रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए बैंक एफडी अच्छा विकल्प नहीं है, जानिए इसकी वजह

बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट को काफी सुरक्षित माना जाता है। इसमें हर साल आपको अपने पैसे पर इंटरेस्ट भी मिलता है। लेकिन, जब आप इनफ्लेशन के साथ एफडी के रिटर्न को एडजस्ट करते हैं तो पता चलता है कि आपके पैसे की वैल्यू नाममात्र की बढ़ी है। इनफ्लेशन रेट ज्यादा होने पर पैसे की वैल्यू घटने का डर होता है

अपडेटेड Mar 22, 2024 पर 5:52 PM
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इनफ्लेशन वह रेट है, जिस रेट से चीजों और सेवाओं की कीमतें बढ़ती हैं। यह चीजें या सेवाएं खरीदने की पैसे की ताकत को कम कर देता है।

बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (Bank FD) लंबे समय से सेविंग्स का बड़ा जरिया रहा है। खासकर सीनियर सिटीजंस के बीच इसकी लोकप्रियता ज्यादा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि एफडी में रखा पैसा काफी ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। साथ ही इस पर हर साल इंटरेस्ट मिलता है। अचानक पैसे की जरूरत पड़ने पर बैंक एफडी को ब्रेक किया जा सकता है। लेकिन, एक चीज जो बैंक एफडी का आकर्षण खत्म कर देती है वह है इनफ्लेशन।

इनफ्लेशन का असर

इनफ्लेशन वह रेट है, जिस रेट से चीजों और सेवाओं की कीमतें बढ़ती हैं। यह चीजें या सेवाएं खरीदने की पैसे की ताकत को कम कर देता है। आसान शब्दों में इसे एक उदाहरण की मदद से समझा जा सकता है। आज आप जिस चीज को 100 रुपये में खरीद सकते हैं, उसे कुछ साल बाद खरीदने के लिए आपको ज्यादा पैसे की जरूत पड़ेगी।


पैसे की वैल्यू घट जाती है

बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा तो सुरक्षित रहता है, लेकिन इस पर मिलने वाला रिटर्न कम होने से इसका रियल रिटर्न कई बार निगेटिव हो जाता है। इसका मतलब है कि पैसे को इनफ्लेशन के साथ एडजस्ट करने के बाद आप पाएंगे कि समय के साथ एफडी में रखे पैसे की वैल्यू बढ़ी नहीं है। मान लीजिए आप बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में 1 करोड़ रुपये रखते हैं। इस पर आपको सालाना छह फीसदी इंटरेस्ट मिलता है। देखने में यह अट्रैक्टिव लगता है लेकिन जब आप इनफ्लेशन के सालाना 5 फीसदी रेट के साथ इसे एडजस्ट करते हैं तो तस्वीर बदल जाती है।

टैक्स की वजह से रिटर्न और कम हो जाता है

पहले साल में एफडी में रखा आपका पैसा बढ़कर 1.06 लाख हो जाता है। लेकिन, इनफ्लेशन से एडजस्ट करने के बाद उसकी रियल वैल्यू सिर्फ 1.01 करोड़ आती है। 10वें साल इनफ्लेशन से एडजस्ट किए बगैर आपका पैसा बढ़कर 1.79 करोड़ हो जाता है। लेकिन, इनफ्लेशन से एडजस्ट करने के बाद इसकी वैल्यू सिर्फ 1.10 करोड़ होती है। इसलिए एफडी की अवधि लंबी होने के बावजूद, आपकी पैसे की वैल्यू उतनी नहीं बढ़ेगी। साथ ही यह ध्यान में रखने की जरूरत है कि एफडी से मिलने वाले इंटरेस्ट पर टैक्स लगता है।

निवेश के दूसरे विकल्प पर करें विचार

इसलिए रिटायरमेंट के लिए सेविंग्स करने के लिए एफडी में पैसे रखना होशियारी नहीं है। इसकी जगह पीपीएफ, ईएलएसएस, म्यूचुअल फंड्स की स्कीम आदि का इस्तेमाल लंबी अवधि के निवेश के लिए कर सकते हैं। फाइनेंशियल मार्केट तेजी से विकसित हो रहा है। सरकार भी ज्यादा रिटर्न वाले प्रोडक्ट्स को बढ़ावा दे रही है। इसी सोच के साथ सरकार ने एनपीएस की शुरुआत की है। इसमें निवेश करने के लिए सरकारी या प्राइवेट नौकरी होना जरूरी नहीं है।

फाइनेंशियल एडवाइजर की ले सकते हैं मदद

अगर आपको इस बार में मदद चाहिए तो फाइनेंशियल एडवाजर की मदद ले सकते हैं। वह थोड़ी फीस लेकर आपको सही सलाह दे सकता है। वह आपकी जरूरत को ध्यान में रख आपके लिए रिटायरमेंट प्लान तैयार कर सकता है। इससे लंबी अवधि में आपके लिए अच्छा फंड तैयार हो सकता है।

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