ऑनलाइन पर्सनल लोन लेना आज बेहद आसान हो गया है। कुछ ही मिनटों में आप अपने PAN, आधार, बैंक स्टेटमेंट और मोबाइल एक्सेस जैसी जानकारियां अपलोड करके लोन अप्रूवल पा सकते हैं। लेकिन असली जोखिम लोन से नहीं, बल्कि इस बात से जुड़ा है कि आपकी संवेदनशील जानकारी आगे कहां और कैसे इस्तेमाल होती है।
डेटा शेयरिंग की प्रक्रिया
- जब आप किसी ऐप या वेबसाइट पर लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो वह प्लेटफॉर्म आपके KYC डॉक्यूमेंट्स, बैंकिंग डिटेल्स और कभी-कभी फोन डेटा तक एक्सेस मांगता है।
- ये जानकारी सिर्फ बैंक या NBFC तक सीमित नहीं रहती, बल्कि कई बार थर्ड-पार्टी वेंडर्स और डेटा एनालिटिक्स कंपनियों तक भी पहुंच सकती है।
- डेटा लीक और साइबर फ्रॉड का खतरा सबसे बड़ा है। अगर प्लेटफॉर्म का सिक्योरिटी सिस्टम कमजोर है, तो आपकी जानकारी गलत हाथों में जा सकती है।
- कई बार कंपनियां आपकी जानकारी का इस्तेमाल मार्केटिंग और टारगेटेड विज्ञापन के लिए करती हैं।
- उपभोक्ता को यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया जाता कि उसकी जानकारी कितने समय तक और किन-किन संस्थाओं के पास रहेगी।
- आवेदन करने से पहले देखें कि प्लेटफॉर्म RBI द्वारा रेगुलेटेड NBFC या बैंक से जुड़ा है या नहीं।
- हमेशा HTTPS सिक्योर वेबसाइट/ऐप का इस्तेमाल करें।
- अनावश्यक परमिशन, जैसे कॉन्टैक्ट्स या फोटो गैलरी तक एक्सेस, देने से बचें।
- प्राइवेसी पॉलिसी पढ़ें और समझें कि आपका डेटा कहाँ इस्तेमाल होगा।
ऑनलाइन पर्सनल लोन ने वित्तीय जरूरतों को पूरा करना आसान बना दिया है, लेकिन इसके साथ डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। उपभोक्ताओं को सुविधा के साथ-साथ सतर्क रहना होगा, ताकि उनकी संवेदनशील जानकारी गलत हाथों में न जाए।