Atal Pension Yojana: मोदी सरकार ने साल 2015 में अटल पेंशन योजना की शुरुआत की थी। इसे APY भी कहते हैं। इस योजना का लाभ लेने के लिए 18 रसाल से लेकर 40 साल के बीच उम्र होना जरूरी है। इसमें आपको एक फिक्स अमाउंट आपको भरना होता है। जिसे 60 साल तक भरना होता है। इसके बाद आपको मासिक पेंशन के रूप मिलती रहेगी। अगर आपने इस पेंशन का लिया और अब आप इस पेंशन स्कीम से बाहर निकलना चाहते हैं तो इस लेख को पूरा पढिए। जिसमें आपको इस स्कीम से बाहर निकलने का रास्ता सुझाया जाएगा।
APY को लॉन्च करते समय इसे बंद करने का कोई सुझाव नहीं था। लेकिन जब लोगों का दवाब बढ़ा तो फिर सरकार को मजबूर होकर इसे बंद करने के लिए नियम बनाना पड़ा। हालांकि अब इस पर ऐसे नियम आसानी से बना दिए गए हैं, जिसे आसान तरीकों के जरिए इसे आप बंद बंद कर सकते हैं। पहले इस य़ोजना को बंद करने के लिए गंभीर बीमारी या मृत्यु होने पर बंद होती थी। बाद में सरकार ने इसमें voluntary exit (स्वैच्छिक निकास) की अनुमति दे दी । इसको बंद करने के लिए आपने जिस बैंक में अटल पेंशन अकाउंट ओपन किया है। उस बैंक से एक फॉर्म लें। इसे सावधानी पूर्वक भरकर जमा कर दें। इस फॉर्म में आप स्वैच्छिक निकास का कारण भी लिख सकते हैं।
बैंक में कुछ दिन में आपके फॉर्म की जांच-पड़ताल करके आपका अकाउंट क्लोज कर दिया जाएगा। साथ ही उस अकाउंट में जमा पैसे आपके अकाउंट में ट्रांसफर हो जाएंगे।
सबसे पहले बैंक ये देखते है कि आपके अकाउंट में कितने पैसे जमा है। साथ ही बैंक यह चेक करेगा कि सरकार ने कितनी सहायता की है। जो सरकार ने सहायता की है और उस पर जितनी इनकम हुई है, वो वापस नहीं की जाएगी। बैंक ये भी चेक करता है कि आपके अकाउंट के रखरखाव में कितना खर्च आया है। उस खर्च को आपके अकाउंट से काट लिया जाएगा। इस कटौती के बाद आपके बचा हुआ फंड आपके सेविंग अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
यदि किसी गंभीर बीमारी या मृत्य होने पर APY को बंद करना चाहते हैं तो कुछ भी कटौती नहीं की जाती। इनकम के साथ-साथ सब्सक्राइबर और गर्वनमेंट के योगदान दोनों को वापस कर दिया जाता है।
अगर आप APY में नियमित रूप से योगदान नहीं दे पाते हैं। तो इसे बंद नहीं करना चाहिए। बल्कि आप अपने योगदान को रोक सकते हैं। APY में योगदान रोक देने से आपका अकाउंट कभी भी डिएक्टीवेट नहीं होगा। बाद में 1 रुपये जुर्माना भरकर हर बार 100 रुपये का योगदान करके इसे चालू रख सकते हैं।