'वंदे मातरम् का विरोध कांग्रेस के खून में है...', प्रियंका गांधी के सवालों का अमित शाह ने दिया जवाब

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी की उस टिप्पणी पर जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा, “कुछ लोगों को लगता है कि यह चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि पश्चिम बंगाल में चुनाव आने वाले हैं।” उन्होंने आगे कहा, “लेकिन वंदे मातरम सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं है। आज भी जब हमारे सैनिक सीमा पर शहीद होते हैं, जब हमारे पुलिसकर्मी अपनी जान देते हैं, तो एक ही आवाज सुनाई देती है- वंदे मातरम

अपडेटेड Dec 09, 2025 पर 2:33 PM
अमित शाह ने कहा, “कुछ लोगों को लगता है कि यह चर्चा बंगाल चुनावों की वजह से हो रही है।

राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने के मौके पर लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा हो रही है। वहीं  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राज्यसभा में ‘वंदे मातरम’ पर हुई चर्चा किया। उन्होंने इसके महत्व पर जोर देते हुए प्रियंका गांधी के उस दावे को गलत बताया, जिसमें कहा गया था कि यह बहस पश्चिम बंगाल चुनाव को ध्यान में रखकर की जा रही है। सदन को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा, “कुछ सदस्यों ने पूछा कि आज ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा की क्या जरूरत है। लेकिन इस गीत के प्रति सम्मान और इस पर बातचीत की आवश्यकता पहले भी थी, आज भी है और 2047 में भी रहेगी।”

प्रियंका गांधी के सवालों का अमित शाह ने दिया जवाब

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी की उस टिप्पणी पर जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा, “कुछ लोगों को लगता है कि यह चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि पश्चिम बंगाल में चुनाव आने वाले हैं।” उन्होंने आगे कहा, “लेकिन वंदे मातरम सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं है। आज भी जब हमारे सैनिक सीमा पर शहीद होते हैं, जब हमारे पुलिसकर्मी अपनी जान देते हैं, तो एक ही आवाज सुनाई देती है- वंदे मातरम।”

अमित शाह ने कहा, “कुछ लोगों को लगता है कि यह चर्चा बंगाल चुनावों की वजह से हो रही है। ऐसी बातें कहकर वे हमारे राष्ट्रीय गीत की महिमा को कम करके दिखाना चाहते हैं।” गृह मंत्री ने आगे कहा, “यह सही है कि वंदे मातरम के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय बंगाल से थे और आनंद मठ की कहानी भी वहीं से शुरू हुई थी, लेकिन वंदे मातरम सिर्फ बंगाल या भारत तक सीमित नहीं रहा।”


उन्होंने कहा, “जब सीमा पर कोई सैनिक या देश के भीतर सुरक्षा कर रहा कोई पुलिसकर्मी अपनी जान कुर्बान करता है, तो अंतिम क्षणों में उसके मुख से एक ही नारा निकलता है- वंदे मातरम।” अमित शाह ने देश के इतिहास में इस राष्ट्रीय गीत की ताकत को याद करते हुए कहा, “न तो अंग्रेज ‘वंदे मातरम’ को रोक पाए और न ही वे लोग जो उस समय ब्रिटिश संस्कृति से प्रभावित थे।

पीएम मोदी ने साधा था निशाना

बता दें कि, सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जवाहरलाल नेहरू ने मुहम्मद अली जिन्ना के विरोध के सामने झुककर ‘वंदे मातरम’ के साथ नाइंसाफी की। उनके मुताबिक, इस फैसले से गीत “टुकड़ों में बंट गया” और कांग्रेस ने सांप्रदायिक चिंताओं को बढ़ावा दिया, जिससे देश तुष्टीकरण की राजनीति की ओर बढ़ा। आज सुबह, कांग्रेस ने इतिहासकार सुगत बोस की टिप्पणी का हवाला देकर प्रधानमंत्री के आरोपों का जवाब दिया। बोस के अनुसार, रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर कांग्रेस ने 1937 में यह तय किया था कि राष्ट्रीय बैठकों में ‘वंदे मातरम’ का सिर्फ पहला भाग गाया जाएगा। कांग्रेस ने कहा कि इतिहासकार की ये टिप्पणियाँ प्रधानमंत्री मोदी के दावों को झूठा साबित करती हैं और उन्हें और बेनकाब करती हैं।

कांग्रेस के कम्युनिकेशन प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने X पर एक वीडियो क्लिप साझा की, जिसमें इतिहासकार सुगत बोस सुभाष चंद्र बोस और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के संबंधों के बारे में बात कर रहे हैं। इसके बाद, प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी नेहरू और कांग्रेस का बचाव करते हुए सरकार पर एक तंज भरा, लेकिन संयमित हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह विशेष चर्चा इसलिए करवाई क्योंकि अगले साल पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

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