'AI से होने वाले मुनाफे पर लगे बड़ा टैक्स', नौकरियों पर भारी खतरे के बीच एक्सपर्ट का सरकार को सुझाव

AI Windfall Tax: AI से बड़े पैमाने पर नौकरी पर खतरे के बीच अलाप शाह ने सरकारों को AI विंडफॉल टैक्स पर विचार करने की सलाह दी है। IMF ने भी लेबर मार्केट पर सुनामी जैसा असर बताया। सवाल है, क्या मुनाफे पर टैक्स से रोजगार झटका संभलेगा? जानिए डिटेल।

अपडेटेड Feb 25, 2026 पर 4:57 PM
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सरकारों को AI अपनाने से होने वाले अतिरिक्त या असाधारण मुनाफे पर टैक्स लगाने पर विचार करना चाहिए।

AI Windfall Tax: Citrini Research की वायरल रिपोर्ट के सह-लेखक अलाप शाह (Alap Shah) ने सरकारों से अपील की है कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर टैक्स लगाने पर विचार करें। उनका कहना है कि AI के कारण बड़े पैमाने पर नौकरी जाने का असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, इसलिए पहले से तैयारी जरूरी है।

अलाप की यह टिप्पणी उस वायरल रिसर्च नोट के बाद आई, जिसमें AI से जुड़ी संभावित उथल-पुथल की बात कही गई थी। इसके बाद डिलीवरी, पेमेंट और सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयरों में तेज बिकवाली देखी गई।

अलाप शाह ने AI पर क्या कहा?


Bloomberg TV से बातचीत में Lotus Technology Management के CIO शाह ने कहा कि AI की रफ्तार बड़ी तेज है। यह तेजी लेबर मार्केट और अमेरिका जैसी उपभोक्ता आधारित अर्थव्यवस्थाओं को झटका दे सकती है। उन्होंने कहा, 'जितना ज्यादा AI स्मार्ट होगा, उतनी ज्यादा नौकरियां वह बदल सकता है।'

IMF की भी चेतावनी

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की मैनेजिंग डायरेक्टर Kristalina Georgieva ने भी AI के असर को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि AI लेबर मार्केट पर सुनामी की तरह असर डाल रही है। जो नई नौकरियां पैदा भी होंगी, वो अमूमन कम सैलरी वाली होंगी। मिड-लेवल की नौकरियों पर दबाव बढ़ेगा। एंट्री लेवल जॉब भी कम हो सकती है।

IMF का अनुमान है कि दुनिया भर में 40 प्रतिशत नौकरियां और विकसित देशों में 60 प्रतिशत नौकरियां AI से प्रभावित होंगी। इनमें कुछ नौकरियां ज्यादा उत्पादक बनेंगी, कुछ बदलेंगी और कुछ खत्म भी हो सकती हैं। IMF ने सरकारों से कहा कि वे जोखिम को संभालें और जिन लोगों की नौकरी जाएगी, उनके लिए मजबूत सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था बनाएं।

AI टैक्स की मांग क्यों उठी?

अलाप शाह का कहना है कि सरकारों को AI अपनाने से होने वाले अतिरिक्त या असाधारण मुनाफे पर टैक्स लगाने पर विचार करना चाहिए। उनकी दलील है कि अगर कंपनियां कर्मचारियों की जगह AI का इस्तेमाल करके लागत घटाती हैं, तो इससे उपभोक्ता खर्च घट सकता है।

अमेरिका जैसी अर्थव्यवस्थाओं में उपभोक्ता खर्च GDP का बड़ा हिस्सा है, इसलिए रोजगार में गिरावट का असर पूरे सिस्टम पर पड़ सकता है। उन्होंने साफ किया कि यह तकनीक पर टैक्स लगाने की बात नहीं है। प्रस्ताव यह है कि AI से होने वाले अतिरिक्त कॉरपोरेट मुनाफे का कुछ हिस्सा वापस अर्थव्यवस्था में लाया जाए, ताकि नौकरी गंवाने वालों की आय का सहारा बन सके।

नौकरियों पर कितना असर पड़ेगा?

Citrini रिपोर्ट में एक ऐसा परिदृश्य बताया गया है, जिसमें AI तेजी से प्रोडक्टविटी बढ़ाएगी, लेकिन बड़ी संख्या में व्हाइट कॉलर नौकरियां खत्म हो सकती हैं। शाह के मुताबिक अगले 18 महीनों में करीब 5 प्रतिशत व्हाइट कॉलर कर्मचारियों की छंटनी होने की आशंका है।

चिंता सिर्फ नौकरी जाने तक सीमित नहीं है। कंपनियां पहले कर्मचारियों को हटाकर लागत बचाएंगी, फिर बचत को AI में निवेश करेंगी, जिससे और ऑटोमेशन बढ़ेगा। इससे कुल उपभोक्ता मांग कमजोर हो सकती है। इसका असर फाइनेंस, इंश्योरेंस और सॉफ्टवेयर जैसे सेक्टर पर पड़ सकता है।

बाजार में किसे फायदा, किसे नुकसान?

Citrini की चेतावनी के बाद बाजार में सेक्टर के भीतर साफ बंटवारा दिखा। डिलीवरी प्लेटफॉर्म, पेमेंट कंपनियां और कुछ सॉफ्टवेयर शेयरों में दबाव आया। शाह का कहना है कि सेमीकंडक्टर कंपनियां, डेटा सेंटर और AI मॉडल बनाने वाली कंपनियां फायदा उठा सकती हैं। दूसरी ओर बैंक, बीमा और कंज्यूमर प्लेटफॉर्म जैसे सेक्टर जोखिम में हैं।

उन्होंने बताया कि उनकी रणनीति में ऐसे बिजनेस पर शॉर्ट पोजिशन है जो AI से प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, सेमीकंडक्टर कंपनियों में निवेश बढ़ाया गया है।

भारत की स्थिति क्या है?

HCL Technologies के पूर्व CEO Vineet Nayar ने AI India Summit में कहा कि यह मान लेना गलत होगा कि AI अपने आप नौकरियां पैदा करेगी, खासकर भारत के IT सेक्टर में। उनके मुताबिक भारतीय कंपनियां मुनाफा केंद्रित होंगी। अगर रोजगार बनना है तो वह बड़े पैमाने पर स्टार्टअप्स और आंत्रप्रेन्योरशिप से आएगा।

उन्होंने यह भी चिंता जताई कि भारत के पास अपने बड़े वर्ल्ड क्लास AI मॉडल नहीं हैं। अगर ग्लोबल AI मॉडल भारतीय डेटा का इस्तेमाल करते हैं, तो यह रणनीतिक जोखिम हो सकता है।

सरकारों के सामने बड़ा सवाल

अगर AI उत्पादन बढ़ाती है लेकिन रोजगार घटाती है, तो सरकारों को टैक्स सिस्टम पर फिर से विचार करना पड़ सकता है। शाह का AI विंडफॉल टैक्स प्रस्ताव इसी दिशा में एक सुझाव है। ताकि उत्पादकता से होने वाले अतिरिक्त लाभ का कुछ हिस्सा समाज में लौटाया जा सके।

विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) सरकार किसी सेक्टर पर तब लगाती है, जब उसे अचानक और असामान्य रूप से बहुत ज्यादा मुनाफा हो जाए और वह मुनाफा उसकी अपनी मेहनत से ज्यादा बाहरी हालात की वजह से आया हो। जैसा कि टेक सेक्टर के साथ होने का अनुमान है।

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