व्यवस्था संभालता है

अपडेटेड Apr 16, 2026 पर 3:37 PM
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8th Pay Commission: NC-JCM ने सैलरी स्ट्रक्चर को सरल बनाने के लिए पे स्केल के मर्जर का भी सुझाव दिया है

8th Pay Commission: नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने आठवें वेतन आयोग को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव दिया है। संगठन का कहना है कि आठवां केंद्रीय वेतन आयोग 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू करे, ताकि देशभर के 45 लाख से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 60 लाख पेंशनधारकों की बेसिक सैलरी तय की जा सके। NC-JCM, केंद्र सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत की व्यवस्था संभालता है।

संगठन ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि नए फिटमेंट फैक्टर के आधार पर न्यूनतम वेतन 69,000 रुपये तय किया जाना चाहिए। इस प्रस्ताव में सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव, पे स्केल मर्जर और सालाना सैलरी इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% करने जैसे बदलाव शामिल किए हैं।

इस कैलकुलेशन में रोजमर्रा के खर्चों को भी शामिल किया गया है। जैसे कि खाने-पीने की चीजों की औसत कीमत, कपड़ों का खर्च, घर का खर्च (7.5%), ईंधन (20%), बिजली और पानी के बिल, स्किल डेवलपमेंट (25%), और शादी, मनोरंजन व त्योहारों से जुड़े अतिरिक्त खर्च (25%)। यह प्रस्ताव 13 अप्रैल को ड्राफ्टिंग कमेटी की अंतिम बैठक में सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया, जहां आठ प्रमुख विषयों पर एक विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा गया।


परिवार को 5 यूनिट मानने की मांग

अभी सरकार परिवार को 3 यूनिट मानकर सैलरी तय करती है, लेकिन संगठन का कहना है कि यह सही नहीं है। NC-JCM की मांग है कि परिवार को 5 यूनिट माना जाए। इसमें कर्मचारी और उसके जीवनसाथी को 1-1 यूनिट, दो बच्चों को 0.8-0.8 यूनिट और माता-पिता को 0.8 यूनिट गिना जाए। इस तरह कुल 5.2 यूनिट बनती हैं, जिसे राउंड ऑफ कर 5 यूनिट माना जाए। ऐसा NC-JCM ने प्रस्ताव रखा है।

कर्मचारी संगठनों ने इसके पीछे कानूनी आधार भी दिया है। उनका कहना है कि मेंटीनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पैरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट और सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत परिवार की परिभाषा में आश्रित माता-पिता शामिल होते हैं। साथ ही, महिला कर्मचारी अपने सास-ससुर को भी परिवार का हिस्सा मान सकती हैं।

इस हिसाब से कर्मचारियों ने सुझाव दिया है कि 5 यूनिट वाले परिवार के लिए न्यूनतम सैलरी 69,000 रुपये होनी चाहिए। इसके आधार पर मौजूदा कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए फिटमेंट फैक्टर 3.833 रखने की बात कही गई है।

पे स्केल मर्जर का प्रस्ताव

NC-JCM ने सैलरी स्ट्रक्चर को सरल बनाने के लिए पे स्केल के मर्जर का भी सुझाव दिया है, जिससे अलग-अलग स्तरों पर वेतन में असमानता कम हो सके।

8th CPC Pay Level Merger

3.833 फिटमेंट फैक्टर से सैलरी पर क्या असर होगा?

फिटमेंट फैक्टर एक ऐसा कैलकुलेशन होता है, जिसकी मदद से केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी सभी स्तरों पर एक समान तरीके से बढ़ाई जाती है। अगर आठवां वेतन आयोग 3.833 फिटमेंट फैक्टर और कर्मचारियों के स्तर पर प्रस्तावित मर्जर को मंजूरी देता है, तो कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा इजाफा हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, पे लेवल-1 के कर्मचारी जिनकी अभी बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से 56,000 रुपये के बीच है, उनकी सैलरी बढ़कर करीब 69,000 रुपये तक पहुंच सकती है।

8th CPC Fitment Factor

पहले भी ऐसे बदलाव होते रहे हैं। 2016 में 7वें वेतन आयोग ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू किया था। इसके बाद जिन कर्मचारियों या पेंशनर्स की बेसिक सैलरी 15,000 रुपये थी, उनकी सैलरी बढ़कर 38,550 रुपये (15,000 × 2.57) हो गई थी। फिटमेंट फैक्टर की शुरुआत चौथे वेतन आयोग (1986) के बाद से की गई थी। छठे वेतन आयोग में 1.86 का फैक्टर रखा गया, जबकि पांचवें वेतन आयोग में बेसिक पे पर 40% का लाभ दिया गया था।

प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर का महंगाई भत्ते (DA) पर क्या पड़ेगा असर?

अगर कर्मचारियों की बेसिक सैलरी बढ़ती है, तो उसका सीधा असर महंगाई भत्ते (DA) और पेंशनधारकों के महंगाई राहत (DR) पर भी पड़ता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि DA और DR की गणना हमेशा बेसिक सैलरी के एक प्रतिशत के रूप में की जाती है। सरकार ने अभी तक जनवरी से लागू होने वाला DA संशोधन घोषित नहीं किया है। इससे पहले जुलाई 2025 में DA को 54% से बढ़ाकर 58% किया गया था।

DA का कैलकुलेशन ऑल-इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPI-IW) के आधार पर की जाती है, जिसे श्रम और रोजगार मंत्रालय जारी करता है।

कर्मचारी संगठनों ने यह भी सुझाव दिया है कि 12 महीने के औसत की जगह 6 महीने के औसत के आधार पर DA तय किया जाए, क्योंकि इसका भुगतान हर छह महीने में होता है।

इसके अलावा उनकी मांग है कि DA की गणना “पॉइंट टू पॉइंट” तरीके से हो, यानी दशमलव को राउंड ऑफ न किया जाए। यानी अगर किसी कर्मचारी को 55.45% DA बनता है, तो उसे सिर्फ 55% नहीं बल्कि पूरा 55.45% ही दिया जाए। संगठन ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि जब DA/DR 25% से ज्यादा हो जाए, तो उसे बेसिक पे या बेसिक पेंशन में जोड़ दिया जाए।

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