बैंक लॉकर के ग्राहक चाबी को संभाल कर रखते हैं। इसके बावजूद लॉकर की चाबी गुम होने के मामले बैंक में आते रहते हैं। लॉकर के लॉक को तोड़ने की प्रक्रिया काफी जटिल है। इसमें समय भी काफी लगता है। इसमें पेपरवर्क, वेरिफिकेशन, कॉस्ट और कुछ मामलों में ब्रांच में लंबा इंतजार शामिल होता है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
लॉकर एक्सेस करने के लिए डुअल सिस्टम का इस्तेमाल
बैंक लॉकर के लिए डुअल-कंट्रोल सिस्टम का पालन करते हैं। इसका मतलब है कि लॉकर को ओपन करने के लिए बैंक के मास्टर मैकेनिज्म के साथ ग्राहक की चाबी जरूरी है। बैंक के पास लॉकर की डुप्लीकेट चाबी नहीं होती है। इसका मतलब है कि अगर ग्राहक से लॉकर की चाबी गुम हो जाती है तो लॉकर को ऑपरेट नहीं किया जा सकता।
बैंक चाबी गुम होने की लिखिति जानकारी मांग सकता है
एक्सपर्ट्स का कहना है कि लॉकर की चाबी गुम होने की जानकारी मिलते ही ग्राहक को बैंक की ब्रांच को इस बारे में बताना चाहिए। ज्यादातर बैंक इस बारे में लिखित में जानकारी मांगते हैं। ग्राहक को इंडेमनिटी सब्मिट करने या पुलिस में शिकायत करने को भी कहा जा सकता है। ऐसा खासकर तब जरूरी होता है जब लॉकर की सिक्योरिटी को लेकर कोई रिस्क होता है।
बैंक लॉकर के लॉक को तोड़ने का समय तय करता है
आरबीआई के मास्टर डायरेक्शन के तहत, ग्राहक के पास 'ब्रेक ओपन प्रोसिजर' का वैधानिक अधिकार होता है। बी शंकर एडवोकेट्स की प्रिंसिपल एसोसिएट प्रेरणा रॉबिन ने बताया, "चाबी गुम हो जाने की जानकारी मिलने के बाद बैंक के लिए एक एकनॉलजेमेंट इश्यू करना जरूरी है। साथ ही वह ग्राहक की मौजूदगी में लॉक ब्रेकिंग प्रोसेस का समय तय करता है। इस दौरान इंडिपेंडेंट गवाह भी होते हैं।"
लॉकर के लॉक तोड़ने की प्रक्रिया का डॉक्युमेंटेशन होता है
बैंक के लॉकर के मौजूदा लॉक सिस्टम को तोड़ने और नया लॉक सिस्टम को लगाने के बाद ही ग्राहक लॉकर का दोबारा इस्तेमाल कर सकता है। इस प्रोसेस में समय लगता है। आम तौर पर बैंक इसके लिए एक तारीख तय करता है, टेक्निशियन को बुलाता है और लॉकर के ग्राहक को भी इस दौरान मौजूद रहने के लिए कहता है। इस पूरे प्रोसेस का डॉक्युमेंट तैयार होता है। कुछ मामलों में भविष्य में किसी तरह के विवाद से बचने के लिए लॉकर में रखी चीजों की लिस्ट बनती है।
लॉक तोड़ने पर आया खर्च ग्राहक को उठाना पड़ता है
लॉकर के लॉक को तोड़ने और नया लॉक लगाने पर आए खर्च का बोझ ग्राहक को उठाना पड़ता है। लेकिन, इस पूरे प्रोसेस की जिम्मेदारी बैंक पर होती है। हालांकि, ग्राहक को रिवाइज्ड लॉकर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करना होता है। अगर ग्राहक हस्ताक्षर करने से इनकार करता है तो बैंक ग्राहक को लॉकर इस्तेमाल करने से रोक सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्राहक को लॉकर की चाबी बहुत संभाल कर रखना चाहिए।